आज का पंचांग Aaj ka PANCHANG
आज का हिन्दू पंचांग Daily hindu panchang दिनांक -06 मई 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2082 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म मास – वैशाख पक्ष – शुक्ल तिथि – नवमी सुबह 08:38 तक तत्पश्चात् दशमी नक्षत्र – मघा दोपहर 03:52 तक तत्पश्चात् पूर्वाफाल्गुनी योग – ध्रुव रात्रि 12:30 मई 07 तक तत्पश्चात् व्याघात राहुकाल – दोपहर 03:53 से शाम 05:31 तक सूर्योदय – 06:03 सूर्यास्त – 07:09 दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:36 से प्रातः 05:20 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:10 से दोपहर 01:03 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:14 मई 07 से रात्रि 12:58 मई 07 तक विशेष – दशमी को कलंबी का शाक त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
आज का पंचांग Aaj ka panchang
आज का हिन्दू पंचांग hindu panchang दिनांक – 25 मार्च 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – चैत्र पक्ष – कृष्ण तिथि – एकादशी प्रातः 03:45 मार्च 26 तक तत्पश्चात् द्वादशी नक्षत्र – श्रवण प्रातः 03:49 मार्च 26 तक तत्पश्चात् घनिष्ठा योग – शिव दोपहर 02:53 तक तत्पश्चात् सिद्ध राहुकाल- दोपहर 03:49 से शाम 05:21 तक सूर्योदय – 06:39 सूर्यास्त – 06:53 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार) दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:05 से प्रातः 05:52 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार) अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:21 से दोपहर 01:10 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:22 मार्च 26 से रात्रि 01:09 मार्च 26 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार) व्रत पर्व विवरण – पापमोचनी एकादशी , 25 मार्च को चावल न खायें एवं व्रत उपवास 26 मार्च । विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) गृह के समीपस्थ वृक्ष ईशान में आँवला शुभदायक है । ईशान – पूर्व में कटहल एवं आम शुभदायक हैं । घरके पास काँटेवाले, दूधवाले तथा फलवाले वृक्ष स्त्री और सन्तान की हानि करनेवाले हैं । यदि इन्हें काटा न जा सके तो इनके पास शुभ वृक्ष लगा दें । काँटेवाले वृक्ष शत्रु से भय देनेवाले, दूधवाले वृक्ष धनका नाश करनेवाले और फलवाले वृक्ष सन्तानका नाश करनेवाले हैं । इनकी लकड़ी भी घरमें नहीं लगानी चाहिये | आसन्नाः कण्टकिनो रिपुभयदाः क्षीरिणोऽर्थनाशाय । फलिनः प्रजाक्षयकरा दारूण्यपि वर्जयेदेषाम् ॥(बृहत्संहिता ५३। ८६) बदरी कदली चैव दाडिमी बीजपूरिका। प्ररोहन्ति गृहे यत्र तद्गृहं न प्ररोहति ॥ (समरांगणसूत्रधार ३८ । १३१) ‘ बेर, केला, अनार तथा नींबू जिस घरमें उगते हैं, उस घर की वृद्धि नहीं होती । ‘ अश्वत्थं च कदम्बं च कदलीबीजपूरकम् । गृहे यस्य प्ररोहन्ति स गृही न प्ररोहति ॥ (बृहद्दैवज्ञ० ८७ ९) ‘पीपल, कदम्ब, केला, बीजू नींबू ये जिस घरमें होते हैं, उसमें रहनेवाले की वंशवृद्धि नहीं होती ।’ घर के भीतर लगायी हुई तुलसी मनुष्यों के लिये कल्याणकारिणी, धन-पुत्र प्रदान करनेवाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देनेवाली होती है । प्रातःकाल तुलसीका दर्शन करनेसे सुवर्ण दानका फल प्राप्त होता है ।(ब्रह्मवैवर्तपुराण, कृष्ण० १०३ । ६२-६३ ) Panchang, PANCHANG
आज का पंचांग daily panchang
8 March 2025, Saturday,by Divam astro world दिनांक – 8 मार्च 2025 दिन – शनिवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – नवमी सुबह 08:16 तक तत्पश्चात दशमी नक्षत्र – आर्द्रा रात्रि 11:28 तक तत्पश्चात पुनर्वसु योग- आयुष्मान् शाम 04:28 तक तत्पश्चात सौभाग्य राहु काल – सुबह 09:53 से सुबह 11:22 तक सूर्योदय – 06:58 सूर्यास्त – 06:42 दिशा शूल- पूर्व दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:18 से 06:06 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:27 से दोपहर 01:14 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 09 से रात्रि 01:14 मार्च 09 तक व्रत पर्व विवरण – विश्व महिला दिवस विशेष – दशमी को कलंबी शाक त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) सुपाच्य एवं बलवर्धक ज्वार आयुर्वेद के अनुसार ज्वार शीतल, रुक्ष, पचने में हलकी, किंचित् वीर्यवर्धक तथा मूत्रजनन है । यह रक्तविकार एवं प्रकुपित कफ-पित्त को दूर करने में सहायक है । यह दो प्रकार की होती है – सफेद व लाल । सफेद ज्वार स्वास्थ्य के लिए विशेष हितकर एवं बलप्रद है । यह बवासीर, घाव और अरुचि में गुणकारी है । (वसंत ऋतु -19 फरवरी से 19 अप्रैल) में कफ का प्रकोप होता है । अतः कफशमन हेतु होली के दिनों में ज्वार की धानी तथा भुने हुए चने खाने का रिवाज है । इस ऋतु में ज्वार का सेवन हितकारी है । ज्वार में विटामिन बी-१, बी-२, बी- ३, बी-५, बी-६, बी-७, बी-९, ‘ए’, ‘ई’ तथा फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नेशियम, लौह व जिंक आदि पोषक तत्त्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं । विभिन्न रोगों में लाभकारी (१) ज्वार कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक है । (२) इसमें रेशे की मात्रा अधिक है तथा इसका ग्लायसेमिक इंडेक्स (GI) कम है अर्थात् ज्वार रक्त शर्करा (blood sugar) को तेजी से व अधिक मात्रा में नहीं बढ़ाती । अतः यह मधुमेह (diabetes) में खूब लाभकारी है । मधुमेह में गेहूँ व चावल का सेवन बंद कर ज्वार की रोटी खाने से रक्त शर्करा आसानी से नियंत्रित रहती है । (३) ज्वार में कैंसर-विरोधी घटक पाये जाते हैं। अनुसंधानों के अनुसार गेहूँ और मक्के की तुलना में ज्वार का सेवन करनेवालों में कमी देखी गयी । (४) मोटापा एक गम्भीर समस्या है जो मधुमेह और हृदयरोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है । ज्वार में रेशे की अधिक मात्रा होने तथा यह शीघ्र तृप्तिदायक होने से मोटापे से रक्षा करती है । ज्वार के आटे की रोटी बनायी जाती है तथा ज्वार का दलिया, खिचड़ी व अन्य कई प्रकार के व्यंजन भी बनाये जाते हैं ।