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आज का पंचांग Aaj ka panchang

आज का वैदिक हिंदू पंचांग Hindu PANCHANG दिनांक – 26 मार्च 2025 दिन – बुधवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – द्वादशी 27 मार्च रात्रि 01:42 तक तत्पश्चात त्रयोदशी नक्षत्र – धनिष्ठा 27 मार्च रात्रि 02:30 तक तत्पश्चात शतभिषा योग – सिद्ध दोपहर 12:26 तक तत्पश्चात साध्य राहुकाल – दोपहर 12:44 से दोपहर 02:16 तक सूर्योदय – 06:38 सूर्यास्त – 06:50 दिशाशूल – उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- पपमोचनी एकादशी (भागवत),पंचक ( आरंभ -दोपहर 03:14) विशेष- द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) वारुणी योग 27 मार्च 2025 गुरुवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक वारुणी योग है। वारुणी योग में गंगादि तीर्थ में स्नान, दान, उपवास १०० सूर्यग्रहणों के समान फलदायी है। वैदिक हिंदू पंचांग hindu panchang प्रदोष व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 27 मार्च, गुरुवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए… ऐसे करें व्रत व पूजा प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं। पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें। भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी खोले।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। ये उपाय करें :— सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है। कर्ज-मुक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि 27 मार्च 2025 गुरुवार को मासिक शिवरात्रि है। हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते- करते ये 17 मंत्र बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोले।इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी 1).ॐ शिवाय नम: 2).ॐ सर्वात्मने नम: 3).ॐ त्रिनेत्राय नम: 4).ॐ हराय नम: 5).ॐ इन्द्र्मुखाय नम: 6).ॐ श्रीकंठाय नम: 7).ॐ सद्योजाताय नम: 8).ॐ वामदेवाय नम: 9).ॐ अघोरह्र्द्याय नम: 10).ॐ तत्पुरुषाय नम: 11).ॐ ईशानाय नम: 12).ॐ अनंतधर्माय नम: 13).ॐ ज्ञानभूताय नम: 14). ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम: 15).ॐ प्रधानाय नम: 16).ॐ व्योमात्मने नम: 17).ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम: आर्थिक परेशानी से बचने हेतु हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि – कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसके घर में आर्थिक कष्ट रहते हैं वो शाम के समय या संध्या के समय जप-प्रार्थना करें एवं शिवमंदिर में दीप-दान करें । और रात को जब 12 बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी। प्रति वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना |बैठ कर भगवान शिवजी के नाम का जप करना प्रार्थना करना, | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जल्दी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है ।

आज का पंचांग Daily panchang

7 March 2025, by Divam astro world दिनांक – 7 मार्च 2025 दिन – शुक्रवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – अष्टमी सुबह 09:18 तक तत्पश्चात नवमी नक्षत्र – मृगशिरा रात्रि 11:32 तक  तक तत्पश्चात आर्द्रा योग – प्रीति शाम 06:15 तक तत्पश्चात आयुष्मान् राहु काल – सुबह 11:22 से दोपहर 12:51 तक सूर्योदय – 06:59 सूर्यास्त – 06:41 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:18 से 06:07 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:27 से दोपहर 01:14 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 08 से रात्रि 01:15 मार्च 08 तक व्रत पर्व विवरण – मासिक दुर्गाष्टमी विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है व नवमी को लौकी खाना गौमाँस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

तीर्थ में पालने योग्य १२ नियम आज का पंचांग Daily Panchang

6 March 2025, by Divam astro world दिनांक – 6 मार्च 2025 दिन – गुरुवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – सप्तमी सुबह 10:50 तक तत्पश्चात अष्टमी नक्षत्र – रोहिणी रात्रि 12:05 मार्च 07 तक तत्पश्चात मृगशिरा योग- विष्कम्भ रात्रि 08:29 तक तत्पश्चात प्रीति राहु काल – दोपहर 02:20 से दोपहर 03:48 तक सूर्योदय – 07:00 सूर्यास्त – 06:41 दिशा शूल – दक्षिण दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:19 से 06:08 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:27 से दोपहर 01:15 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 07 से रात्रि 01:15 मार्च 07 तक व्रत पर्व विवरण – रोहिणी व्रत विशेष – सप्तमी को ताड़ फल फल खाने से रोग बढ़ता है व शरीर का नाश होता है और अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) तीर्थ में पालने योग्य १२ नियम अश्वमेधसहस्राणि वाजपेयशतानि च। लक्षं प्रदक्षिणा भूमेः कुम्भस्नानेन तत्फलम् ।। ‘हजारों अश्वमेध यज्ञ, सैकड़ों वाजपेय यज्ञ और लाखों बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से जो फल होता है, वही फल एक बार कुम्भ-स्नान करने से प्राप्त हो जाता है।’ तीर्थ में ये बारह नियम अगर कोई पालता है तो उसे तीर्थ का पूरा फायदा होता है: (१) हाथों का संयम : गंगा में गोता भी मारा और अनधिकार किसीकी वस्तु ले ली या ऐसी-वैसी कोई चीज उठाकर मुँह में डाल ली तो पुण्यप्राप्ति का आनंद नहीं होगा । (२) पैरों का संयम: कहीं भी चले गये मौज-मजा मारने के लिए… नहीं, अनुचित जगह पर न जायें । (३) मन को दूषित विचारों व चिंतन से बचाकर भगवच्चिंतन करना । (४) सत्संग व वेदांत शास्त्र का आश्रय लेना : ऐसा नहीं कि शरीर में बुखार है और दे मारा गोता । पुण्यलाभ करें और फिर हो गया बुखार या न्यूमोनिया और आदमी मर गया, ऐसा नहीं करना चाहिए । देश,काल और शरीर की अवस्था देखनी चाहिए । (५) तपस्या। (६) भगवान की कीर्ति, भगवान के गुणों का गान कुम्भ-स्थान पर करना चाहिए । (७) परिग्रह का त्याग : कोई कुछ चीज दे तो तीर्थ में दान नहीं लेना चाहिए । तीर्थ में दूसरों की सुविधाओं का उपयोग करके अपने ऊपर बोझा न चढ़ायें । दान का खाना, अशुद्ध खाना, प्रसाद में धोखेबाजी करके बार-बार लेना… अशुद्ध व्यवहार पुण्य क्षीण और हृदय को मलिन करता है । एक तरफ पुण्य कमा रहे हैं, दूसरी तरफ बोझा चढ़ा रहे हैं । यह न करें । (८) जैसी भी परिस्थिति हो, आत्मसंतोष होना चाहिए । हाय रे ! धक्का धक्की है, बस नहीं मिली… ऐसा करके चित्त नहीं बिगाड़ना । ‘हरे-हरे ! वाह ! यार की मौज ! तेरी मर्जी पूरण हो !’ – इस प्रकार अपने चित्त को संतुष्ट रखें । (९) किसी प्रकार के अहंकार को न पोसें: ‘मैं तो तीन बजे उठा था, मैं तो इतने मील पैदल गया और मैंने तो १० डुबकियाँ लगायीं…. – ऐसा अहंकार पुण्य को क्षीण कर देता है । भगवान की कृपा है जो पुण्यकर्म हुआ, उसको छुपाकर रखो । (१०) ‘यह करूँगा, यह भोगूँगा, इधर जाऊँगा, उधर जाऊँगा…. इसका चिंतन न करें । ‘मैं कौन हूँ ? जन्म के पहले मैं कौन था, अभी कौन हूँ और बाद में कौन रहूँगा ? तो मैं तो वही चैतन्य आत्मा हूँ । मैं जन्म के पहले था, अभी हूँ और बाद में भी रहूँगा ।’ – इस प्रकार अपने स्वभाव में आने का प्रयत्न करें । (११) दम्भ, दिखावा न करें । (१२) इन्द्रिय-लोलुपता नहीं । कुछ भी खा लिया कि मजा आता है, कहीं भी चले गये… तो मौज-मजा मारने के लिए कुम्भ-स्नान नहीं है । सच्चाई, सत्कर्म और प्रभु-स्नेह से तपस्या करके अंतरात्मा का माधुर्य जगाने के लिए और हृदय को प्रसन्नता दिलाने के लिए तथा सत्संग के रहस्य का प्रसाद पाने के लिए संगम-स्नान है ।” गुरुवार विशेष हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है । गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें : एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें । गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है । गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।

आज का पंचांग Panchang

5 March 2025 Wednesday,by Divam astro world दिनांक – 5 मार्च 2025 दिन – बुधवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – षष्ठी दोपहर 12:51 तक तत्पश्चात सप्तमी नक्षत्र – कृतिका रात्रि 01:08 मार्च 06 तक, तत्पश्चात रोहिणी योग- वैधृति रात्रि 11:07 तक तत्पश्चात विषकम्भ राहु काल – दोपहर 12:51 से दोपहर 02:20 तक सूर्योदय – 07:02 सूर्यास्त – 06:40 दिशा शूल – उत्तर दिशा में अग्निवास: पृथ्वी- शुभ चन्द्र वास: पूर्व, दक्षिण शिववास: वृषे- अभीष्टसिद्धि (दि..12:51)तक, भोजने- पीडायां ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:20 से 06:09 तक अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 06 से रात्रि 01:15 मार्च 06 तक व्रत पर्व विवरण – सर्वार्थ सिद्धि योग (अहोरात्रि) पद, चरण 1 अ कृत्तिका 08:12:02 2 ई कृत्तिका 13:48:54 3 उ कृत्तिका 19:27:20 4 ए कृत्तिका 25:07:22 चोघडिया, दिन लाभ 06:46 – 08:14 शुभ अमृत 08:14 – 09:42 शुभ काल 09:42 – 11:10 अशुभ शुभ 11:10 – 12:39 शुभ रोग 12:39 – 14:07 अशुभ उद्वेग 14:07 – 15:35 अशुभ चर 15:35 – 17:03 शुभ लाभ 17:03 – 18:31 शुभ चोघडिया, रात उद्वेग 18:31 – 20:03 अशुभ शुभ 20:03 – 21:34 शुभ अमृत. 21:34 – 23:06 शुभ चर 23:06 – 24:38 शुभ रोग 24:38 – 26:10 अशुभ काल 26:10 – 27:42 अशुभ लाभ 27:42 – 29:14 शुभ उद्वेग 29:14 – 30:45 अशुभ विशेष – षष्ठी को नीम का पत्ती फल या दातुन मुख में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है व सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है और शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

आज का पंचांग Panchang today

4 March,2025, Tuesday by Divam astro world दिनांक – 4 मार्च 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – पञ्चमी  दोपहर 3:16 तक तत्पश्चात षष्ठी नक्षत्र – भरणी रात्रि 02:37 मार्च 05 तक तत्पश्चात कृत्तिका योग- इंद्र रात्रि 02:07 मार्च 05 तक तत्पश्चात वैधृति राहु काल – दोपहर 03:48 से शाम 05:16 तक सूर्योदय – 07:02 सूर्यास्त – 06:40 दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:21 से 06:10 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:28 से दोपहर 01:15 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:27  मार्च 05 से रात्रि 01:15 मार्च 05 तक व्रत पर्व विवरण – स्कन्द षष्ठी, सर्वार्थसिद्धि योग (रात्रि 02:37 मार्च 05 से प्रातः 06:58 मार्च 05 तक) विशेष – पञ्चमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) देशी गोघृत सेवन के लाभ : (१) हृदय स्वस्थ व बलवान होता है। रक्तदाब नियंत्रित रहता है । हृदय की रक्तवाहिनियों की धमनी प्रतिचय (atherosclerosis) से रक्षा करता है। अतः हृदयरोग से रक्षा हेतु तथा हृदय रोगियों के लिए यह घी अत्यंत लाभदायी है । (२) इससे ओज की वृद्धि व दीर्घायुष्य की प्राप्ति होती है। (३) मस्तिष्क की कोशिकाएँ (neurons) पुष्ट हो जाती हैं, जिससे बुद्धि व इन्द्रियों की कार्यक्षमता विकसित होती है। बुद्धि, धारणाशक्ति एवं स्मृति की वृद्धि होती है। (४) मन का सत्व गुण विकसित होकर चिंता, तनाव, चिड़चिड़ापन, क्रोध आदि दूर होने में मदद मिलती है । मन की एकाग्रता बढ़ती है । साधना में उन्नति होती है । (५) नेत्रज्योति बढ़ती है । चश्मा, मोतियाबिंद (cataract), काँचबिंदु (glaucoma) व आँखों की अन्य समस्याओं से रक्षा होती है । (६) हड्डियाँ व स्नायु सशक्त होते हैं। संधिस्थान (joints) लचीले व मजबूत बनते हैं । (७) कैंसर से लड़ने व उसकी रोकथाम की आश्चर्यजनक क्षमता प्राप्त होती है । (८) रोगप्रतिरोधक शक्ति (immunity power) बढ़कर घातक विषाणुजन्य संक्रमणों (viral infections) से प्रतिकार करने की शक्ति मिलती है । (९) जठराग्नि तीव्र व पाचन-संस्थान सशक्त होता है। मोटापा नहीं आता, वजन नियंत्रित रहता है । वीर्य पुष्ट होता है। यौवन दीर्घकाल तक बना रहता है । (१०) चेहरे की सौम्यता, तेज एवं सुंदरता बढ़ती है। स्वर उत्तम होता है एवं रंग निखरता है। बाल घने, मुलायम व लम्बे होते हैं । (११) गर्भवती माँ द्वारा सेवन करने पर गर्भस्थ शिशु बलवान, पुष्ट और बुद्धिमान बनता है ।

पति- पत्नी में कलह का कारण बनते हैं जन्म कुंडली में स्थित यह ग्रह Pati-Patni me kalah ka karan bante hai janm kundali me sthit ye grah (Married life problems & solutions)

1March,2025 by Divam astro world जन्म कुंडली में वैवाहिक जीवन संबंधी शुभ अशुभ योग आजकल प्रत्येक परिवार चाहे वह संयुक्त हो अथवा एकल, गृह कलह से ग्रस्त दिखाई देता है। गृह क्लेश के फैले विषाक्त वातावरण से परिवार का मुखिया, परिवार का प्रत्येक सदस्य तनावग्रस्त जीवन व्ययतीत करता है। गृह कलह का यह वातावरण परिवार के सदस्यों में रक्तचाप, हृदय रोग, उन्माद, मधुमेह जैसी बीमारियों को जन्म देता है, वहीं पति-पत्नी मे तलाक, परिवार में बिखराव जमीन जायदाद तथा व्यवसाय के बंटवारे और लड़ाई झगड़ों का मुख्य कारण बनता है। गृह कलह मुख्य रूप से पति-पत्नी पिता-पुत्र, भाई-भाई, सास-बहू ननद-भाभी, देवरानी-जेठानी के मध्य होती देखी गई है। यहां ज्योतिषीय दृष्टि से गृह कलह के कारणों एवं उनके निवारण का विश्लेषण प्रस्तुत हैं।दाम्पत्य जीवन में गृह कलहपति-पत्नी की कामना होती है कि उनके दाम्पत्य जीवन में किसी प्रकार की कड़वाहट पैदा न हो तथा जीवन में सदैव सुख की बयार बहती रहे। लेकिन अधिकतर परिवारों में पति-पत्नी के मध्य लड़ाई-झगड़े, संबंध विच्छेद, तलाक आदि होते देखे गए हैं। इसके लिए ज्योतिषीय दृष्टि से देखें कि कई बार न चाहते हुए भी घर में कलह का वातावरण पैदा हो जाता है। ऐसा अशुभ एवं पापी ग्रहों के प्रभाव के कारण भी होता हैं। यदि समय से पहले उनका निदान कर लिया जाए तो कलह की संभावनाएं कम हो जाती है। जन्मकुंडली में सप्तम भाव, सप्तमेश, सप्तम भाव में स्थित ग्रह सप्तम भाव पर दृष्टि डालने वाले ग्रह तथा सप्तन भाव के कारक ग्रह से व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन के बारे में विचार किया जाता है। यदि जातक का सप्तम भाव निर्बल हो, सप्तम भाव पर पापी ग्रह शनि, मंगल, सूर्य या राहु-केतु का प्रभाव हो, गुरु और शुक्र अस्त हों अथवा पायांत हो तो दाम्पत्य सुख में बाधा आती है। शनि का प्रभाव सप्तम भाव पर होने पर दाम्पत्य जीवन शुष्क और नीरस होता है। विवाह के पश्चात जीवन साधी के प्रति उत्साह और उमग की भावना क्षीण होने लगती है। परस्पर आकर्षण में कमी आ जाती है। पति पत्नी साथ रहते हुए भी पृथक रहने के समान जीवन व्यतीत करते हैं। पति-पत्नी आपस में चिडचिडापन, स्वभाव में कड़ाहट, व्यवहार में रुखा मन आ जाता है जिसके फलस्वरुप पति पत्नी में छोटी-छोटी बातों पर विवाद पैदा हो जाते हैं। झगड़े होने से परिवार के वातावरण में कलह के बादल छा जाते हैं। मंगल : मंगल पापी और उग्र ग्रह माना जाता है। जातक की कुंडली में मंगल जन्म लग्न से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होने पर जातक मंगली माना जाता है। मंगल जातक के स्वभाव में अधिक उग्रता और क्रोध पैदा करता है। यदि लग्न अथवा सप्तम भाव पर मंगल स्थित हो या सप्तम भाव पर मंगल का प्रभाव हो तथा किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो जातक क्रोधी, स्वाभिमानी एव अहंकारी होता है स्वभाव में उग्रता हटीलापन होने से परिवार में उठने, वाली छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्न के मध्य विवाद या झगडे उत्पन्न हो जाते हैं जो अंत में गृह कलह पैदा करते हैं। सूर्य जन्मकुंडली में सूर्य का प्रथम एव सप्तम भावों पर प्रभाव होने पर और निर्बल व नीच राशि के सूर्य के सप्तम भाव में होने पर जातक अहंकारी स्वाभिमानी एवं अडियल स्वभाव का होता है। जीवनसाथी से स्वाभिमान का टकराव होता है, जिससे विवाद की स्थिति बनती है। राहु लग्न एवं सप्तम भाव में राहू के दुष्प्रभाव के कारण दाम्पत्य जीवन में विषम परिस्थितियों का सामना करना पडता है। अन्य परिवार के सदस्यों के दखल के कारण पति-पत्नी के मध्य विवाद, लड़ाई-झगड़े खड़े होते हैं जिससे उनके दाम्पत्य जीवन में सुख की कमी आती है पति-पत्नी एक दूसरे को कोसते रहते हैं एक-दूसरे की निंदा तथा आलोचना करते रहते हैं राहु के इस दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पति-पत्नी को आपस में आलोचना करने के स्थान पर एक-दूसरे की प्रशंसा करनी चाहिए। गृह कलह को समाप्त करने के ज्योतिषीय उपाय जैसा पूर्व में बताया गया है, गृह कलह के पीछे जातक की कुंडली में स्थित क्रूर और पापी ग्रह शनि, मंगल, सूर्य तथा राहु की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है परिवार के मुखिया या पीडित व्यक्ति को गृह कलह के दौरान चल रही क्रूर व पापी ग्रहों की महादशा अंतर्दशा के अनुसार निम्न ज्योतिषीय उपाय करने चाहिए। गृह कलह का कारक शनि होने परभगवान शिव के मंदिर में या घर पर प्राण प्रतिष्ठित पारद शिवलिंग पर नित्य गाय के कच्चे दूध मिश्रित जल से ॐ नमः शिवाय मंत्र से अभिषेक करें साथ ही रुद्राक्ष माला से महामृत्युजय मंत्र का एक माला जप करें गृह कलह से पीडित व्यक्ति को काले घोड़े की नाल से निर्मित छल्ला | शुक्ल पक्ष के शनिवार को मध्यमा मे धारण करना चाहिए। प्रत्येक शनिवार को पीपल वृक्ष के नीचे सूर्योदय से पूर्व तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। शुद्ध जल, दूध और पुष्प वृक्ष को अर्पित कर तिल का प्रसाद चढ़ाएं। वहीं बैठकर निम्न शनि मंत्र का 21 बार उच्चारण करें। ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” शुक्ल पक्ष के शनिवार को हनुमान मंदिर में हनुमान के चरणों में लाल सिदूर मिश्रित अक्षत अर्पित करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण 21 बार करें ॐ श्री रामदूताय नमः”साथ ही हनुमान जी से परिवार में गृह कलह समाप्त करने की प्रार्थना करे तथा हनुमान जी के चरणों का सिदूर लेकर अपने माथे पर लगाए ऐसा कम से कम 7 शनिवार करें। गृह कलह का कारण मंगल ग्रह होने पर शुक्ल पक्ष के मंगलवार को स्नान कर हनुमान मंदिर जाएं तथा 100 ग्राम चमेली का तेल और 125 ग्राम सिंदूर हनुमान विग्रह पर चढाए। साथ ही गुड और चने चढाएं पूजा अर्चना कर वही बैठकर बजरंग बाण का पाठ करे तथा हनुमान जी से गृह कलह समाप्त हो इसके लिए प्रार्थना करे यह क्रम कम से कम 7 मंगलवार दोहराएं। लाल वस्त्र में 2 मुट्ठी मसूर की दाल बांधकर मंगलवार को भिखारी को दान करें। बंदरों को प्रत्येक मंगलवार चने, केले खिलाए। अपनी जन्म कुंडली के भाग्य स्थान को करें जागृत! गृह कलह का कारण सूर्य ग्रह होने पर गृह कलह पीडित व्यक्ति को या गृहस्वामी को सूर्योदय से पूर्व स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान सूर्य को तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें

रविवार विशेष पंचांग

दिनांक – 23 फरवरी 2025 दिन – रविवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – दशमी दोपहर 01:55 तक तत्पश्चात एकादशी नक्षत्र – मूल शाम 06:43 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा योग – वज्र सुबह 11:19 तक, तत्पश्चात सिद्धि राहु काल – शाम 05:13 से शाम 06:40 तक सूर्योदय – 07:09 सूर्यास्त – 06:36 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:27 से 06:16 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 24 से रात्रि 01:18 फरवरी 24 तक व्रत पर्व विवरण – महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 07:06 से शाम 6:43 तक) विशेष – दशमी कलंबी शाक त्याज्य है व एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) स्नान कैसे करना चाहिये ?? जहाँ से प्रवाह आता हो वहाँ पहले सिर की डुबकी मारें । घर में भी स्नान करे तो पहले जल सिर पर डालें…. पैरों पर पहले नहीं डालना चाहिए । शीतल जल सिर को लगने से सिर की गर्मी पैरों के तरफ जाती है । और जहाँ जलाशय है, स्थिर जल है वहाँ सूर्य पूर्वमुखी होकर स्नान करें । घर में स्नान करें तो उस बाल्टी के पानी में जौ और तिल अथवा थोड़ा गोमूत्र अथवा तीर्थोद्क पहले (गंगाजल आदि) डाल कर फिर बाल्टी भरें तो घर में भी तीर्थ स्नान माना जायेगा । रविवार विशेष रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90) रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75) रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है । रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए । स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं । रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है । रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।

हवन-यज्ञ क्यो करे,कौनसा यज्ञ सर्वोपरि है (Yagya kyu kare)

दिनांक – 13 फरवरी 2025 दिन – गुरुवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – शिशिर मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – प्रतिपदा रात्रि 08:21 तक तत्पश्चात द्वितीया नक्षत्र – मघा रात्रि 09:07 तक, तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी योग – शोभन प्रातः 07:31 तक, तत्पश्चात अतिगण्ड राहु काल – दोपहर 02:19 से दोपहर 03:44 तक सूर्योदय – 07:16 सूर्यास्त – 06:30 दिशा शूल – दक्षिण दिशा में अग्निवास: पाताल- अशुभ (रा.08:21)तक, पृथ्वी- शुभ चन्द्र वास: पूर्व शिववास: गौरीसन्निधौ- शुभ (रा.08:21)तक, सभायां- कष्टकारक ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:32 से 06:23 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:31 से दोपहर 01:17 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 14 से रात्रि 01:19 फरवरी 14 तक 🔻पद, चरण🔻 2 मी –मघा 08:16:26 3 मू –मघा 14:40:19 4 मे –मघा 21:06:08 1 मो —पूर्व फाल्गुनी 27:33:52 🔶चोघडिया, दिन🔶 शुभ –07:02 – 08:27 शुभ रोग –08:27 – 09:52 अशुभ उद्वेग –09:52 – 11:16 अशुभ चर –11:16 – 12:41 शुभ लाभ –12:41 – 14:06 शुभ अमृत –14:06 – 15:31 शुभ काल –15:31 – 16:56 अशुभ शुभ –16:56 – 18:21 शुभ 🔶चोघडिया, रात🔶 अमृत –18:21 – 19:56 शुभ चर –19:56 – 21:31 शुभ रोग –21:31 – 23:06 अशुभ काल –23:06 – 24:41 अशुभ लाभ –24:41 – 26:16 शुभ उद्वेग –26:16 – 27:51 अशुभ शुभ –27:51 – 29:26 शुभ अमृत– 29:26 – 31:01 शुभ विशेष – प्रतिपदा को कुष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 🔹हवन-यज्ञ क्यों ?🔹 🔹प्रतिदिन यज्ञ का लाभ पाने की युक्ति🔹 🔸आज भी आपको देशी गाय के गोबर के कंडे व कोयले मिल सकते हैं। कभी-कभार उन्हें जलाकर जौ, तिल, घी, नारियल के टुकड़े एवं गूगल मिला के तैयार किया गया धूप कर दो तो बहुत सारे हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जायेंगे। 🔸जब आपको ध्यान, जप आदि करना हो तो थोड़ी देर पहले यह धूप करके फिर उस धूप से शुद्ध बने हुए वातावरण में प्राणायाम, ध्यान, जप करने बैठें तो बहुत ही लाभ होगा। किंतु धूप में भी अति न करें, नहीं तो गले में कुछ तकलीफ हो सकती है, अतः माप से करें। *🔸गौ-गोबर के कंडे के धुएँ से हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। इसी कारण जब कोई मर जाता है तो श्मशान-यात्रा में एक व्यक्ति मटकी में कंडों का धूआँ करते हुए चलता है ताकि मृतक के जीवाणु समाज में, वातावरण में न फैलें। 🔸आजकल परफ्यूम आदि से अगरबत्तियाँ बनती हैं। वे खुशबू तो देती हैं लेकिन उनमें प्रयुक्त रसायनों का हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। 🔸एक तो मोटर-गाड़ियों के धुएँ का कुप्रभाव, दूसरा अगरबत्तियों के रसायनों का भी कुप्रभाव शरीर पर पड़ता है। ऐसी अगरबत्तियों की अपेक्षा सात्त्विक अगरबत्ती या धूपबत्ती मिल जाय तो ठीक है, नहीं तो कम-से-कम घी का थोड़ा धूप कर लिया करो। 🔹सर्वोपरि यज्ञ कौन-सा ?🔹 🔸कीटाणुओं को मारना और शरीररूपी कीटाणुओं को अच्छा रखना उसीके पीछे वैज्ञानिकों की सारी भागदौड़ और उनका विज्ञान काम करता है। 🔸हमारे ऋषियों ने कीटाणु मारने के लिए यज्ञ की खोज नहीं की है अपितु वातावरण, भाव तथा जन्म-मरण के चक्कर में डालनेवाले मलिन अंतःकरण को ठीक करके परमात्मप्राप्ति में यज्ञ को निमित्त बनाया है। 🔸उन यज्ञों में भी श्रीकृष्ण कहते हैं कि जपयज्ञ सर्वोपरि है। अग्नि में जौ, तिल होमना अच्छा है परंतु इससे भी श्रेष्ठ है गुरुमंत्र लेकर माला पर जप करना। उसको भगवान श्रीकृष्ण ने ‘जपयज्ञ’ कहा है। 🔸भगवन्नाम जप में योग्य-अयोग्य का खयाल भी नहीं किया जाता। भगवन्नाम सारी अयोग्यताओं को हरकर प्राणियों के चित्त में छिपी हुई योग्यता जगा देता है। इसलिए जपयज्ञ सर्वोपरि यज्ञ माना गया। भगवान कहते हैं: यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि…’सब प्रकार के यज्ञों में जपयज्ञ मैं हूँ।’  (गीता : १०.२५) 🔸यज्ञ करने में तो यजमान धूआँ सहे, विधि- विधान का पालन करे तब लाभ होता है। और उस समय तो अग्नि के सामने तपना पड़ता है, कालांतर में उसे सुख मिलता है लेकिन भगवन्नाम लेने से तो वर्तमान में ही सुख मिलता है और कालांतर में परमात्मा मिलता है। 🔹ध्यान की महिमा आज्ञाचक्र में ओंकार या गुरु का ध्यान करने से बुद्धि विकसित होती है और नाभि में ओंकार या गुरु का ध्यान करने से आरोग्य एवं रोग प्रतिकारक शक्ति विकसित होती है। 🔹सुख-शांति व बरकत के उपाय🔹 तुलसी को रोज जल चढायें तथा गाय के घी का दीपक जलायें। सुबह बिल्वपत्र पर सफेद चंदन का तिलक लगाकर संकल्प करके शिवलिंग पर अर्पित करें तथा ह्र्द्यपुर्वक प्रार्थना करें।

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