पति- पत्नी में कलह का कारण बनते हैं जन्म कुंडली में स्थित यह ग्रह Pati-Patni me kalah ka karan bante hai janm kundali me sthit ye grah (Married life problems & solutions)
1March,2025 by Divam astro world जन्म कुंडली में वैवाहिक जीवन संबंधी शुभ अशुभ योग आजकल प्रत्येक परिवार चाहे वह संयुक्त हो अथवा एकल, गृह कलह से ग्रस्त दिखाई देता है। गृह क्लेश के फैले विषाक्त वातावरण से परिवार का मुखिया, परिवार का प्रत्येक सदस्य तनावग्रस्त जीवन व्ययतीत करता है। गृह कलह का यह वातावरण परिवार के सदस्यों में रक्तचाप, हृदय रोग, उन्माद, मधुमेह जैसी बीमारियों को जन्म देता है, वहीं पति-पत्नी मे तलाक, परिवार में बिखराव जमीन जायदाद तथा व्यवसाय के बंटवारे और लड़ाई झगड़ों का मुख्य कारण बनता है। गृह कलह मुख्य रूप से पति-पत्नी पिता-पुत्र, भाई-भाई, सास-बहू ननद-भाभी, देवरानी-जेठानी के मध्य होती देखी गई है। यहां ज्योतिषीय दृष्टि से गृह कलह के कारणों एवं उनके निवारण का विश्लेषण प्रस्तुत हैं।दाम्पत्य जीवन में गृह कलहपति-पत्नी की कामना होती है कि उनके दाम्पत्य जीवन में किसी प्रकार की कड़वाहट पैदा न हो तथा जीवन में सदैव सुख की बयार बहती रहे। लेकिन अधिकतर परिवारों में पति-पत्नी के मध्य लड़ाई-झगड़े, संबंध विच्छेद, तलाक आदि होते देखे गए हैं। इसके लिए ज्योतिषीय दृष्टि से देखें कि कई बार न चाहते हुए भी घर में कलह का वातावरण पैदा हो जाता है। ऐसा अशुभ एवं पापी ग्रहों के प्रभाव के कारण भी होता हैं। यदि समय से पहले उनका निदान कर लिया जाए तो कलह की संभावनाएं कम हो जाती है। जन्मकुंडली में सप्तम भाव, सप्तमेश, सप्तम भाव में स्थित ग्रह सप्तम भाव पर दृष्टि डालने वाले ग्रह तथा सप्तन भाव के कारक ग्रह से व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन के बारे में विचार किया जाता है। यदि जातक का सप्तम भाव निर्बल हो, सप्तम भाव पर पापी ग्रह शनि, मंगल, सूर्य या राहु-केतु का प्रभाव हो, गुरु और शुक्र अस्त हों अथवा पायांत हो तो दाम्पत्य सुख में बाधा आती है। शनि का प्रभाव सप्तम भाव पर होने पर दाम्पत्य जीवन शुष्क और नीरस होता है। विवाह के पश्चात जीवन साधी के प्रति उत्साह और उमग की भावना क्षीण होने लगती है। परस्पर आकर्षण में कमी आ जाती है। पति पत्नी साथ रहते हुए भी पृथक रहने के समान जीवन व्यतीत करते हैं। पति-पत्नी आपस में चिडचिडापन, स्वभाव में कड़ाहट, व्यवहार में रुखा मन आ जाता है जिसके फलस्वरुप पति पत्नी में छोटी-छोटी बातों पर विवाद पैदा हो जाते हैं। झगड़े होने से परिवार के वातावरण में कलह के बादल छा जाते हैं। मंगल : मंगल पापी और उग्र ग्रह माना जाता है। जातक की कुंडली में मंगल जन्म लग्न से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होने पर जातक मंगली माना जाता है। मंगल जातक के स्वभाव में अधिक उग्रता और क्रोध पैदा करता है। यदि लग्न अथवा सप्तम भाव पर मंगल स्थित हो या सप्तम भाव पर मंगल का प्रभाव हो तथा किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो जातक क्रोधी, स्वाभिमानी एव अहंकारी होता है स्वभाव में उग्रता हटीलापन होने से परिवार में उठने, वाली छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्न के मध्य विवाद या झगडे उत्पन्न हो जाते हैं जो अंत में गृह कलह पैदा करते हैं। सूर्य जन्मकुंडली में सूर्य का प्रथम एव सप्तम भावों पर प्रभाव होने पर और निर्बल व नीच राशि के सूर्य के सप्तम भाव में होने पर जातक अहंकारी स्वाभिमानी एवं अडियल स्वभाव का होता है। जीवनसाथी से स्वाभिमान का टकराव होता है, जिससे विवाद की स्थिति बनती है। राहु लग्न एवं सप्तम भाव में राहू के दुष्प्रभाव के कारण दाम्पत्य जीवन में विषम परिस्थितियों का सामना करना पडता है। अन्य परिवार के सदस्यों के दखल के कारण पति-पत्नी के मध्य विवाद, लड़ाई-झगड़े खड़े होते हैं जिससे उनके दाम्पत्य जीवन में सुख की कमी आती है पति-पत्नी एक दूसरे को कोसते रहते हैं एक-दूसरे की निंदा तथा आलोचना करते रहते हैं राहु के इस दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पति-पत्नी को आपस में आलोचना करने के स्थान पर एक-दूसरे की प्रशंसा करनी चाहिए। गृह कलह को समाप्त करने के ज्योतिषीय उपाय जैसा पूर्व में बताया गया है, गृह कलह के पीछे जातक की कुंडली में स्थित क्रूर और पापी ग्रह शनि, मंगल, सूर्य तथा राहु की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है परिवार के मुखिया या पीडित व्यक्ति को गृह कलह के दौरान चल रही क्रूर व पापी ग्रहों की महादशा अंतर्दशा के अनुसार निम्न ज्योतिषीय उपाय करने चाहिए। गृह कलह का कारक शनि होने परभगवान शिव के मंदिर में या घर पर प्राण प्रतिष्ठित पारद शिवलिंग पर नित्य गाय के कच्चे दूध मिश्रित जल से ॐ नमः शिवाय मंत्र से अभिषेक करें साथ ही रुद्राक्ष माला से महामृत्युजय मंत्र का एक माला जप करें गृह कलह से पीडित व्यक्ति को काले घोड़े की नाल से निर्मित छल्ला | शुक्ल पक्ष के शनिवार को मध्यमा मे धारण करना चाहिए। प्रत्येक शनिवार को पीपल वृक्ष के नीचे सूर्योदय से पूर्व तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। शुद्ध जल, दूध और पुष्प वृक्ष को अर्पित कर तिल का प्रसाद चढ़ाएं। वहीं बैठकर निम्न शनि मंत्र का 21 बार उच्चारण करें। ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” शुक्ल पक्ष के शनिवार को हनुमान मंदिर में हनुमान के चरणों में लाल सिदूर मिश्रित अक्षत अर्पित करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण 21 बार करें ॐ श्री रामदूताय नमः”साथ ही हनुमान जी से परिवार में गृह कलह समाप्त करने की प्रार्थना करे तथा हनुमान जी के चरणों का सिदूर लेकर अपने माथे पर लगाए ऐसा कम से कम 7 शनिवार करें। गृह कलह का कारण मंगल ग्रह होने पर शुक्ल पक्ष के मंगलवार को स्नान कर हनुमान मंदिर जाएं तथा 100 ग्राम चमेली का तेल और 125 ग्राम सिंदूर हनुमान विग्रह पर चढाए। साथ ही गुड और चने चढाएं पूजा अर्चना कर वही बैठकर बजरंग बाण का पाठ करे तथा हनुमान जी से गृह कलह समाप्त हो इसके लिए प्रार्थना करे यह क्रम कम से कम 7 मंगलवार दोहराएं। लाल वस्त्र में 2 मुट्ठी मसूर की दाल बांधकर मंगलवार को भिखारी को दान करें। बंदरों को प्रत्येक मंगलवार चने, केले खिलाए। अपनी जन्म कुंडली के भाग्य स्थान को करें जागृत! गृह कलह का कारण सूर्य ग्रह होने पर गृह कलह पीडित व्यक्ति को या गृहस्वामी को सूर्योदय से पूर्व स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान सूर्य को तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें