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आज का पंचांग Aaj ka panchang

आज का हिन्दू पंचांग Aaj ka hindu panchang दिनांक – 13 मार्च 2025 दिन – गुरुवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – चतुर्दशी सुबह 10:35 तक तत्पश्चात पूर्णिमा नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी प्रातः 06:19 मार्च 14 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी योग- धृति दोपहर 01:03 तक तत्पश्चात शूल राहुकाल- दोपहर 02:19 से दोपहर 03:49 तक सूर्योदय – 06:54 सूर्यास्त – 06:44 दिशा शूल – दक्षिण दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:14 से प्रातः 06:02 तक, अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:25 से दोपहर 01:13 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:25  मार्च 14 से रात्रि 01:13 मार्च 14 तक व्रत पर्व विवरण – होलिका दहन, हुताशनी पूर्णिमा, अट्टूकल पोंगल विशेष –  चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल खाना व लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) होलाष्टक होलाष्टक फाल्गुन मास के अष्टमी से शुरू होता है पूनम दिन होलिका दहन के साथ समाप्त होती है । होलाष्टक से ले कर पूनम तक हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए कई यातनाएं दिया था । आठवां दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली थी । होलिका को यह वरदान था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी, ऐसे में होलिका भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई । लेकिन भगवान विष्णु के आशीर्वाद से प्रह्लाद को अग्नि जला नहीं सकी, बल्कि होलिका इस अग्नि में जलकर भस्म हुई । यह सारी घटना उन्हीं आठ दिनों में हुई थी । जिन्हें होलाष्टक के नाम से जाना जाता है । इस आठ दिनों की अवधि को अशुभ माना जाता है । इस अवधि में किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है । होलाष्टक में वर्जित कार्य : 1. विवाह करना ।2. वाहन खरीदना ।3. घर खरीदना ।4. भूमि पूजन ।5. गृहप्रवेश ।6. 16 संस्कार ।7. यज्ञ, हवन या होम ।8. नया व्यापार शुरु करना ।9. नए वस्त्र या कोई वस्तु खरीदना ।10. यात्रा करना । होलाष्टक के वक्त लोगों को सदाचार और संयम का पालन करना चाहिए । इसके अलावा इन दिनों में भगवान को याद करके मंत्र जप, साधना और आध्यात्मिक कार्य करना चाहिए । इस समय के अवधि साधना और सिद्धि के लिए काफी अनुकूल माना गया है ।

आज का पंचांग Panchang

दिनांक – 12 मार्च 2025 दिन – बुधवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – त्रयोदशी सुबह 09:11 तक तत्पश्चात चतुर्दशी नक्षत्र – मघा प्रातः 4:05 मार्च 13 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी योग – सुकर्मा दोपहर 01:00 तक, तत्पश्चात धृति राहुकाल- दोपहर 12:49 से दोपहर 02:19 तक सूर्योदय – 06:54 सूर्यास्त – 06:43 दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:15 से प्रातः 06:03 तक, अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:25 मार्च 13 से रात्रि 01:13 मार्च 13 तक विशेष – चतुर्दशी के दिन स्त्री – सहवास तथा तिल का तेल लगाना व खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj ka panchang,Hindu panchang,hindu CELENDER,dainik PANCHANG,

आज का पंचांग Panchang

दिनांक – 11 मार्च 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – द्वादशी सुबह 08:13 तक तत्पश्चात त्रयोदशी नक्षत्र – अश्लेशा रात्रि 02:15 मार्च 12 तक, तत्पश्चात मघा योग – अतिगण्ड दोपहर 01:18 तत्पश्चात सुकर्मा राहुकाल- दोपहर 03:48 से शाम 05:18 तक सूर्योदय – 06:56 सूर्यास्त – 06:42 दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:16 से प्रातः 06:04 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:26 से दोपहर 01:14 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:25 मार्च 12 से रात्रि 01:13 मार्च 12 तक व्रत पर्व विवरण – प्रदोष व्रत विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) प्रदोष व्रत सूतजी कहते हैं – त्रयोदशी तिथि में सायंकाल प्रदोष कहा गया है । धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की इच्छा रखनेवाले पुरुषों को प्रदोष में नियम पूर्वक भगवान् शिव की पूजा, होम, कथा और गुणगान करने चाहिये । दरिद्रता के तिमिर से अन्धे और भवसागर में डूबे हुए संसार भय से भीरु मनुष्यों के लिये यह प्रदोषव्रत पार लगानेवाली नौका है । भगवान् शिव की पूजा करने से मनुष्य दरिद्रता, मुर्त्यु-दुःख और पर्वत के समान भारी ऋण-भार को शीघ्र ही दूर कर के सम्पत्तियों से पूजित होता है।(स्कन्द पुराण : ब्रम्होत्तर खंड) कर्ज-निवारण व धन-वृद्धि हेतु रखें इन बातों का विशेष ध्यान झाडू को कभी पैर न लगायें । भोजन बनाने के बाद तवा, कढ़ाई या अन्य बर्तन चूल्हे से उतारकर नीचे रखें । घर के दरवाजे को कभी भी पैर से ठोकर मार के न खोलें । देहली (दहलीज) पर बैठकर कभी भोजन न करें  । सुबह शाम की पहली रोटी गाय के लिए बनायें व समय-अनुकूलता अनुसार खिला दें । घर के बड़ों को प्रणाम करें । उनके आशीर्वाद से घर में बरकत आती है । रसोईघर में जूठे बर्तन कभी भी नहीं रखें तथा रात्रि में जूठे बर्तन साफ करके ही रखें । घर में गलत जगह शौचालय बन गया हो तो शौचालय में नमक रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव दूर होता है । नमक को शौचालय के अलावा कहीं भी खुला न रखें । इससे धन-नाश होता है । घर की नकारात्मक ऊर्जा (negative energy) दूर करने के लिए हफ्ते में एक बार नमक मिले पानी से पोंछा लगायें । घर में जितनी भी घड़ियाँ हों उन्हें चालू रखें, बंद होने पर तुरंत ठीक करायें, धनागम अच्छा होगा । घर की छत पर टूटी कुर्सियाँ, बंद घड़ियाँ, गत्ते के खाली डिब्बे, बोतलें, मूर्तियाँ या कबाड़ नहीं रखना चाहिए । घर में जाला या काई न लगने दें । घर की दीवारों व फर्श पर पेंसिल, चाक आदि के निशान होने से कर्ज चढ़ता है । निशान हों तो मिटा दें । बाधाओं से सुरक्षा हेतु हल्दी व चावल पीसकर उसके घोल से या केवल हल्दी से घर के प्रवेश द्वार पर ॐ  बना दें । प्रतिदिन प्रातः सूर्योदय के पूर्व उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें । असत्य वचन न बोलें । पूजाघर में दीपक व गौ-चंदन धूपबत्ती जलायें । हो सके तो ताजे पुष्प चढ़ायें और तुलसी या रुद्राक्ष की माला से अपने गुरुमंत्र का कम से कम १००० बार (१० माला) जप करें । जिन्होंने मंत्रदीक्षा नहीं ली हो वे जो भी भगवन्नाम प्रिय लगता हो उसका जप करें । प्रदोष, ॠण मुक्ति के उपाय, आज का हिंदू पंचांग, दरिद्रता दूर करने के उपाय, आज का पंचांग, प्रदोष व्रत, धनलाभ के उपाय, २०२५ वर्ष रशिफल

आज का पंचांग Daily panchang

10 March 2025, Monday,by Divam astro world दिनांक – 10 मार्च 2025 दिन – सोमवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – एकादशी प्रातः 07:44 तक तत्पश्चात द्वादशी नक्षत्र – पुष्य रात्रि 12:51 मार्च 11 तक, तत्पश्चात अश्लेशा योग- शोभन दोपहर 01:57 तक तत्पश्चात अतिगण्ड राहु काल – सुबह 08:22 से सुबह 09:52 तक सूर्योदय – 06:56 सूर्यास्त – 06:42 दिशा शूल – पूर्व दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:16 से प्रातः 06:05 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:26 से दोपहर 01:14 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:25 मार्च 11 से रात्रि 01:14 मार्च 11 तक व्रत पर्व विवरण – आमलकी एकादशी, नरसिंह द्वादशी, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:53 से रात्रि 12:51 मार्च 11 तक) विशेष – द्वादशी को पुतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) एकादशी में क्या करें, क्या न करें ? 1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें । 2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें । हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l 3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए । 4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें । 5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है । 6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें ।

आज का राशिफल Daily Rashifal

9 मार्च 2025 रविवार : आज क्या कहते हैं आपके सितारे जाने अपना राशिफल daily rashifal मेष रोजगार में वृद्धि होगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। गर्व-अहंकार को दूर करें। राजनीतिक व्यक्तियों से लाभकारी योग बनेंगे। मनोबल बढ़ने से तनाव कम होगा। साझेदारी में नवीन प्रस्ताव प्राप्त हो सकेंगे। वृषभ फालतू खर्च होगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यावसायिक योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पाएगा। परिवार की चिंता रहेगी। आय से व्यय अधिक होंगे। अजनबियों पर विश्वास से हानि हो सकती है। मिथुन बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा सफल रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। जोखिम न लें। अपने व्यसनों पर नियंत्रण रखें। पत्नी के बतलाए रास्ते पर चलने से लाभ की संभावना बनती है। यात्रा से लाभ। वाहन-मशीनरी खरीदी के योग हैं। व्यवसाय में अड़चनें आएंगी। कर्क नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। मान-सम्मान मिलेगा। नेत्र पीड़ा हो सकती है। अधिकारी वर्ग विशेष सहयोग नहीं करेंगे। ऋण लेना पड़ सकता है। यात्रा आज नहीं करें। परिवार के कार्यों को प्राथमिकता दें। आपकी बुद्धिमत्ता सामाजिक सम्मान दिलाएगी। सिंह धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य बनेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बचें। कार्य-व्यवसाय में लाभ होने की संभावना है। दांपत्य जीवन में अनुकूलता रहेगी। सामाजिक समारोहों में भाग लेंगे। सुकर्मों के लाभकारी परिणाम मिलेंगे। कन्या जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। मितव्ययिता को ध्यान में रखें। कुटुंबियों से संबंध सुधरेंगे। शत्रुओं से सावधान रहें। व्यापार लाभप्रद रहेगा। खर्चों में कमी करें। सश्रम किए गए कार्य पूर्ण होंगे। तुला भ्रम की स्थिति बन सकती है। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कानूनी अड़चन दूर होगी। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य संबंधी समस्या हल हो सकेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। अपनी वस्तुएँ संभालकर रखें। रुका धन मिलेगा। वृश्चिक भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। अर्थ संबंधी कार्यों में सफलता से हर्ष होगा। सुखद भविष्य का स्वप्न साकार होगा। विचारों से सकारात्मकता बढ़ेगी। दुस्साहस न करें। व्यापार में इच्छित लाभ होगा। धनु स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। अच्छे लोगों से भेंट होगी जो आपके हितचिंतक रहेंगे। योजनाएं फलीभूत होंगी। नौकरी में पदोन्नाति के योग हैं। आलस्य से बचकर रहें। परिवार की मदद मिलेगी। मकर कष्ट, भय, चिंता व बेचैनी का माहौल बन सकता है। दु:खद समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। किसी के भरोसे न रहकर अपना कार्य स्वयं करें। महत्वपूर्ण कार्यों में हस्तक्षेप से नुकसान की आशंका है। परिवार में तनाव रहेगा। व्यापार-व्यवसाय मध्यम रहेगा। कुंभ पिता को पुराना रोग उभर सकता है। कारोबार में प्रयास सफल रहेंगे। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। यात्रा का शुभ योग होने के साथ ही कठिन कार्य में भी सफलता मिल सकेगी। रिश्तेदारों से संपत्ति संबंधी विवाद हो सकता है। व्यापार-नौकरी में लाभ होगा। मीन पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। शुभ समाचार मिलेंगे। मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी। मन में उत्साह रहेगा, जिससे कार्य की गति बढ़ेगी। आपके कार्यों को समाज में प्रशंसा मिलेगी। भागीदारी में आपके द्वारा लिए गए निर्णयों से लाभ होगा।

आज का पंचांग Daily panchang

9 March 2025, Sunday, by Divam astro world दिनांक – 09 मार्च 2025 दिन – रविवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – दशमी प्रातः 07:45 तक तत्पश्चात एकादशी नक्षत्र – पुनर्वसु रात्रि 11:55 तक तत्पश्चात पुष्य योग – सौभाग्य दोपहर 02:59  तक तत्पश्चात शोभन राहु काल – शाम 05:17 से शाम 06:46 तक सूर्योदय – 06:58 सूर्यास्त – 06:42 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:17 से 06:06 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:27 से दोपहर 01:14 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 10 से रात्रि 01:14 मार्च 10 तक व्रत पर्व विवरण – रविपुष्य योग, सर्वार्थसिद्धि योग (दोपहर 11:55 से सूर्योदय मार्च 10 तक) विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है एवं रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) एकादशी के दिन चावल खाना निषिद्ध क्यों ? वात-पित्त-कफजनित दोष अथवा समय-असमय खाये हुए अन्न आदि के जो दोष १४ दिन में इकट्ठे होते हैं, १५वें दिन एकादशी का व्रत रखा तो वे दोष निवृत्त होते हैं । जो विपरीत रस या कच्चा रस नाड़ियों में पड़ा है, जो बुढ़ापे में मुसीबत देगा, व्रत उसको नष्ट कर देता है । इससे शरीर जल्दी रोगी नहीं होगा । एकादशी को चावल खाने से स्वास्थ्य – हानि, पापराशि की वृद्धि कही गयी है । एक एक चावल एक एक कीड़े खाने का पाप लगता है । एकादशी व्रत के लाभ एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है । जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है । धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है । कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।

आज का पंचांग daily panchang

8 March 2025, Saturday,by Divam astro world दिनांक – 8 मार्च 2025 दिन – शनिवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – नवमी सुबह 08:16 तक तत्पश्चात दशमी नक्षत्र – आर्द्रा रात्रि 11:28 तक  तत्पश्चात पुनर्वसु योग- आयुष्मान् शाम 04:28 तक तत्पश्चात सौभाग्य राहु काल – सुबह 09:53 से सुबह 11:22 तक सूर्योदय – 06:58 सूर्यास्त – 06:42 दिशा शूल- पूर्व दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:18 से 06:06 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:27 से दोपहर 01:14 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 09 से रात्रि 01:14 मार्च  09 तक व्रत पर्व विवरण – विश्व महिला दिवस विशेष – दशमी को कलंबी शाक त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) सुपाच्य एवं बलवर्धक ज्वार आयुर्वेद के अनुसार ज्वार शीतल, रुक्ष, पचने में हलकी, किंचित् वीर्यवर्धक तथा मूत्रजनन है । यह रक्तविकार एवं प्रकुपित कफ-पित्त को दूर करने में सहायक है । यह दो प्रकार की होती है – सफेद व लाल । सफेद ज्वार स्वास्थ्य के लिए विशेष हितकर एवं बलप्रद है । यह बवासीर, घाव और अरुचि में गुणकारी है । (वसंत ऋतु -19 फरवरी से 19 अप्रैल) में कफ का प्रकोप होता है । अतः कफशमन हेतु होली के दिनों में ज्वार की धानी तथा भुने हुए चने खाने का रिवाज है । इस ऋतु में ज्वार का सेवन हितकारी है । ज्वार में विटामिन बी-१, बी-२, बी- ३, बी-५, बी-६, बी-७, बी-९, ‘ए’, ‘ई’ तथा फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नेशियम, लौह व जिंक आदि पोषक तत्त्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं । विभिन्न रोगों में लाभकारी (१) ज्वार कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक है । (२) इसमें रेशे की मात्रा अधिक है तथा इसका ग्लायसेमिक इंडेक्स (GI) कम है अर्थात् ज्वार रक्त शर्करा (blood sugar) को तेजी से व अधिक मात्रा में नहीं बढ़ाती । अतः यह मधुमेह (diabetes) में खूब लाभकारी है । मधुमेह में गेहूँ व चावल का सेवन बंद कर ज्वार की रोटी खाने से रक्त शर्करा आसानी से नियंत्रित रहती है । (३) ज्वार में कैंसर-विरोधी घटक पाये जाते हैं। अनुसंधानों के अनुसार गेहूँ और मक्के की तुलना में ज्वार का सेवन करनेवालों में कमी देखी गयी । (४) मोटापा एक गम्भीर समस्या है जो मधुमेह और हृदयरोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है । ज्वार में रेशे की अधिक मात्रा होने तथा यह शीघ्र तृप्तिदायक होने से मोटापे से रक्षा करती है । ज्वार के आटे की रोटी बनायी जाती है तथा ज्वार का दलिया, खिचड़ी व अन्य कई प्रकार के व्यंजन भी बनाये जाते हैं ।

आज का पंचांग Daily panchang

7 March 2025, by Divam astro world दिनांक – 7 मार्च 2025 दिन – शुक्रवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – अष्टमी सुबह 09:18 तक तत्पश्चात नवमी नक्षत्र – मृगशिरा रात्रि 11:32 तक  तक तत्पश्चात आर्द्रा योग – प्रीति शाम 06:15 तक तत्पश्चात आयुष्मान् राहु काल – सुबह 11:22 से दोपहर 12:51 तक सूर्योदय – 06:59 सूर्यास्त – 06:41 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:18 से 06:07 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:27 से दोपहर 01:14 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 08 से रात्रि 01:15 मार्च 08 तक व्रत पर्व विवरण – मासिक दुर्गाष्टमी विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है व नवमी को लौकी खाना गौमाँस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

तीर्थ में पालने योग्य १२ नियम आज का पंचांग Daily Panchang

6 March 2025, by Divam astro world दिनांक – 6 मार्च 2025 दिन – गुरुवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – सप्तमी सुबह 10:50 तक तत्पश्चात अष्टमी नक्षत्र – रोहिणी रात्रि 12:05 मार्च 07 तक तत्पश्चात मृगशिरा योग- विष्कम्भ रात्रि 08:29 तक तत्पश्चात प्रीति राहु काल – दोपहर 02:20 से दोपहर 03:48 तक सूर्योदय – 07:00 सूर्यास्त – 06:41 दिशा शूल – दक्षिण दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:19 से 06:08 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:27 से दोपहर 01:15 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 07 से रात्रि 01:15 मार्च 07 तक व्रत पर्व विवरण – रोहिणी व्रत विशेष – सप्तमी को ताड़ फल फल खाने से रोग बढ़ता है व शरीर का नाश होता है और अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) तीर्थ में पालने योग्य १२ नियम अश्वमेधसहस्राणि वाजपेयशतानि च। लक्षं प्रदक्षिणा भूमेः कुम्भस्नानेन तत्फलम् ।। ‘हजारों अश्वमेध यज्ञ, सैकड़ों वाजपेय यज्ञ और लाखों बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से जो फल होता है, वही फल एक बार कुम्भ-स्नान करने से प्राप्त हो जाता है।’ तीर्थ में ये बारह नियम अगर कोई पालता है तो उसे तीर्थ का पूरा फायदा होता है: (१) हाथों का संयम : गंगा में गोता भी मारा और अनधिकार किसीकी वस्तु ले ली या ऐसी-वैसी कोई चीज उठाकर मुँह में डाल ली तो पुण्यप्राप्ति का आनंद नहीं होगा । (२) पैरों का संयम: कहीं भी चले गये मौज-मजा मारने के लिए… नहीं, अनुचित जगह पर न जायें । (३) मन को दूषित विचारों व चिंतन से बचाकर भगवच्चिंतन करना । (४) सत्संग व वेदांत शास्त्र का आश्रय लेना : ऐसा नहीं कि शरीर में बुखार है और दे मारा गोता । पुण्यलाभ करें और फिर हो गया बुखार या न्यूमोनिया और आदमी मर गया, ऐसा नहीं करना चाहिए । देश,काल और शरीर की अवस्था देखनी चाहिए । (५) तपस्या। (६) भगवान की कीर्ति, भगवान के गुणों का गान कुम्भ-स्थान पर करना चाहिए । (७) परिग्रह का त्याग : कोई कुछ चीज दे तो तीर्थ में दान नहीं लेना चाहिए । तीर्थ में दूसरों की सुविधाओं का उपयोग करके अपने ऊपर बोझा न चढ़ायें । दान का खाना, अशुद्ध खाना, प्रसाद में धोखेबाजी करके बार-बार लेना… अशुद्ध व्यवहार पुण्य क्षीण और हृदय को मलिन करता है । एक तरफ पुण्य कमा रहे हैं, दूसरी तरफ बोझा चढ़ा रहे हैं । यह न करें । (८) जैसी भी परिस्थिति हो, आत्मसंतोष होना चाहिए । हाय रे ! धक्का धक्की है, बस नहीं मिली… ऐसा करके चित्त नहीं बिगाड़ना । ‘हरे-हरे ! वाह ! यार की मौज ! तेरी मर्जी पूरण हो !’ – इस प्रकार अपने चित्त को संतुष्ट रखें । (९) किसी प्रकार के अहंकार को न पोसें: ‘मैं तो तीन बजे उठा था, मैं तो इतने मील पैदल गया और मैंने तो १० डुबकियाँ लगायीं…. – ऐसा अहंकार पुण्य को क्षीण कर देता है । भगवान की कृपा है जो पुण्यकर्म हुआ, उसको छुपाकर रखो । (१०) ‘यह करूँगा, यह भोगूँगा, इधर जाऊँगा, उधर जाऊँगा…. इसका चिंतन न करें । ‘मैं कौन हूँ ? जन्म के पहले मैं कौन था, अभी कौन हूँ और बाद में कौन रहूँगा ? तो मैं तो वही चैतन्य आत्मा हूँ । मैं जन्म के पहले था, अभी हूँ और बाद में भी रहूँगा ।’ – इस प्रकार अपने स्वभाव में आने का प्रयत्न करें । (११) दम्भ, दिखावा न करें । (१२) इन्द्रिय-लोलुपता नहीं । कुछ भी खा लिया कि मजा आता है, कहीं भी चले गये… तो मौज-मजा मारने के लिए कुम्भ-स्नान नहीं है । सच्चाई, सत्कर्म और प्रभु-स्नेह से तपस्या करके अंतरात्मा का माधुर्य जगाने के लिए और हृदय को प्रसन्नता दिलाने के लिए तथा सत्संग के रहस्य का प्रसाद पाने के लिए संगम-स्नान है ।” गुरुवार विशेष हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है । गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें : एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें । गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है । गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।

आज का पंचांग Panchang

5 March 2025 Wednesday,by Divam astro world दिनांक – 5 मार्च 2025 दिन – बुधवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – षष्ठी दोपहर 12:51 तक तत्पश्चात सप्तमी नक्षत्र – कृतिका रात्रि 01:08 मार्च 06 तक, तत्पश्चात रोहिणी योग- वैधृति रात्रि 11:07 तक तत्पश्चात विषकम्भ राहु काल – दोपहर 12:51 से दोपहर 02:20 तक सूर्योदय – 07:02 सूर्यास्त – 06:40 दिशा शूल – उत्तर दिशा में अग्निवास: पृथ्वी- शुभ चन्द्र वास: पूर्व, दक्षिण शिववास: वृषे- अभीष्टसिद्धि (दि..12:51)तक, भोजने- पीडायां ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:20 से 06:09 तक अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 मार्च 06 से रात्रि 01:15 मार्च 06 तक व्रत पर्व विवरण – सर्वार्थ सिद्धि योग (अहोरात्रि) पद, चरण 1 अ कृत्तिका 08:12:02 2 ई कृत्तिका 13:48:54 3 उ कृत्तिका 19:27:20 4 ए कृत्तिका 25:07:22 चोघडिया, दिन लाभ 06:46 – 08:14 शुभ अमृत 08:14 – 09:42 शुभ काल 09:42 – 11:10 अशुभ शुभ 11:10 – 12:39 शुभ रोग 12:39 – 14:07 अशुभ उद्वेग 14:07 – 15:35 अशुभ चर 15:35 – 17:03 शुभ लाभ 17:03 – 18:31 शुभ चोघडिया, रात उद्वेग 18:31 – 20:03 अशुभ शुभ 20:03 – 21:34 शुभ अमृत. 21:34 – 23:06 शुभ चर 23:06 – 24:38 शुभ रोग 24:38 – 26:10 अशुभ काल 26:10 – 27:42 अशुभ लाभ 27:42 – 29:14 शुभ उद्वेग 29:14 – 30:45 अशुभ विशेष – षष्ठी को नीम का पत्ती फल या दातुन मुख में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है व सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है और शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

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