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आज का पंचांग Panchang today

4 March,2025, Tuesday by Divam astro world दिनांक – 4 मार्च 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – पञ्चमी  दोपहर 3:16 तक तत्पश्चात षष्ठी नक्षत्र – भरणी रात्रि 02:37 मार्च 05 तक तत्पश्चात कृत्तिका योग- इंद्र रात्रि 02:07 मार्च 05 तक तत्पश्चात वैधृति राहु काल – दोपहर 03:48 से शाम 05:16 तक सूर्योदय – 07:02 सूर्यास्त – 06:40 दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:21 से 06:10 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:28 से दोपहर 01:15 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:27  मार्च 05 से रात्रि 01:15 मार्च 05 तक व्रत पर्व विवरण – स्कन्द षष्ठी, सर्वार्थसिद्धि योग (रात्रि 02:37 मार्च 05 से प्रातः 06:58 मार्च 05 तक) विशेष – पञ्चमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) देशी गोघृत सेवन के लाभ : (१) हृदय स्वस्थ व बलवान होता है। रक्तदाब नियंत्रित रहता है । हृदय की रक्तवाहिनियों की धमनी प्रतिचय (atherosclerosis) से रक्षा करता है। अतः हृदयरोग से रक्षा हेतु तथा हृदय रोगियों के लिए यह घी अत्यंत लाभदायी है । (२) इससे ओज की वृद्धि व दीर्घायुष्य की प्राप्ति होती है। (३) मस्तिष्क की कोशिकाएँ (neurons) पुष्ट हो जाती हैं, जिससे बुद्धि व इन्द्रियों की कार्यक्षमता विकसित होती है। बुद्धि, धारणाशक्ति एवं स्मृति की वृद्धि होती है। (४) मन का सत्व गुण विकसित होकर चिंता, तनाव, चिड़चिड़ापन, क्रोध आदि दूर होने में मदद मिलती है । मन की एकाग्रता बढ़ती है । साधना में उन्नति होती है । (५) नेत्रज्योति बढ़ती है । चश्मा, मोतियाबिंद (cataract), काँचबिंदु (glaucoma) व आँखों की अन्य समस्याओं से रक्षा होती है । (६) हड्डियाँ व स्नायु सशक्त होते हैं। संधिस्थान (joints) लचीले व मजबूत बनते हैं । (७) कैंसर से लड़ने व उसकी रोकथाम की आश्चर्यजनक क्षमता प्राप्त होती है । (८) रोगप्रतिरोधक शक्ति (immunity power) बढ़कर घातक विषाणुजन्य संक्रमणों (viral infections) से प्रतिकार करने की शक्ति मिलती है । (९) जठराग्नि तीव्र व पाचन-संस्थान सशक्त होता है। मोटापा नहीं आता, वजन नियंत्रित रहता है । वीर्य पुष्ट होता है। यौवन दीर्घकाल तक बना रहता है । (१०) चेहरे की सौम्यता, तेज एवं सुंदरता बढ़ती है। स्वर उत्तम होता है एवं रंग निखरता है। बाल घने, मुलायम व लम्बे होते हैं । (११) गर्भवती माँ द्वारा सेवन करने पर गर्भस्थ शिशु बलवान, पुष्ट और बुद्धिमान बनता है ।

आज का पंचांग Aaj ka Panchang

3 March,2025 Monday,by Divam astro world दिनांक – 3 मार्च 2025 दिन – सोमवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – चतुर्थी शाम 6:02 तक तत्पश्चात पंचमी नक्षत्र – अश्विनी प्रातः 4:29 मार्च 04 तक तत्पश्चात भरणी योग- शुक्ल सुबह 8:57 तक तत्पश्चात ब्रह्म राहु काल – सुबह 08:28 से सुबह 09:56 तक सूर्योदय – 07:03 सूर्यास्त – 06:39 दिशा शूल – पूर्व दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:21 से प्रातः 06:10 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:28 से दोपहर 01:15 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:27  मार्च 04 से रात्रि 01:16 मार्च 04 तक व्रत पर्व विवरण – विनायक चतुर्थी विशेष – चतुर्थी को मुली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) शारीरिक-मानसिक आरोग्य हेतु संजीवनी बूटी : पैदल भ्रमण कैसा भ्रमण है लाभदायी ? पैदल भ्रमण करते समय शरीर सीधा व वस्त्र कम रहें । दोनों हाथ हिलाते हुए और नाक से गहरे गहरे श्वास लेते हुए भ्रमण करना चाहिए । गहरे श्वास लेने से प्राणायाम का भी लाभ मिलता है ।शारीरिक के साथ यह मानसिक स्वास्थ्य में भी लाभदायी है । इससे काम, क्रोध, ईर्ष्या आदि मनोदोषों का शमन होता है । एकाग्रता विकसित होती है ।ओस की बूँदों से युक्त हरी घास पर टहलना अधिक हितकारी हैं । यह नेत्रों के लिए विशेष लाभकारी है । वर्षा के दिनों में भीगी घास पर टहल सकते हैं ।भ्रमण सामान्यरूप से शारिरिक क्षमता के अनुसार मध्यम गति से ही करें । सुश्रुत संहिता (चिकित्सा स्थान : २४.८०) में आता है : यत्तु चङ्क्रमणं नातिदेहपीडाकरं भवेत् । तदायुर्बलमेधाग्निप्रदमिन्द्रियबोधनम् ॥’जो भ्रमण शरीर को अत्यधिक कष्ट नहीं देता वह आयु, बल एवं मेधा प्रदान करनेवाला होता है, जठराग्नि को बढ़ाता है और इन्द्रियों की शक्ति को जागृत करता है ।’ भ्रमण है अनेक रोगों में लाभकारी स्नायु दौर्बल्य, मानसिक रोग, अनिद्रा, स्वप्नदोष, सर्दी, खाँसी, सिरदर्द, कब्ज, दुबलापन और कमजोरी आदि में टहलना रामबाण औषधि है । भ्रमण से मोटापा कम होता है, भूख खुलकर लगती है, पुराने कब्ज व अपच में यह उत्तम औषधि भ्रमण सामान्यरूप से अपनी शारीरिक क्षमता का काम करता है। यह युवकों में काम-वासना को नियंत्रित करता है ।आधुनिक अनुसंधानों के परिणाम आधुनिक अनुसंधानों में पाया गया है कि पैदल चलने से संधिवात (arthritis) संबंधी दर्द कम हो जाता है । हर हफ्ते ५-६ मील (८-१० कि.मी.) तक पैदल चलने से संधिवात की बीमारी होने से भी बचा जा सकता है । जैसे-जैसे पैदल चलना बढ़ता जाता है । डॉ. जे. बी. स्कॉट ने लिखा है ‘मध्यम वैसे-वैसे कोरोनरी हृदयरोगों (हृदय की गति से भ्रमण करना अधिकांश व्यक्तियों के लिए रक्तवाहिनियों में अवरोध) के होने का जोखिम कम होता जाता है । आम जनता में कोरोनरी हृदयरोगों की रोकथाम के लिए भ्रमण को एक आदर्श व्यायाम के रूप में बढ़ावा देना चाहिए । पैदल चलने से व्यक्ति की रचनात्मकता में औसतन ६० प्रतिशत तक की वृद्धि होती है ।भ्रमण उच्च रक्तचाप (hypertension) व टाइप-2 डायबिटीज होने के जोखिम को कम करता है । ध्यान रखें , घास न हो तो नंगे पैर भ्रमण न करें । नंगे पैर भ्रमण रोगकारक, नेत्रज्योति व आयु नाशक है । भ्रमण प्रदूषणरहित स्थान पर करें । यदि यह सुविधा न हो सके तो अपने घर की छत के ऊपर गमलों में तुलसी, मोगरा, गुलाब आदि लगाकर सुबह- शाम उनके आसपास पैदल चल सकते हैं ।

Panchang Today आज का पंचांग

2 March,2025 by Divam Astro World दिनांक :-02मार्च:-2025 वार :-रविवार तिथी :-03तृतिया:-21:02 पक्ष:-शुक्लपक्ष माह:-फाल्गुन नक्षत्र:-उतराभाद्रपद:-08:59/रेवती:-30:39 योग:-शुभ:-12:38 करण:-तैतिल:-10:35 चन्द्रमा:-मीन 30:39/मेष सुर्योदय:-06:52 सुर्यास्त:-18:22 दिशा शुल…..पश्चिम निवारण उपाय:-जौं का सेवन ऋतु :- बसंत ऋतु गुलीक काल:-15:34से 17:02‌ राहू काल:-17:02से18:29 अभीजित….12:16से13:03 विक्रम सम्वंत ………2081 शक सम्वंत …………1946 युगाब्द ………………5126 सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त चोघङिया दिन चंचल:-08:16से09:44तक लाभ:-09:44से11:12तक अमृत:-11:12से12:39तक शुभ:-14:07से15:34तक चोघङिया रात शुभ:-18:29से20:02तक अमृत:-20:02से21:34तक चंचल:-21:34से23:06तक लाभ :-02:11से03:43तक शुभ :-05:16से06:48तक विशेष योग , पंचक समाप्त 30:29, राजयोग सूर्योदय से 08:59, रवियोग 08:59 से 30:39, रमजान प्रारंभ (मुस्लिम) वैधृति महापात 12:45 से 16:18, मेला खाटु श्यामजी प्रारंभ (10दिन सीकर राज.), मधुक तृतिया, पं लेखराम वीर जयंती

आज का पंचांग Panchang

1/3/2025 panchang दिनांक:-01मार्च:-2025 वार:-शनिवार तिथि :-02द्बितिया:-24:09 पक्ष:-शुक्लपक्ष माह:-फाल्गुन नक्षत्र:-पूर्वाभाद्रपद:-11:22 योग:-साध्य:-16:24 करण:-बालव:-13:43 चन्द्रमा:-मीन सुर्योदय:-06:53 सुर्यास्त:-18:22 दिशा शुल…..पूर्व निवारण उपाय:-उङद का सेवन ऋतु :-बंसत ऋतु गुलिक काल:-06:50से 08:17 राहू काल:-09:45से11:12 अभीजित….12:16से13:03 विक्रम सम्वंत ………2081 शक सम्वंत …………1946 युगाब्द ………………5126 सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त चोघङिया दिन शुभ:-08:17से09:45तक चंचल:-12:39से14:07तक लाभ:-14:07से15:34तक अमृत:-15:34से17:02तक चोघङिया रात लाभ:-18:29से20:01तक शुभ:-21:34से23:06तक अमृत:-23:06से00:39तक चंचल:-00:39से02:11तक लाभ:-05:16से06:49तक सप्ताह में एक बार नमक के पानी से स्नान करे।

आज का पंचांग Panchang

दिनांक – 28 फरवरी 2025 दिन – शुक्रवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – अमावस्या प्रातः 06:14 तक तत्पश्चात प्रतिपदा रात्रि 03:16 मार्च 01 तक, तत्पश्चात द्वितीया नक्षत्र – शतभिषा दोपहर 01:40 तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद योग – सिद्ध रात्रि 08:08 तक, तत्पश्चात साध्य राहु काल – सुबह 11:25 से दोपहर 12:52 तक सूर्योदय – 07:06 सूर्यास्त – 06:38 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:23 से 06:13 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:29 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:27 मार्च 01 से रात्रि 01:17 मार्च 01 तक व्रत पर्व विवरण – राष्ट्रीय विज्ञान दिवस विशेष – प्रतिपदा को कुष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

आज का पंचांग Panchang

दिनांक :-27फरवरी-2025 वार:-गुरुवार तिथी :-14चतुर्दशी:-08:55/30अमावस्या:-30:14 पक्ष :-कृष्णपक्ष माह:-फाल्गुनमास नक्षत्र :-धनिष्ठा:-15:43 योग:-शिव:-23:40 करण:-शकु:-08:55 चन्द्रमा:-कुम्भ सुर्योदय:-06:55 सुर्यास्त:-18:21 दिशा शुल…..दक्षिण निवारण उपाय:-दही का सेवन ऋतु :- शिशिर बसंत ऋतु गुलीक काल:-09:46से11:13 राहू काल:-14:07से15:34 अभीजित….12:17से13:03 विक्रम सम्वंत ………2081 शक सम्वंत …………1946 युगाब्द ………………5126 सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त चोघङिया दिन शुभ:-06:51से08:19तक चंचल:-11:13से12:40तक लाभ:-12:40से14:07तक अमृत:-14:07से15:34तक शुभ:-17:01से18:28तक चोघङिया रात अमृत:-18:28से20:01तक चंचल:-20:01से21:34तक लाभ:-00:39से02:12तक शुभ:-03:45से05:18तक अमृत:-05:18से06:51तक आज के विशेष योग वर्ष का 326वा दिन, देव पितृ अमावस्या, द्बापर युगादि, पंचक, शनि अस्त, बुध मीन में, अन्वाधान, माघी मासम् (द.भा.), मुनि वासुदेव पुज्यनाथ जयंती (जैन), शिवखप्पर पूजा पितृ दोष से मुक्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, ब्राह्मणों को भोजन, दान-पुण्य, और गीता का पाठ करे।

आज का पंचांग

दिनांक:-26फरवरी:-2025 वार:-बुधवार तिथी :-13त्रयोदशी:-11:08 पक्ष:-कृष्णपक्ष माह:-फाल्गुन नक्षत्र:-श्रवण:-17:23 योग:-परिध:-26:57 करण:-वणिज:-11:08 चन्द्रमा:-मकर 28:36/कुम्भ सुर्योदय:-06:56 सुर्यास्त:-18:20 दिशा शुल….. उत्तर निवारण उपाय:-तिल का सेवन ऋतु :-शिशिर बसंत ऋतु गुलीक काल:-11:13से 12:40 राहू काल:-12:40से14:07 अभीजित…. नहीं है विक्रम सम्वंत ………2081 शक सम्वंत …………1946 युगाब्द ………………5126 सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त चोघङिया दिन लाभ:-06:52से08:19तक अमृत:-08:19से09:46तक शुभ:-11:13से12:40तक चंचल:-15:34से 17:01तक लाभ:-17:01से 18:28तक चोघङिया रात शुभ:-20:01से21:34तक अमृत :-21:34से23:07तक चंचल :-23:07से00:39तक लाभ :-03:45से05:18तक महाशिवरात्रि के दिन रामायण का पाठ करें।

आज का दैनिक पंचांग

दिनांक – 25 फरवरी 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – द्वादशी दोपहर 12:47 तक तत्पश्चात त्रयोदशी नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा शाम 06:31 तक तत्पश्चात श्रवण योग – व्यतीपात सुबह 08:15 तक, तत्पश्चात वरीयान प्रातः 05:51 फरवरी 26 तक तत्पश्चात परिघ राहु काल – दोपहर 03:47 से शाम 05:14 तक सूर्योदय – 07:08 सूर्यास्त – 06:37 दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:25 से 06:15 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 26 से रात्रि 01:17 फरवरी 26 तक व्रत पर्व विवरण – प्रदोष व्रत, त्रिपुष्कर योग (प्रातः 07:05 से दोपहर 12:47 तक) विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोइ) व त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) वसंत ऋतु में क्या न करें ? 1] खट्टे, मधुर, खारे, स्निग्ध (घी – तेल से बने), देर से पचनेवाले व शीतल पदार्थो का सेवन हितकर नहीं है, अत: इनका सेवन अधिक न करें । (अष्टांगह्रदय, चरक संहिता ) 2] नया गेहूँ व चावल, खट्टे फल, आलू, उड़द की दाल, कमल – ककड़ी, अरवी, पनीर, पिस्ता, काजू, शरीफा, नारंगी, दही, गन्ना, नया गुड़, भैस का दूध, सिंघाड़े, कटहल आदि का सेवन अहितकर है । 3] दिन में सोना, ओस में सोना, रात्रि–जागरण, परिश्रम न करना हानिकारक है । अति परिश्रम या अति व्यायाम भी न करें । 4] आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स व फ्रिज के ठंडे पानी का सेवन न करें । 5] एक साथ लम्बे समय तक बैठे या सोयें नहीं तथा अधिक देर तक व ठंडे पानी से स्नान न करें । प्रदोष व्रत – 25 फरवरी 2025 सूतजी कहते हैं – त्रयोदशी तिथि में सायंकाल प्रदोष कहा गया है । प्रदोषके समय महादेवजी कैलासपर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं । अतः धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की इच्छा रखनेवाले पुरुषों को प्रदोष में नियम पूर्वक भगवान् शिव की पूजा, होम, कथा और गुणगान करने चाहिये । दरिद्रता के तिमिर से अन्धे और भवसागर में डूबे हुए संसार भय से भीरु मनुष्यों के लिये यह प्रदोषव्रत पार लगानेवाली नौका है । भगवान् शिव की पूजा करने से मनुष्य दरिद्रता, मुर्त्यु-दुःख और पर्वत के समान भारी ऋण-भार को शीघ्र ही दूर कर के सम्पत्तियों से पूजित होता है।

एकादशी व्रत में क्या करे, क्या ना करे?

दिनांक – 24 फरवरी 2025 दिन – सोमवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – एकादशी दोपहर 01:44 तक तत्पश्चात द्वादशी नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा शाम 06:59 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा योग – सिद्धि सुबह 10:05 तक, तत्पश्चात व्यतीपात राहु काल – सुबह 08:32 से सुबह 09:59 तक सूर्योदय – 07:09 सूर्यास्त – 06:36 दिशा शूल – पूर्व दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:26 से 06:16 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 25 से रात्रि 01:17 फरवरी 25 तक व्रत पर्व विवरण – विजया एकादशी, व्यतीपात योग (प्रातः 10:06 से प्रातः 8:15 फरवरी 25 तक) विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) व द्वादशी को पूतिका (पोइ) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) विजया एकादशी – 24 फरवरी 25 एकादशी में क्या करें, क्या न करें ? 1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें । 2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें । हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।**राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।**सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।**एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l 3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए । 4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें । 5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है । 6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें । 7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए । 8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए । 9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए । 10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है । 11. इस दिन बाल नहीं कटायें । 12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें । 13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) । 14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।

रविवार विशेष पंचांग

दिनांक – 23 फरवरी 2025 दिन – रविवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – दशमी दोपहर 01:55 तक तत्पश्चात एकादशी नक्षत्र – मूल शाम 06:43 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा योग – वज्र सुबह 11:19 तक, तत्पश्चात सिद्धि राहु काल – शाम 05:13 से शाम 06:40 तक सूर्योदय – 07:09 सूर्यास्त – 06:36 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:27 से 06:16 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 24 से रात्रि 01:18 फरवरी 24 तक व्रत पर्व विवरण – महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 07:06 से शाम 6:43 तक) विशेष – दशमी कलंबी शाक त्याज्य है व एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) स्नान कैसे करना चाहिये ?? जहाँ से प्रवाह आता हो वहाँ पहले सिर की डुबकी मारें । घर में भी स्नान करे तो पहले जल सिर पर डालें…. पैरों पर पहले नहीं डालना चाहिए । शीतल जल सिर को लगने से सिर की गर्मी पैरों के तरफ जाती है । और जहाँ जलाशय है, स्थिर जल है वहाँ सूर्य पूर्वमुखी होकर स्नान करें । घर में स्नान करें तो उस बाल्टी के पानी में जौ और तिल अथवा थोड़ा गोमूत्र अथवा तीर्थोद्क पहले (गंगाजल आदि) डाल कर फिर बाल्टी भरें तो घर में भी तीर्थ स्नान माना जायेगा । रविवार विशेष रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90) रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75) रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है । रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए । स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं । रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है । रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।

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