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आज का पंचांग Aaj ka panchang

वैदिक पंचांग Daily panchang दिनांक – 01 मई 2025 दिन – गुरूवार विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081) शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म ॠतु मास – वैशाख पक्ष – शुक्ल तिथि – चतुर्थी सुबह 11:23 तक तत्पश्चात पंचमी नक्षत्र – मृगशिरा दोपहर 02:21 तक तत्पश्चात आर्द्रा योग – अतिगण्ड सुबह 08:34 तक तत्पश्चात सुकर्मा राहुकाल – दोपहर 02:13 से शाम 03:50 तक सूर्योदय – 06:09 सूर्यास्त – 07:02 दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे व्रत पर्व विवरण- विनायक चतुर्थी,राष्ट्रीय मजदूर दिवस विशेष- चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

आज का पंचांग Aaj ka PANCHANG

वैदिक पंचांग Daily panchang दिनांक – 30 अप्रैल 2025 दिन – बुधवार विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081) शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म ॠतु मास – वैशाख पक्ष – शुक्ल तिथि – तृतीया दोपहर 02:12 तक तत्पश्चात चतुर्थी नक्षत्र – रोहिणी शाम 04:18 तक तत्पश्चात मृगशिरा योग – शोभन दोपहर 12:02 तक तत्पश्चात अतिगण्ड राहुकाल – दोपहर 12:36 से दोपहर 02:13 तक सूर्योदय – 06:09 सूर्यास्त – 07:02 दिशाशूल – उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- अक्षय तृतीया,(पूरा दिन शुभ मुहूर्त),आखा तीज,त्रेता युगादि तिथि विशेष- तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

आजका पंचांग Aaj ka panchang

वैदिक पंचांग दिनांक – 29 अप्रैल 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081) शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म ॠतु मास – वैशाख पक्ष – शुक्ल तिथि – द्वितीया शाम 05:31 तक तत्पश्चात तृतीया नक्षत्र – कृत्तिका शाम 06:47 तक तत्पश्चात रोहिणी योग – सौभाग्य शाम 03:54 तक तत्पश्चात शोभन राहुकाल – शाम 03:50 से शाम 05:26 तक सूर्योदय – 06:10 सूर्यास्त – 07:00 दिशाशूल – उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- विशेष- द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

आज का पंचांग Aaj ka panchang

वैदिक पंचांग दिनांक – 28 अप्रैल 2025 दिन – सोमवार विक्रम संवत – 2082 शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म ॠतु मास – वैशाख पक्ष – शुक्ल तिथि – प्रतिपदा रात्रि 09:10 तक तत्पश्चात द्वितीया नक्षत्र – भरणी रात्रि 09:37 तक तत्पश्चात कृत्तिका योग – आयुष्मान रात्रि 08:03 तक तत्पश्चात सौभाग्य राहुकाल – सुबह 07:47 से सुबह 09:23 तक सूर्योदय – 06:11 सूर्यास्त – 07:01 दिशाशूल – पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण- चंद्र-दर्शन (शाम-06:53 से रात्रि 07:38 तक*) विशेष- प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

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वैदिक हिंदू पंचांग Hindu panchang दिनांक – 26 अप्रैल 2025, 26/4/2025 दिन – शनिवार Saturday विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081) शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म ॠतु मास – वैशाख (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार चैत्र) पक्ष – कृष्ण तिथि – त्रयोदशी सुबह 08:27 तक तत्पश्चात चतुर्दशी नक्षत्र – उत्तरभाद्रपद सुबह 06:27 तक तत्पश्चात रेवती योग – वैधृति सुबह 08:42 तक तत्पश्चात विष्कंभ राहुकाल – सुबह 09:24 से सुबह 11:00 तक सूर्योदय – 06:12 सूर्यास्त – 07:00 दिशाशूल – पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण- मासिक शिवरात्रि,पंचक,चतुर्दशी क्षय तिथि विशेष- त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’) शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’) हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण) नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए 27 अप्रैल 2025 रविवार को दर्श अमावस्या एवं वैशाख अमावस्या है। घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं । अमावस्या अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है (विष्णु पुराण) धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा। विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें। आहुति मंत्र १. ॐ कुल देवताभ्यो नमः २. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः ३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः ४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः ५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नम:

आज का पंचांग

वैदिक पंचांग दिनांक – 25 अप्रैल 2025 दिन – शुक्रवार विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081) शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म ॠतु मास – वैशाख (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार चैत्र) पक्ष – कृष्ण तिथि – द्वादशी सुबह 11:44 तक तत्पश्चात त्रयोदशी नक्षत्र – पूर्वभाद्रपद सुबह 08:53 तक तत्पश्चात उत्तरभाद्रपद योग – इन्द्र दोपहर 12:31 तक तत्पश्चात वैधृति राहुकाल – सुबह 11:01 से दोपहर 12:37 तक सूर्योदय – 06:13 सूर्यास्त – 07:00 दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे व्रत पर्व विवरण- प्रदोष व्रत,पंचक विशेष- द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) प्रदोष व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 25 अप्रैल, शुक्रवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए… ऐसे करें व्रत व पूजा प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं। पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें। भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। ये उपाय करें सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है। कर्ज-मुक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि 26 अप्रैल 2025 शनिवार को मासिक शिवरात्रि है। हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते- करते ये 17 मंत्र बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोले।इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी 1).ॐ शिवाय नम: 2).ॐ सर्वात्मने नम 3).ॐ त्रिनेत्राय नम: 4).ॐ हराय नम: 5).ॐ इन्द्र्मुखाय नम: 6).ॐ श्रीकंठाय नम: 7).ॐ सद्योजाताय नम: 8).ॐ वामदेवाय नम 9).ॐ अघोरह्र्द्याय नम 10).ॐ तत्पुरुषाय नम: 11).ॐ ईशानाय नम: 12).ॐ अनंतधर्माय नम: 13).ॐ ज्ञानभूताय नम: 14). ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम: 15).ॐ प्रधानाय नम 16).ॐ व्योमात्मने नम 17).ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम आर्थिक परेशानी से बचने हेतु हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि – कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसके घर में आर्थिक कष्ट रहते हैं वो शाम के समय या संध्या के समय जप-प्रार्थना करें एवं शिवमंदिर में दीप-दान करें । और रात को जब 12 बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी।प्रति वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना |बैठ कर भगवान शिवजी के नाम का जप करना प्रार्थना करना, | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जल्दी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है ।

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वैदिक हिंदू पंचांग दिनांक – 23 अप्रैल 2025 दिन – बुधवार विक्रम संवत – 2082 शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म ॠतु मास – वैशाख पक्ष – कृष्ण तिथि – दशमी शाम 04:43 तक तत्पश्चात एकादशी नक्षत्र – धनिष्ठा दोपहर 12:07 तक तत्पश्चात शतभिषा योग – शुक्ल शाम 06:51 तक तत्पश्चात ब्रह्म राहुकाल – दोपहर 12:37 से दोपहर 02:13 तक सूर्योदय – 06:14 सूर्यास्त – 06:59 दिशाशूल – उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- पंचक एकादशी व्रत के लाभ 23 अप्रैल 2025 बुधवार को शाम 04:43 से 24 अप्रैल, गुरुवार को दोपहर 02:32 तक एकादशी है। विशेष – 24 अप्रैल, गुरुवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे। एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है । जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है । धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है । कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है । परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है :एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है । एकादशी के दिन करने योग्य एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें …….विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l एकादशी के दिन ये सावधानी रहे महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए | Get your horoscope reading, Understand your birth chart, Astrology solutions for life problems , Astrological guidance for relationships, Learn about Vedic astrologyFree astrology predictions , Vedic astrology services , Astrology consultation online, Best astrologer in India, Astrology advice for career growthCareer astrology , Love astrology , Marriage astrology , Financial astrology , Health astrology , Vastu Shastra , NumerologyAstrology , Vedic astrology , Jyotish , Horoscope , Astrology predictions,

आज का पंचांग Aaj ka panchang

आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 22 अप्रैल 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2082 अयन – उत्तरायण ऋतु – ग्रीष्म मास – वैशाख पक्ष – कृष्ण तिथि – नवमी शाम 06:12 तक तत्पश्चात् दशमी नक्षत्र – श्रवण दोपहर 12:44 तक तत्पश्चात् घनिष्ठा योग – शुभ रात्रि 09:13 तक  तत्पश्चात् शुक्ल राहुकाल – दोपहर 03:51 से शाम 05:27 तक सूर्योदय – 06:13 सूर्यास्त – 07:03 दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:44 से प्रातः 05:29 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:13 से दोपहर 01:04 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 अप्रैल 23 से रात्रि 01:00 अप्रैल 23 तक व्रत पर्व विवरण – पृथ्वी दिवस विशेष – नवमी को लौकी खाना गौमाँस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) बाल कटवाने का सही तरीका रविवार को जो लोग बाल कटवाते हैं, उनके धन, बुद्धि और धर्म की हानि होती है। सोमवार को पुत्रवान को इस दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए । मंगलवार को आयुष्य क्षीण होता है । बुधवार को धन-लाभ होता है । गुरुवार को बाल कटवाने से मान और लक्ष्मी अथवा धन-दौलत में बरकत क्षीण होने लगती है । अगर शुक्रवार को क्षौर कर्म कराते हैं तो धन-लाभ व यश-लाभ बढ़ता है | और शनिवार को बाल कटवाने से आयुष्य क्षीण होता है, अकाल मृत्यु अथवा दुर्घटना का भय रहेगा । Get your horoscope reading, Understand your birth chart, Astrology solutions for life problems , Astrological guidance for relationships, Learn about Vedic astrologyFree astrology predictions , Vedic astrology services , Astrology consultation online, Best astrologer in India, Astrology advice for career growthCareer astrology , Love astrology , Marriage astrology , Financial astrology , Health astrology , Vastu Shastra , NumerologyAstrology , Vedic astrology , Jyotish , Horoscope , Astrology predictions,

आज का पंचांग Aaj ka panchang

Hindu Panchang Daily हिन्दू पंचांग आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 19 अप्रैल 2025 दिन – शनिवार विक्रम संवत् – 2082 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – वैशाख पक्ष – कृष्ण तिथि – षष्ठी शाम 06:21 तक तत्पश्चात् सप्तमी नक्षत्र – मूल सुबह 10:21 तक तत्पश्चात् पूर्वाषाढ़ा योग – शिव रात्रि 12:53 अप्रैल 20 तक तत्पश्चात् सिद्ध राहुकाल – सुबह 09:27 से सुबह 11:03 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार) सूर्योदय – 06:16 सूर्यास्त – 07:02 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार) दिशा शूल – पूर्व दिशा में ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:46 से प्रातः 05:31 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार) अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:13 से दोपहर 01:04 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 अप्रैल 20 से रात्रि 01:01 अप्रैल 20 विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। ( ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) तुलसी माला की महिमा १) गले में तुलसी की माला धारण करने से जीवनीशक्ति बढ़ती है, बहुत से रोगों से मुक्ति मिलती है । शरीर निर्मल, रोगमुक्त व सात्त्विक बनता है । २) तुलसी माला से भगवन्नाम जप करने एवं इसे गले में पहनने से आवश्यक एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव में लाभ होता है, संक्रामक रोगों से रक्षा होती है तथा शरीर-स्वास्थ्य में सुधार होकर दीर्घायु में मदद मिलती है । ३) तुलसी को धारण करने से शरीर में विद्युतशक्ति का प्रवाह बढ़ता है तथा जीव-कोशों का विद्युतशक्ति धारण करने का सामर्थ्य बढ़ता है । ४) गले में तुलसी माला पहनने से विद्युत तरंगे निकलती हैं जो रक्त संचार में रुकावट नहीं आने देती । प्रबल विद्युतशक्ति के कारण धारक के चारों ओर आभामंडल विद्यमान रहता है । ५) गले में तुलसी माला धारण करने से आवाज सुरीली होती है । हृदय पर झूलने वाली तुलसी माला हृदय व फेफड़े को रोगों से बचाती है । इसे धारण करने वाले के स्वभाव में सात्त्विकता का संचार होता है । ६) तुलसी की माला धारक के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है । कलाई में तुलसी का गजरा पहनने से नाड़ी संबंधी समस्याओं से रक्षा होती है, हाथ सुन्न नहीं होता, भुजाओं का बल बढ़ता है । ७) तुलसी की जड़ें अथवा जड़ों के मनके कमर में बाँधने से स्त्रियों को विशेषतः गर्भवती स्त्रियों को लाभ होता है । प्रसव वेदना कम होती है और प्रसूति भी सरलता से हो जाती है । कमर में तुलसी की करधनी पहनने से पक्षाघात (लकवा) नहीं होता एवं कमर, जिगर, तिल्ली, आमाशय और यौनांग के विकार नहीं होते हैं । ८) यदि तुलसी की लकड़ी से बनी हुई मालाओं से अलंकृत होकर मनुष्य देवताओं और पितरों के पूजनादि कार्य करे तो वे कोटि गुना फल देने वाले होते हैं । जो मनुष्य तुलसी लकड़ी से बनी माला भगवान विष्णु को अर्पित करके पुनः प्रसादरूप से उसे भक्तिपूर्वक धारण करता है, उसके पातक नष्ट हो जाते हैं । शास्त्रों में वर्णित तुलसी महिमा १) अनेक व्रतकथाओं, धर्मकथाओं, पुराणों में तुलसी महिमा के अनेक आख्यान हैं । भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की कोई भी पूजा विधि तुलसी दल के बिना परिपूर्ण नहीं मानी जाती । २) जो दर्शन करने पर सारे पाप-समुदाय का नाश कर देती है, स्पर्श करने पर शरीर को पवित्र बनाती है, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण करती है, जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुँचाती है, आरोपित करने पर भगवान श्रीकृष्ण के समीप ले जाती है और भगवान के चरणों में चढ़ाने पर मोक्षरूपी फल प्रदान करती है, उस तुलसी देवी को नमस्कार है । (पद्म पुराणः उ.खं. 56.22) ३) तुलसी के निकट जो भी मंत्र-स्तोत्र आदि का जप-पाठ किया जाता है, वह सब अनंत गुना फल देने वाला होता है । ४) प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, भूत दैत्य आदि सब तुलसी के पौधे से दूर भागते हैं । ५) ब्रह्महत्या आदि पाप तथा पाप और खोटे विचार से उत्पन्न होने वाले रोग तुलसी के सामीप्य एवं सेवन से नष्ट हो जाते हैं । ६) श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी का एक पत्ता भी महान पुण्य देने वाला है । ७) तुलसी के नाम-उच्चारण से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है । ८) तुलसी ग्रहण करके मनुष्य पातकों से मुक्त हो जाता है । वास्तु शास्त्र तुलसी १) वास्तु शास्त्र में भी तुलसी को घर में सकारात्मकता लाने वाला पवित्र पौधा माना गया है तुलसी के पौधे को घर में पूर्व दिशा में रखें। इस दिशा में तुलसी का पौधा रखने पर घर में आध्यात्मिक विकास भी तेज होता है. घर के सदस्यों के बीच मनमुटाव कम होता है और प्रेम भाव बढ़ता है। २) अगर किसी वजह से पूर्व दिशा में नहीं रख सकते हैं तो उत्तर पूर्व दिशा, उत्तर दिशा या फिर उत्तर पश्चिम दिशा में रख सकते हैं। ३) इसे भूलकर भी पश्चिम दिशा में नहीं रखना चाहिए अन्यथा घर में आर्थिक उन्नति के रास्ते बंद हो जाते हैं Get your horoscope reading, Understand your birth chart, Astrology solutions for life problems , Astrological guidance for relationships, Learn about Vedic astrologyFree astrology predictions , Vedic astrology services , Astrology consultation online, Best astrologer in India, Astrology advice for career growthCareer astrology , Love astrology , Marriage astrology , Financial astrology , Health astrology , Vastu Shastra , NumerologyAstrology , Vedic astrology , Jyotish , Horoscope , Astrology predictions,Free kundali,kundali,Daily panchang,Daily horoscope,Daily Rashifal,Tulsi,Tulsi Mala,Lord vishnu,Tulsi vastu,Vastu shastra,Tarot cards,तुलसी,तुलसी माला,तुलसी की महिमा,आज का पंचांग,

आज का पंचांग Aaj ka panchang

वैदिक हिंदू पंचांग दिनांक – 18 अप्रैल 2025 दिन – शुक्रवार विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081) शक संवत -1947 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – वैशाख (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार चैत्र) पक्ष – कृष्ण तिथि – पंचमी शाम 05:07 तक तत्पश्चात षष्ठी नक्षत्र – ज्येष्ठा सुबह 08:21 तक तत्पश्चात मूल योग – परिघ 19 अप्रैल रात्रि 01:04 तक तत्पश्चात शिव राहुकाल – सुबह 11:03 से दोपहर 12:38 तक सूर्योदय – 06:18 सूर्यास्त – 06:57 दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे व्रत पर्व विवरण- गुड फ्राईडे विशेष- पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) शीघ्र कर्जमुक्ति के उपाय जब तक आपका कर्जा पूर्ण रूप से समाप्त न हो जाय तब तक ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस मंत्र का मन-ही-मन जप करते हुए पीपल-वृक्ष को जल अर्पित कर उसकी गीली मिट्टी से तिलक किया करें। इससे आप शीघ्र कर्ज-मुक्त होंगे । यदि आपके व्यवसाय में कारीगर या नौकर हैं तो उन्हें महीने में एक बार अवश्य अपने घर का भोजन इस भाव से खिलायें कि ‘सभी रूपों में भगवान हैं, आज हम इन रूपों में विराजित भगवान को भोग अर्पण कर रहे हैं।’ इससे आपके व्यवसाय में हमेशा भगवान की कृपा बनी रहेगी । आपके सहयोगी पूरे जी-जान से कार्य में लगे रहेंगे, जिससे केवल कर्ज का चुकाना ही नहीं अपितु बरकत लाना भी आसान हो जायेगा। हर महीने नहीं कर सकते तो विशेष अवसरों पर ही करें। ग्रीष्म ऋतु में स्वास्थ्य – सुरक्षा 20 अप्रैल 2025 रविवार से ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ । ग्रीष्म ऋतु में शरीर का जलीय व स्निग्ध अंश घटने लगता है | जठराग्नि व रोगप्रतिकारक क्षमता भी घटने लगती है | इससे उत्पन्न शारीरिक समस्याओं से सुरक्षा हेतु नीचे दी गयी बातों का ध्यान रखें – १] ग्रीष्म ऋतु में जलन, गर्मी, चक्कर आना, अपच, दस्त, नेत्रविकार ( आँख आना / Conjunctivitis ) आदि समस्याएँ अधिक होती हैं | अत: गर्मियों में घर में बाहर निकलते समय लू से बचने के लिए सिर पर कपड़ा बाँधे अथवा टोपी पहने तथा एक गिलास पानी पीकर निकलें | जिन्हें दोपहिया वाहन पर बहुत लम्बी मुसाफिरी करनी हो वे जेब में एक प्याज रख सकते हैं | २] उष्ण से ठंडे वातावरण में आने पर १० – १५ मिनट तक पानी न पियें | धूप में से आने पर तुंरत पूरे कपड़े न निकालें, कूलर आदि के सामने भी न बैठें | रात को पंखे, एयर – कंडिशनर अथवा कूलर की हवा में सोने की अपेक्षा हो सके तो छत पर अथवा खुले आँगन में सोयें | यह सम्भव न हो तो पंखे, कूलर आदि की सीधी हवा न लगे इसका ध्यान रखें | ३] इस मौसम में दिन में कम – से – कम ८ – १० गिलास पानी पियें | प्रात: पानी – प्रयोग ( रात का रखा हुआ आधा से डेढ़ गिलास पानी सुबह सूर्योदय से पूर्व पीये ) भी | पानी शरीर के जहरी पदार्थों(toxins) को बाहर निकालकर त्वचा को ताजगी देने में मदद करता है | ४] मौसमी फल या उनका रस व ठंड़ाई, नींबू की शिकंजी, पुदीने का शर्बत , गन्ने का रस, गुड का पानी आदि का सेवन लाभदायी है | गर्मियों में दही लेना मना है और दूध, मक्खन, खीर विशेष सेवनीय हैं | ५] आहार ताजा व सुपाच्य लें | भोजन में मिर्च, तेल, गर्म मसाले आदि का उपयोग कम करें | खमीरीकृत(fermented) पदार्थ, बासी व्यंजन बिल्कुल न लें | कपड़े सूती, सफेद या हल्के रंग के तथा ढीले – ढाले हों | सोते समय मच्छरदानी आदि का प्रयोग अवश्य करें | ६] गर्मियों में फ्रीज का ठंडा पानी पीने से गले, दाँत, आमाशय व आँतो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है | मटके या सुराही का पानी पीना निरापद है ( किंतु बिनजरूरी या प्यास से अधिक ठंडा पानी पीने से जठराग्नि मंद होती है ) | ७] इन दिनों में छाछ का सेवन निषिद्ध है | अगर लेनी ही हो तो ताज़ी छाछ में मिश्री, जीरा, पुदीना, धनिया मिलाकर लें | ८] रात को देर तक जागना, सुबह देर तक सोना, अधिक व्यायाम, अधिक परिश्रम, अधिक उपवास तथा स्त्री – सहवास – ये सभी इस ऋतु में वर्जित हैं | Get your horoscope reading, Understand your birth chart, Astrology solutions for life problems , Astrological guidance for relationships, Learn about Vedic astrologyFree astrology predictions , Vedic astrology services , Astrology consultation online, Best astrologer in India, Astrology advice for career growthCareer astrology , Love astrology , Marriage astrology , Financial astrology , Health astrology , Vastu Shastra , NumerologyAstrology , Vedic astrology , Jyotish , Horoscope , Astrology predictions

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