वैदिक पंचांग
दिनांक – 28 अप्रैल 2025
दिन – सोमवार
विक्रम संवत – 2082
शक संवत -1947
अयन – उत्तरायण
ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
मास – वैशाख
पक्ष – शुक्ल
तिथि – प्रतिपदा रात्रि 09:10 तक तत्पश्चात द्वितीया
नक्षत्र – भरणी रात्रि 09:37 तक तत्पश्चात कृत्तिका
योग – आयुष्मान रात्रि 08:03 तक तत्पश्चात सौभाग्य
राहुकाल – सुबह 07:47 से सुबह 09:23 तक
सूर्योदय – 06:11
सूर्यास्त – 07:01
दिशाशूल – पूर्व दिशा मे
व्रत पर्व विवरण- चंद्र-दर्शन (शाम-06:53 से रात्रि 07:38 तक*)
विशेष- प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। उनकी…
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता कहा गया है।…
भारतीय संस्कृति में देवी-देवताओं का अपना विशेष स्थान है। इन्हीं में से एक हैं न्याय…
मोहिनी एकादशी 2026: राशि अनुसार उपाय और उनका महत्व सनातन धर्म में एकादशी व्रत का…
सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से…
अक्षय तृतीया के चमत्कारी प्रयोग: अनंत सुख, समृद्धि और सौभाग्य का द्वार भारतीय संस्कृति में…