आज का पंचांग Aaj ka panchang
आज का वैदिक हिंदू पंचांग Hindu Panchang दिनांक – 07 अप्रैल 2025, 7/4/2025 दिन – सोमवार विक्रम संवत – 2082 गुजरात अनुसार 2081 शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र पक्ष – शुक्ल तिथि – दशमी रात्रि 08:00 तक तत्पश्चात एकादशी नक्षत्र – अश्लेशा पूर्ण रात्रि तक योग – धृति शाम 06:19 तक तत्पश्चात शूल राहुकाल – सुबह 08:00 से सुबह 09:34 तक सूर्योदय – 06:27 सूर्यास्त – 06:54 दिशाशूल – पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण- धर्मराज दशमी विशेष- एकादशी व्रत के लाभ 07 अप्रैल 2025 सोमवार को रात्रि 08:00 सै 08 अप्रैल, मंगलवार को रात्रि 09:12 तक एकादशी है। विशेष – 08 अप्रैल, मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है । एकादशी के दिन करने योग्य एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें ……विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l एकादशी के दिन ये सावधानी रहे महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल खाने का पाप लगता है…
आज का वैदिक हिंदू पंचांग Aaj ka Vaidik Hindu PANCHANG
वैदिक पंचांग हिंदू पंचांग Hindu panchang दिनांक – 20 मार्च 2025 दिन – गुरूवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – षष्ठी 21 मार्च रात्रि 02:45 तक तत्पश्चात सप्तमी नक्षत्र – अनुराधा रात्रि 11:31 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा योग – वज्र शाम 06:20 तक तत्पश्चात सिद्धि राहुकाल – दोपहर 02:17 से शाम 05:48 तक सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त – 06:48 दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे व्रत पर्व विवरण विशेष- षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) व्यतिपात योग 21 मार्च 2025 शुक्रवार को शाम 06:42 से 22 मार्च, शनिवार को शाम 06:37 तक व्यतिपात योग है। व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है। वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की। भविष्य पुराण में माना गया है कि हर इंसान को उसके शरीर, मन व बातों से किए गए पापों को भोगना पड़ता है। उसमें भी कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें महापाप माना गया है। आइए जानते हैं पांच ऐसे ही महापापों के बारे में जिन्हें करने वालों को नरक में सबसे ज्यादा यातनाएं झेलनी पड़ती है। ये हैं 5 सबसे बड़े पाप, इन्हें करने वालें को नर्क में मिलती है सबसे ज्यादा सजा 1) अनीति का धन:– किसी को ठग कर गलत काम कर या किसी के हिस्से की वस्तु को चुराकर धन एकत्रित करना और धन का दान न करने वाले को भी भविष्यपुराण में महापापी माना गया है। 2) गुरु से धोखाधड़ी:– गुरु मनुष्य को अच्छे-बुरे का ज्ञान देते है। गुरु को पिता के समान मानना चाहिए। गुरु के साथ कभी भी कंपट एवं धोखाधड़ी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना सबसे बड़ा पाप माना गया है। ऐसे इंसान को उसके पापों की सजा मिलती है। 3) पशुओं पर अत्याचार:– पशुओं पर अत्याचार करना, ब्राह्मण की हत्या या उसका अपमान करना, नौकरों से बुरा व्यवहार करने वाले मनुष्य को भी कुंभीपाक नाम के नर्क की यातना सहनी पड़ती है। इसलिए भुलकर भी ये महापाप नहीं करना चाहिए। 4) शराब पीना:– शराब में तीन प्रकार के पाप बताएँ गए है।स्त्री हो या पुरुष सभी को शराब व अन्य मादक पदार्थों से दुर रहना चाहिए।किसी भी तरह की शराब पीने से मनुष्य महापाप का भागी बन जाता है। 5) चोरी करना :– जो मनुष्य दुसरों की वस्तु हड़पने या चुराने की कोशिश करता है, वह पापी माना गया है। चोरी करने वाले इंसान या ऐसे काम में साथ देने वाले को नर्क में दुःख भोगने पड़ते है।इसलिए मनुष्य को कभी भी ये महापाप नहीं करना चाहिए।
आज का वैदिक पंचांग Aaj ka vaidik hindu panchang
वैदिक पंचांग Vaidik Hindu panchang दिनांक – 15 मार्च 2025 दिन – शनिवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – प्रतिपदा दोपहर 02:33 तक तत्पश्चात द्वितीया नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी सुबह 08:54 तक हस्त योग – गण्ड दोपहर 02:00 तक तत्पश्चात वृद्धि राहुकाल – सुबह 09:47 से सुबह 11:18 तक सूर्योदय 06:48 सूर्यास्त – 06:46 दिशाशूल – पूर्व दिशा व्रत पर्व विवरण- विशेष- प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) चैत्र मास Chaitra Mahina होली के तुरंत बाद चैत्र मास का प्रारंभ हो जाता है। चैत्र हिन्दू धर्म का प्रथम महीना है। चित्रा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम चैत्र पड़ा (चित्रानक्षत्रयुक्ता पौर्णमासी यत्र सः)। इस वर्ष 15 मार्च 2025 (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) चैत्र का आरम्भ होगा और गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार 30 मार्च से चैत्र मास प्रारंभ होगा । चैत्र मास को मधु मास के नाम से जाना जाता है। इस मास में बसंत ऋतु का यौवन पृथ्वी पर देखने को मिलता है। चैत्र में रोहिणी और अश्विनी शून्य नक्षत्र हैं इनमें कार्य करने से धन का नाश होता है। महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “चैत्रं तु नियतो मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। सुवर्णमणिमुक्ताढ्ये कुले महति जायते।।” जो नियम पूर्वक रहकर चैत्रमास को एक समय भोजन करते बिताता है, वह सुवर्ण, मणि और मोतियों से सम्पन्न महान कुल में जन्म लेता है ।चैत्र में गुड़ खाना मना बताया गया है। चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है। शिवपुराण के अनुसार चैत्र में गौ का दान करने से कायिक, वाचिक तथा मानसिक पापों का निवारण होता है .देव प्रतिष्ठा के लिये चैत्र मास शुभ है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष का शुभारम्भ होता है। हिन्दू नववर्ष के चैत्र मास से ही शुरू होने के पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान ब्रह्मदेव ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। ताकि सृष्टि निरंतर प्रकाश की ओर बढ़े। चैत्रमासि जगद् ब्रह्मा स सर्वा प्रथमेऽवानि । शुक्ल पक्षे समग्रं तत – तदा सूर्योदय सति ।। (ब्रह्मपुराण) नारद पुराण में भी कहा गया है की चैत्रमास के शुक्लपक्ष में प्रथमदिं सूर्योदय काल में ब्रह्माजी ने सम्पूर्ण जगत की सृष्टि की थी। चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससज प्रथमेऽहनि ।। शुक्लपक्षे समग्रं वै तदा सूर्योदये सति ।। इसलिए खास है चैत्र ,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र में विष्कुम्भ योग में दिन के समय भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। “कृते च प्रभवे चैत्रे प्रतिपच्छुक्लपक्षगा । रेवत्यां योग-विष्कुम्भे दिवा द्वादश-नाड़िका: ।। मत्स्यरूपकुमार्यांच अवतीर्णो हरि: स्वयम् ।।”चैत्र शुक्ल तृतीया तथा चैत्र पूर्णिमा मन्वरादि तिथियाँ हैं। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। भविष्यपुराण में चैत्र शुक्ल से विशेष सरस्वती व्रत का विधान वर्णित है । चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्र मनाये जाते हैं जिसमें व्रत रखने के साथ माँ जगतजननी की पूजा का विशेष विधान है। चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। युगों में प्रथम सत्ययुग का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से माना जाता है। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को हुआ था। युगाब्द (युधिष्ठिर संवत) का आरम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को माना जाता है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् का प्रारम्भ भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को किया गया था। चैत्र मास में ऋतु परिवर्तन होता है और हमारे आयुर्वेदाचार्यों ने इस मास को स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना है। पारिभद्रस्य पत्राणि कोमलानि विशेषत:। सुपुष्पाणि समानीय चूर्णंकृत्वा विधानत: । मरीचिं लवणं हिंगु जीरणेण संयुतम्। अजमोदयुतं कुत्वा भक्षयेद्रोगशान्तये ।
आज का पंचांग Daily panchang
आज का हिन्दू पंचांग Aaj ka Hindu panchang दिनांक – 14 मार्च 2025 दिन- शुक्रवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – पूर्णिमा दोपहर 12:23 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी पूर्ण रात्रि तक योग- शूल दोपहर 01:24 तक तत्पश्चात् गण्ड राहुकाल – सुबह 11:19 से दोपहर 12:49 सूर्योदय – 06:53 सूर्यास्त – 06:44 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:13 से प्रातः 06:01 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:25 से दोपहर 01:13 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:24 मार्च 15 से रात्रि 01:12 मार्च 15 तक व्रत पर्व विवरण – फाल्गुनी पूर्णिमा, होली, श्री चैतन्य महाप्रभु जयंती, लक्ष्मी जयंती, षडशीति संक्रांति (पुण्यकाल दोपहर 12:36 से सूर्यास्त तक) विशेष- प्रतिपदा को कुष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) रंगों में प्रयुक्त रसायनों का स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव रासायनिक रंग मुख्यतः इंजन आयल के साथ आक्सीडाइज्ड धातु या औद्योगिक वर्णकों (डाई) के साथ मिला कर तैयार किये जाते हैं ।जैसेः- काला रंग– लेड आक्साइड — गुर्दे की बीमारी हरा रंग – कॉपर सल्फेट – आँखों में जलन, सूजन, अस्थायी अंधत्व सिल्वर रंग – एल्युमिनियम ब्रोमाइड – कैंसर. नीला रंग – प्रूशियन ब्लू – ‘कान्टेक्ट डर्मेटाइटिस’ नामक भयंकर त्वचारोग. लाल रंग – मरक्यूरी सल्फाइट – त्वचा का कैंसर. अतः होली खेलें परंतु रासायनिक रंगों से नहीं प्राकृतिक रंगों से, जिन्हें आप घर पर आसानी से बना सकते हैं । प्राकृतिक रंग बनाने की सरल विधियाँ केसरिया रंगः पलाश के फूलों से यह रंग सरलता से तैयार किया जा सकता है । पलाश के फूलों को रात को पानी में भिगो दें । सुबह इस केसरिया रंग को ऐसे ही प्रयोग में लायें या उबालकर होली का आनंद उठायें । यह रंग होली खेलने के लिए सबसे बढ़िया है । शास्त्रों में भी पलाश के फूलों से होली खेलने का वर्णन आता है । इसमें औषधिय गुण होते हैं । आयुर्वेद के अनुसार यह कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, मूत्रकृच्छ, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है । रक्तसंचार को नियमित व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ ही यह मानसिक शक्ति तथा इच्छाशक्ति में भी वृद्धि करता है । सूखा हरा रंगः मेंहदी या हिना का पाउडर तथा गेहूँ या अन्य अनाज के आटे को समान मात्रा में मिलाकर सूखा हरा रंग बनायें । आँवला चूर्ण व मेंहदी को मिलाने से भूरा रंग बनता है, जो त्वचा व बालों के लिए लाभदायी है । सूखा पीला रंगः हल्दी व बेसन मिला के अथवा अमलतास व गेंदे के फूलों को छाया में सुखाकर पीस के पीला रंग प्राप्त कर सकते हैं । गीला पीला रंगः एक चम्मच हल्दी दो लीटर पानी में उबालें या मिठाइयों में पड़ने वाले रंग जो खाने के काम आते हैं, उनका भी उपयोग कर सकते हैं । अमलतास या गेंदे के फूलों को रात को पानी भिगोकर रखें, सुबह उबालें । लाल रंगः लाल चंदन (रक्त चंदन) पाउडर को सूखे लाल रंग के रूप में प्रयोग कर सकते हैं । यह त्वचा के लिए लाभदायक व सौंदर्यवर्धक है। दो चम्मच लाल चंदन एक लीटर पानी में डालकर उबालने से लाल रंग प्राप्त होता है, जिसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलायें ।
आज का पंचांग Aaj ka panchang
आज का हिन्दू पंचांग Aaj ka hindu panchang दिनांक – 13 मार्च 2025 दिन – गुरुवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – चतुर्दशी सुबह 10:35 तक तत्पश्चात पूर्णिमा नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी प्रातः 06:19 मार्च 14 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी योग- धृति दोपहर 01:03 तक तत्पश्चात शूल राहुकाल- दोपहर 02:19 से दोपहर 03:49 तक सूर्योदय – 06:54 सूर्यास्त – 06:44 दिशा शूल – दक्षिण दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:14 से प्रातः 06:02 तक, अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:25 से दोपहर 01:13 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:25 मार्च 14 से रात्रि 01:13 मार्च 14 तक व्रत पर्व विवरण – होलिका दहन, हुताशनी पूर्णिमा, अट्टूकल पोंगल विशेष – चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल खाना व लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) होलाष्टक होलाष्टक फाल्गुन मास के अष्टमी से शुरू होता है पूनम दिन होलिका दहन के साथ समाप्त होती है । होलाष्टक से ले कर पूनम तक हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए कई यातनाएं दिया था । आठवां दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली थी । होलिका को यह वरदान था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी, ऐसे में होलिका भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई । लेकिन भगवान विष्णु के आशीर्वाद से प्रह्लाद को अग्नि जला नहीं सकी, बल्कि होलिका इस अग्नि में जलकर भस्म हुई । यह सारी घटना उन्हीं आठ दिनों में हुई थी । जिन्हें होलाष्टक के नाम से जाना जाता है । इस आठ दिनों की अवधि को अशुभ माना जाता है । इस अवधि में किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है । होलाष्टक में वर्जित कार्य : 1. विवाह करना ।2. वाहन खरीदना ।3. घर खरीदना ।4. भूमि पूजन ।5. गृहप्रवेश ।6. 16 संस्कार ।7. यज्ञ, हवन या होम ।8. नया व्यापार शुरु करना ।9. नए वस्त्र या कोई वस्तु खरीदना ।10. यात्रा करना । होलाष्टक के वक्त लोगों को सदाचार और संयम का पालन करना चाहिए । इसके अलावा इन दिनों में भगवान को याद करके मंत्र जप, साधना और आध्यात्मिक कार्य करना चाहिए । इस समय के अवधि साधना और सिद्धि के लिए काफी अनुकूल माना गया है ।