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खग्रास चंद्र ग्रहण 2026 और 12 राशियों पर इसका प्रभाव: विस्तृत उपाय और ज्योतिषीय महत्व

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खग्रास चंद्र ग्रहण 2026 और 12 राशियों पर इसका प्रभाव: विस्तृत उपाय और ज्योतिषीय महत्वप्रत्येक वर्ष होने वाले ग्रहणों का खगोलीय और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टियों से विशेष महत्व होता है। ये ब्रह्मांडीय घटनाएँ पृथ्वी पर जीवन और ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित करती हैं, और ज्योतिष के अनुसार, इनका मानवीय जीवन पर गहरा असर पड़ता है। 2026 में लगने वाला खग्रास चंद्र ग्रहण एक ऐसी ही महत्वपूर्ण घटना है, जो सभी 12 राशियों के जातकों के लिए कुछ विशेष संदेश और प्रभाव लेकर आएगा। यह लेख आपको खग्रास चंद्र ग्रहण 2026 की विस्तृत जानकारी, इसका ज्योतिषीय महत्व, सूतक काल के नियम और प्रत्येक राशि के लिए विशिष्ट उपायों के बारे में बताएगा। चंद्र ग्रहण क्या है? चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो तब होती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के ठीक बीच में आ जाती है, जिससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और वह कुछ समय के लिए अदृश्य या धुंधला दिखाई देता है। यह पूर्णिमा के दिन ही घटित होता है। चंद्र ग्रहण के प्रकार: पूर्ण चंद्र ग्रहण (खग्रास चंद्र ग्रहण): जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया के गहरे हिस्से (अम्ब्रा) में समा जाता है, तो इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं। इस दौरान चंद्रमा लाल या नारंगी रंग का दिखाई देता है, जिसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है।आंशिक चंद्र ग्रहण (खंडग्रास चंद्र ग्रहण): जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है।उपच्छाया चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया (पेनुम्ब्रा) से होकर गुजरता है। यह बहुत हल्का होता है और इसे नग्न आँखों से पहचानना मुश्किल होता है।ज्योतिष में, चंद्र ग्रहण को एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है क्योंकि चंद्रमा मन, भावनाओं, मातृत्व, जल और आंतरिक शांति का कारक ग्रह है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा पर राहु और केतु का प्रभाव पड़ने से इन क्षेत्रों में उथल-पुथल या बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह अवधि आत्मनिरीक्षण, आध्यात्मिक साधना और दान-पुण्य के लिए विशेष मानी जाती है। खग्रास चंद्र ग्रहण 2026: तिथि, समय और दृश्यता 2026 में एक महत्वपूर्ण खग्रास चंद्र ग्रहण 03 मार्च 2026, मंगलवार को पड़ेगा। यह ग्रहण ज्योतिषीय और खगोलीय दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। चंद्र ग्रहण 2026 की महत्वपूर्ण तिथियाँ और समय (भारतीय समयानुसार – IST): ग्रहण का प्रकार: खग्रास चंद्र ग्रहण (पूर्ण चंद्र ग्रहण)तिथि: 03 मार्च 2026, मंगलवार Tuesdayउपच्छाया ग्रहण प्रारम्भ: 03 मार्च 2026, दोपहर 12:41 बजेखंडग्रास ग्रहण प्रारम्भ: 03 मार्च 2026, दोपहर 02:03 बजेखग्रास ग्रहण प्रारम्भ: 03 मार्च 2026, दोपहर 03:14 बजेग्रहण का मध्य: 03 मार्च 2026, शाम 04:00 बजेखग्रास ग्रहण समाप्त: 03 मार्च 2026, शाम 04:47 बजेखंडग्रास ग्रहण समाप्त: 03 मार्च 2026, शाम 05:58 बजेउपच्छाया ग्रहण समाप्त: 03 मार्च 2026, शाम 07:20 बजेसूतक काल:चंद्र ग्रहण में सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लगता है। सूतक काल प्रारम्भ: 03 मार्च 2026, सुबह 05:03 बजेसूतक काल समाप्त: 03 मार्च 2026, शाम 05:58 बजे (खंडग्रास समाप्ति के साथ)दृश्यता:यह खग्रास चंद्र ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों, यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में, ग्रहण का आंशिक और पूर्ण चरण दोपहर में शुरू होगा, और जैसे-जैसे चंद्रमा उदय होगा, उसके बाद के चरण (विशेषकर आंशिक समाप्ति और उपच्छाया समाप्ति) शाम को दिखाई दे सकते हैं। इसकी दृश्यता भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में अधिक स्पष्ट हो सकती है, जहाँ चंद्रमा पहले उदय होगा। सूतक काल के नियम और महत्व: सूतक काल को ज्योतिष में एक अशुभ अवधि माना जाता है, जब ब्रह्मांडीय ऊर्जाएँ अस्थिर होती हैं। इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। • मंदिरों के कपाट बंद: सूतक काल शुरू होते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ वर्जित होता है।• भोजन और पेय पदार्थ: सूतक काल में भोजन पकाना और खाना वर्जित माना जाता है। पहले से बने भोजन में तुलसी के पत्ते या कुश डाल देने चाहिए ताकि वह दूषित न हो।• शुभ कार्य वर्जित: इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार आदि नहीं करना चाहिए।• गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और नुकीली वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से शिशु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्हें हनुमान चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।• वृद्ध, रोगी और बच्चे: वृद्ध, रोगी और बच्चों पर सूतक के नियम शिथिल होते हैं। वे आवश्यकतानुसार भोजन और दवाई ले सकते हैं।• मंत्र जाप और ध्यान: सूतक काल में और ग्रहण के दौरान मंत्रों का जाप करना, ध्यान करना और ईश्वर का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है। महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र, विष्णु सहस्रनाम या अपने इष्टदेव के मंत्र का जाप कर सकते हैं। ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें? क्या करें (Do’s): मंत्र जाप: ग्रहण काल में अपने इष्टदेव के मंत्रों का जाप करना, महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र या चंद्रमा के बीज मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः” का जाप करना अत्यंत शुभ होता है।ध्यान और साधना: इस अवधि को आध्यात्मिक साधना और ध्यान के लिए उत्तम माना जाता है।दान: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके गरीबों और जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, धन या अन्य वस्तुओं का दान करना चाहिए।स्नान: ग्रहण समाप्ति के बाद पवित्र नदियों में स्नान करना या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है।तुलसी और कुश: ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते या कुश डाल दें।पवित्र जल का छिड़काव: ग्रहण काल के बाद पूरे घर में गंगाजल या पवित्र जल का छिड़काव करें। क्या न करें (Don’t’s): भोजन और जल ग्रहण: ग्रहण काल में भोजन करने और जल पीने से बचें (बच्चों, वृद्धों और रोगियों को छोड़कर)।शयन: ग्रहण के दौरान सोना नहीं चाहिए।बाल काटना, नाखून काटना: इस दौरान ये कार्य नहीं करने चाहिए।शुभ कार्य: किसी भी नए कार्य की शुरुआत, विवाह या अन्य शुभ कार्य वर्जित हैं।यात्रा: अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखने से बचना चाहिए और घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। किसी भी नुकीली वस्तु का प्रयोग न करें। खग्रास चंद्र ग्रहण 2026

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