Subscribe for notification

सकट चौथ (लम्बोदर संकष्टी) – 6 जनवरी 2026 के लिए विशेष मार्गदर्शन* 6 जनवरी 2026, मंगलवार को कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि पर सकट चौथ / लम्बोदर संकष्टी मनाई जाएगी। यह तिथि विशेष रूप से संतानों के दीर्घायु, स्वास्थ्य और विघ्न नाश के लिए श्री गणेश जी की उपासना का दिन मानी जाती है। धनु राशि का सूर्य और कर्क से सिंह में गतिमान चन्द्र मन–दिमाग, घर–परिवार और मान–सम्मान पर विशेष प्रभाव देगा, इसलिए व्रत और साधना दोनों का फल तेज़ी से दिख सकता है।

पूजन विधि (संक्षेप में)

प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें – विशेषकर संतान, स्वास्थ्य और विघ्न नाश के लिए।

घर के पूजा स्थान या उत्तर–पूर्व (ईशान) में श्री गणेश जी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें; दीपक, धूप, अक्षत, दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक/लड्डू अवश्य रखें।

“ *ॐ गं गणपतये नमः* ” या “ *संकट नाशन गणेश स्तोत्र* ” का जप करें; कम से कम 11, 21 या 108 बार जप का संकल्प ले सकते हैं।

चन्द्र उदय के बाद चन्द्रमा को शुद्ध जल, थोड़ी सी दुर्वा/अक्षत और दूध–शक्कर मिश्रित अर्घ्य दें, फिर व्रत खोलें।

सकट चौथ की कथा सुनना/पढ़ना शास्त्रसम्मत माना गया है।

आज क्या करें

संतान, स्वास्थ्य और कर्ज से मुक्ति के लिए गणेश जी के समक्ष शांत मन से प्रार्थना करें।

माता–पिता, बुजुर्गों और गुरुजन का आशीर्वाद अवश्य लें; कल का दिन परिवार–केन्द्रित संकल्पों के लिए अनुकूल है।

जिनके ऊपर मानसिक दबाव, कोर्ट–कचहरी या जॉब में अड़चनें हैं, वे कल कम से कम 11 बार “ *ॐ वक्रतुंडाय हुं* ” का जप करें।

शाम–रात्रि में अनावश्यक बहस से बचकर शान्त, संयमित व्यवहार रखें – इससे चन्द्र–मंगल के तनाव को काफी हद तक टाला जा सकता है।

क्या न करें – विशेष चेतावनी* * *राहुकाल (15:14–16:35)* में बड़े आर्थिक निर्णय, यात्रा की शुरुआत या महत्वपूर्ण कागज़ पर हस्ताक्षर से यथासंभव बचें।* _व्रत रखते हुए भी अत्यधिक खाली पेट, शुगर/बीपी के मरीज कठोर निर्जल उपवास न करें; डॉक्टर की सलाह के अनुसार फलाहार/हल्का आहार रखें।_ * क्रोध, कटु वचन, पारिवारिक झगड़े और दिखावे के खर्च से विशेष रूप से बचें; *अश्लेषा–मघा प्रभाव से छोटी बात बड़ी बन सकती है।* * *आज गण्डमूल योग भी सक्रिय है* – यदि किसी शिशु का जन्म हो तो बाद में योग्य पंडित से गण्डमूल शांति करवाना शास्त्रीय रूप से उचित माना गया है; घबराने की आवश्यकता नहीं है, यह एक साधारण शांति–अनुष्ठान से संतुलित हो जाता है।

अन्तिम संकेत* आजका दिन श्री गणेश की शरण लेकर पुराने “संकट” काटने और नये वर्ष के लिए स्पष्ट संकल्प लेने का है। यह सामान्य धार्मिक मार्गदर्शन है; व्यक्ति–विशेष उपाय और रत्न/दशा आधारित सलाह के लिए अपनी जन्मकुंडली अनुसार ही निर्णय लेना श्रेयस्कर है।

दिवम् एस्ट्रो वर्ल्ड आचार्या सौ भावनाजी बिसावा

Share
Published by
दिवम् एस्ट्रो वर्ल्ड आचार्या सौ भावनाजी बिसावा

Recent Posts

शनि जयंती 2026 का महा-उपाय: बिगड़े काम बनाने का अचूक तरीका

हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। उनकी…

1 month ago

शनि जयंती 2026: न्याय, कर्म और अनुशासन के देवता को समर्पित महापर्व Shani Jayanti 2026

भारतीय संस्कृति में देवी-देवताओं का अपना विशेष स्थान है। इन्हीं में से एक हैं न्याय…

1 month ago

मोहिनी एकादशी 2026: राशि अनुसार उपाय और उनका महत्व

मोहिनी एकादशी 2026: राशि अनुसार उपाय और उनका महत्व सनातन धर्म में एकादशी व्रत का…

2 months ago

मोहिनी एकादशी व्रत 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व Mohini Ekadashi 2026

सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से…

2 months ago

अक्षय तृतीया के चमत्कारी प्रयोग: अनंत सुख, समृद्धि और सौभाग्य का द्वार Akshay Tritiya:2026

अक्षय तृतीया के चमत्कारी प्रयोग: अनंत सुख, समृद्धि और सौभाग्य का द्वार भारतीय संस्कृति में…

2 months ago