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आज का पंचांग Aaj ka panchang

आज का वैदिक हिंदू पंचांग Hindu PANCHANG दिनांक – 26 मार्च 2025 दिन – बुधवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – द्वादशी 27 मार्च रात्रि 01:42 तक तत्पश्चात त्रयोदशी नक्षत्र – धनिष्ठा 27 मार्च रात्रि 02:30 तक तत्पश्चात शतभिषा योग – सिद्ध दोपहर 12:26 तक तत्पश्चात साध्य राहुकाल – दोपहर 12:44 से दोपहर 02:16 तक सूर्योदय – 06:38 सूर्यास्त – 06:50 दिशाशूल – उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- पपमोचनी एकादशी (भागवत),पंचक ( आरंभ -दोपहर 03:14) विशेष- द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) वारुणी योग 27 मार्च 2025 गुरुवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक वारुणी योग है। वारुणी योग में गंगादि तीर्थ में स्नान, दान, उपवास १०० सूर्यग्रहणों के समान फलदायी है। वैदिक हिंदू पंचांग hindu panchang प्रदोष व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 27 मार्च, गुरुवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए… ऐसे करें व्रत व पूजा प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं। पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें। भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी खोले।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। ये उपाय करें :— सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है। कर्ज-मुक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि 27 मार्च 2025 गुरुवार को मासिक शिवरात्रि है। हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते- करते ये 17 मंत्र बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोले।इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी 1).ॐ शिवाय नम: 2).ॐ सर्वात्मने नम: 3).ॐ त्रिनेत्राय नम: 4).ॐ हराय नम: 5).ॐ इन्द्र्मुखाय नम: 6).ॐ श्रीकंठाय नम: 7).ॐ सद्योजाताय नम: 8).ॐ वामदेवाय नम: 9).ॐ अघोरह्र्द्याय नम: 10).ॐ तत्पुरुषाय नम: 11).ॐ ईशानाय नम: 12).ॐ अनंतधर्माय नम: 13).ॐ ज्ञानभूताय नम: 14). ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम: 15).ॐ प्रधानाय नम: 16).ॐ व्योमात्मने नम: 17).ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम: आर्थिक परेशानी से बचने हेतु हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि – कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसके घर में आर्थिक कष्ट रहते हैं वो शाम के समय या संध्या के समय जप-प्रार्थना करें एवं शिवमंदिर में दीप-दान करें । और रात को जब 12 बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी। प्रति वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना |बैठ कर भगवान शिवजी के नाम का जप करना प्रार्थना करना, | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जल्दी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है ।

आज का पंचांग Aaj ka panchang

आज का हिन्दू पंचांग hindu panchang दिनांक – 25 मार्च 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – चैत्र पक्ष – कृष्ण तिथि – एकादशी प्रातः 03:45 मार्च 26 तक तत्पश्चात् द्वादशी नक्षत्र – श्रवण प्रातः 03:49 मार्च 26 तक तत्पश्चात् घनिष्ठा योग – शिव दोपहर 02:53 तक तत्पश्चात् सिद्ध राहुकाल- दोपहर 03:49 से शाम 05:21 तक सूर्योदय – 06:39 सूर्यास्त – 06:53 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार) दिशा शूल –  उत्तर दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:05 से प्रातः 05:52 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार) अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:21 से दोपहर 01:10 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:22 मार्च 26 से रात्रि 01:09 मार्च 26 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार) व्रत पर्व विवरण – पापमोचनी एकादशी , 25 मार्च को चावल न खायें एवं व्रत उपवास 26 मार्च । विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) गृह के समीपस्थ वृक्ष ईशान में आँवला शुभदायक है । ईशान – पूर्व में कटहल एवं आम शुभदायक हैं । घरके पास काँटेवाले, दूधवाले तथा फलवाले वृक्ष स्त्री और सन्तान की हानि करनेवाले हैं । यदि इन्हें काटा न जा सके तो इनके पास शुभ वृक्ष लगा दें । काँटेवाले वृक्ष शत्रु से भय देनेवाले, दूधवाले वृक्ष धनका नाश करनेवाले और फलवाले वृक्ष सन्तानका नाश करनेवाले हैं । इनकी लकड़ी भी घरमें नहीं लगानी चाहिये | आसन्नाः कण्टकिनो रिपुभयदाः क्षीरिणोऽर्थनाशाय । फलिनः प्रजाक्षयकरा दारूण्यपि वर्जयेदेषाम् ॥(बृहत्संहिता ५३। ८६) बदरी कदली चैव दाडिमी बीजपूरिका। प्ररोहन्ति गृहे यत्र तद्गृहं न प्ररोहति ॥ (समरांगणसूत्रधार ३८ । १३१) ‘ बेर, केला, अनार तथा नींबू जिस घरमें उगते हैं, उस घर की वृद्धि नहीं होती । ‘ अश्वत्थं च कदम्बं च कदलीबीजपूरकम् । गृहे यस्य प्ररोहन्ति स गृही न प्ररोहति ॥ (बृहद्दैवज्ञ० ८७ ९) ‘पीपल, कदम्ब, केला, बीजू नींबू ये जिस घरमें होते हैं, उसमें रहनेवाले की वंशवृद्धि नहीं होती ।’ घर के भीतर लगायी हुई तुलसी मनुष्यों के लिये कल्याणकारिणी, धन-पुत्र प्रदान करनेवाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देनेवाली होती है । प्रातःकाल तुलसीका दर्शन करनेसे सुवर्ण दानका फल प्राप्त होता है ।(ब्रह्मवैवर्तपुराण, कृष्ण० १०३ । ६२-६३ ) Panchang, PANCHANG

आज का पंचांग Aaj ka panchang

आज का हिन्दू पंचांग hindu panchang दिनांक – 24 मार्च 2025 दिन – सोमवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – चैत्र पक्ष – कृष्ण तिथि – दशमी प्रातः 05:05 मार्च 25 तक तत्पश्चात् एकादशी नक्षत्र –  उत्तराषाढा प्रातः 04:27 मार्च 25 तक, तत्पश्चात् श्रवण योग – परिघ शाम 04:45 तक तत्पश्चात् शिव राहुकाल- सुबह 08:11 से सुबह 09:43 तक सूर्योदय – 06:40 सूर्यास्त – 06:52*(अहमदाबाद मानक समयानुसार) दिशा शूल –  पूर्व दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:05 से प्रातः 05:53 तक अभिजीत मुहूर्त –  दोपहर 12:22 से दोपहर 01:10 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:22 मार्च 25 से रात्रि 01:09 मार्च 25 तक व्रत पर्व विवरण – सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 04:18 से प्रातः 06:40 तक) विशेष – दशमी को कलंबी शाक त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) ग्रहबाधा दूर करने का उपाय शनि, राहू-केतु आदि ग्रहों के दोष-निवारण के लिए प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को अपने हाथ से आटे की लोई गुड़सहित प्रेमपूर्वक किसी नंदी अथवा गाय को खिलायें । कैसी भी ग्रहबाधा हो, दूर हो जायेगी । तुतलापन मिटाने के लिए २-३ बादाम के गिरी मिक्सी में अच्छी तरह घोट के और मक्खन व मिश्री मिलाकर बराबर चबा चबा कर खाएं l १ हफ्ते में तोतलेपन में आराम होता है l बुद्धि बढाने के ढेर सारे उपाय १] दिव्य प्रेरणा-प्रकाश पुस्तक में (पृष्ठ २ पर ) एक मंत्र लिखा है , उसको पढ़कर दूध में देखोगे और वह दूध पियोगे तो बुद्धि बढ़ेगी, बल बढ़ेगा । २] मंत्रजप और अनुष्ठान से बुद्धि विकसित होती है । ३] भगवच्चिंतन करके ॐकार का गुंजन करके शांत होओगे तो बुद्धि बढ़ेगी । ४] श्वासोच्छवास में भगवान् सूर्यनारायण का ध्यान करने से भी फायदा होगा । ५] श्रद्धा, भक्ति और गुरुजनों के सत्संग से भी बुद्धि उन्नत होती है । ६] भगवद-ध्यान से तो बुद्धि को बढना ही है । ७] स्मृतिशक्ति बढानी है तो कानों में अँगूठे के पासवाली पहली उँगलियाँ डालकर लम्बा श्वास लो फिर होंठ बंद रख के कंठ से ‘ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ….’ ऐसा उच्चारण करो । इस प्रकार १० बार करो । इस भ्रामरी प्राणायाम से स्मृति बढ़ेगी, विद्यार्थी भी अच्छे अंक लायेंगे ।

आज का पंचांग Aaj ka panchang

वैदिक हिंदू पंचांग दिनांक – 23 मार्च 2025 दिन – रविवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – नवमी 24 मार्च प्रातः 05:38 तक तत्पश्चात दशमी नक्षत्र – पूर्वाषाढा 24 मार्च प्रातः 04:18 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा योग – वरीयान शाम 05:59 तक तत्पश्चात परिघ राहुकाल – शाम 05:19 से शाम 06:51तक सूर्योदय – 06:41 सूर्यास्त – 06:49 दिशाशूल – पश्चिम दिशा व्रत पर्व विवरण- विशेष- नवमी को लौकी खाना त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90) रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75) स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। अशांति मिटाने का उपाय गाय के गोबर के कंडे लें, उसके ऊपर घी में भीगे हुए चावल डालकर जलाएं l घर में शांति आएगी व वास्तु दोष दूर होंगे l दरिद्रता दूर करने का उपाय सूर्य नारायण को प्रार्थना करें, जल चढ़ायें। चावल और गाय के दूध की खीर बनायें और सूर्य देव को भोग लगायें । इतवार को बिना नमक के भोजन करने को कहा गया है । ऐसा कुछ समय तक करने से दरिद्रता दूर होती है, इसमें शंका नही ।

आज का वैदिक हिंदू पंचांग Aaj ka Vaidik Hindu PANCHANG

वैदिक पंचांग हिंदू पंचांग Hindu panchang दिनांक – 20 मार्च 2025 दिन – गुरूवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – षष्ठी 21 मार्च रात्रि 02:45 तक तत्पश्चात सप्तमी नक्षत्र – अनुराधा रात्रि 11:31 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा योग – वज्र शाम 06:20 तक तत्पश्चात सिद्धि राहुकाल – दोपहर 02:17 से शाम 05:48 तक सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त – 06:48 दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे व्रत पर्व विवरण विशेष- षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) व्यतिपात योग 21 मार्च 2025 शुक्रवार को शाम 06:42 से 22 मार्च, शनिवार को शाम 06:37 तक व्यतिपात योग है। व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है। वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की। भविष्य पुराण में माना गया है कि हर इंसान को उसके शरीर, मन व बातों से किए गए पापों को भोगना पड़ता है। उसमें भी कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें महापाप माना गया है। आइए जानते हैं पांच ऐसे ही महापापों के बारे में जिन्हें करने वालों को नरक में सबसे ज्यादा यातनाएं झेलनी पड़ती है। ये हैं 5 सबसे बड़े पाप, इन्हें करने वालें को नर्क में मिलती है सबसे ज्यादा सजा 1) अनीति का धन:– किसी को ठग कर गलत काम कर या किसी के हिस्से की वस्तु को चुराकर धन एकत्रित करना और धन का दान न करने वाले को भी भविष्यपुराण में महापापी माना गया है। 2) गुरु से धोखाधड़ी:– गुरु मनुष्य को अच्छे-बुरे का ज्ञान देते है। गुरु को पिता के समान मानना चाहिए। गुरु के साथ कभी भी कंपट एवं धोखाधड़ी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना सबसे बड़ा पाप माना गया है। ऐसे इंसान को उसके पापों की सजा मिलती है। 3) पशुओं पर अत्याचार:– पशुओं पर अत्याचार करना, ब्राह्मण की हत्या या उसका अपमान करना, नौकरों से बुरा व्यवहार करने वाले मनुष्य को भी कुंभीपाक नाम के नर्क की यातना सहनी पड़ती है। इसलिए भुलकर भी ये महापाप नहीं करना चाहिए। 4) शराब पीना:– शराब में तीन प्रकार के पाप बताएँ गए है।स्त्री हो या पुरुष सभी को शराब व अन्य मादक पदार्थों से दुर रहना चाहिए।किसी भी तरह की शराब पीने से मनुष्य महापाप का भागी बन जाता है। 5) चोरी करना :– जो मनुष्य दुसरों की वस्तु हड़पने या चुराने की कोशिश करता है, वह पापी माना गया है। चोरी करने वाले इंसान या ऐसे काम में साथ देने वाले को नर्क में दुःख भोगने पड़ते है।इसलिए मनुष्य को कभी भी ये महापाप नहीं करना चाहिए।

आज का पंचांग Aaj ka dainik panchang

आज का वैदिक हिंदू पंचांग Hindu PANCHANG दिनांक – 19 मार्च 2025 दिन – बुधवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – पंचमी रात्रि 12:36 तक तत्पश्चात षष्ठी नक्षत्र – विशाखा रात्रि 08:50 तक तत्पश्चात अनुराधा योग – हर्षण शाम 05:38 तक तत्पश्चात वज्र राहुकाल – दोपहर 12:46 से दोपहर 02:17 तक सूर्योदय 06:44 सूर्यास्त – 06:48 दिशाशूल – उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- रंग पंचमी विशेष- पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) कलह, धन-हानि व रोग-बाधा से परेशान हों तो घर में कलहपूर्ण वातावरण, धन-हानि एवं रोग-बाधा से परेशानी होती हो तो आप अपने घर में मोरपंख कि झाड़ू या मोरपंख पूजा-स्थल में रखें | नित्य नियम के बाद मन-ही-मन भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए इस पंख या झाड़ू को प्रत्येक कमरे में एवं रोग-पीड़ित के चारों तरफ गोल-गोल घुमाये | कुछ देर ‘ॐकार ‘ का कीर्तन करें-करायें | ऐसा करने से समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा ऊपरी एवं बुरी शक्तियों का प्रभाव भी दूर हो जाता है | ज्योतिष ग्रंथ मुर्हूत चिंतामणि के अनुसार हिंदू धर्म में दैनिक जीवन से जुड़ी भी अनेक मान्यताएं और परंपराएं हैं। ऐसी ही एक मान्यता है नाखून, दाढ़ी व बाल कटवाने से जुड़ी। माना जाता है कि सप्ताह के कुछ दिन ऐसे होते हैं जब नाखून, दाढ़ी व बाल कटवाना हमारे धर्म ग्रंथों में शुभ नहीं माना गया है, जबकि इसके बिपरीत कुछ दिनों को इन कामों के लिए शुभ माना गया है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं शास्त्र …. ज्योतिष ग्रंथ मुर्हूत चिंतामणि के अनुसार जानिए किस दिन नाखून, दाढ़ी व बाल कटवाने से होता है क्या असर 1. सोमवार:- सोम का संबंध चंद्रमा से है इसलिए सोमवार को बाल या नाखून काटना मानसिक स्वास्थ्य व संतान के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना गया है। 2. मंगलवार:- मंगलवार को बाल कटवाना व दाढ़ी बनाना उम्र कम करने वाला माना गया है। 3. बुधवार:- बुधवार के दिन नाखून और बाल कटवाने से घर में बरकत रहती है व लक्ष्मी का आगमन होता है। 4. गुरुवार:- गुरुवार को भगवान विष्णु का वार माना गया है। इस दिन बाल कटवाने से लक्ष्मी का नुकसान और मान-सम्मान की हानि होती है। 5. शुक्रवार:- शुक्र ग्रह को ग्लैमर का प्रतीक माना गया है। इस दिन बाल और नाखून कटवाना शुभ होता है। इससे लाभ, धन और यश मिलता है। 6. शनिवार:- शनिवार का दिन बाल कटवाने के लिए अशुभ होता है यह जल्दी मृत्यु का कारण माना जाता है। 7. रविवार:- रविवार को बाल कटवाना अच्छा नहीं माना जाता है। महाभारत के अनुशासन पर्व में बताया गया है कि ये सूर्य का वार है इससे धन, बुद्धि और धर्म का नाश होता है।

आज का पंचांग Aaj ka panchang

आज का वैदिक हिंदू पंचांग Aaj ka vaidik hindu PANCHANG दिनांक – 18 मार्च 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – चतुर्थी रात्रि 10:09 तक तत्पश्चात पंचमी नक्षत्र – स्वाती शाम 05:52 तक तत्पश्चात विशाखा योग – व्याघात शाम 04:44 तक तत्पश्चात हर्षण राहुकाल – शाम 03:48 से शाम 05:18 तक सूर्योदय 06:45 सूर्यास्त – 06:47 दिशाशूल – उत्तर दिशा व्रत पर्व विवरण- मंगलवारी चतुर्थी (सूर्योदय से रात्रि 10:09 तक) विशेष- चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) स्वास्थ्यप्रद दोहे चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे । ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे ॥ पोषक तत्त्व से पूर्ण है, पका पपीता फल । जो खावे नित नियम से, कड़ा न होवे मल ।। २०-२५ दिन नीम के २५-३० कोमल पत्ते और १-२ काली मिर्च खानी चाहिए। षष्ठी तिथि को नीम के पत्ते नहीं खाने चाहिए । रंग पंचमी Rang panchmi upay हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष (गुजरात अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष) की पंचमी पर रंग पंचमी का पावन त्योहार मनाया जाता है। इस साल 19 मार्च को रंग पंचमी पड़ रही है। रंग पंचमी के दिन आसमान में गुलाल उड़ाने की परंपरा हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है। इस पावन दिन भगवान श्रीकृष्ण व राधा रानी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। रंग पंचमी का त्योहार नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मकता पाने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन लोग ज्योतिष शास्त्र में वर्णित कुछ उपाय करते हैं, मान्यता है कि ऐसा करने से धन-संपदा में बरकत होती है। आइए जानते हैं रंग पंचमी के खास उपाय 1. रंग पंचमी के दिन माता लक्ष्मी व भगवान विष्णु की एक साथ पूजा करनी चाहिए। माता लक्ष्मी धन संपत्ति, ऐश्वर्य आदि की देवी हैं। पूजा के समय माता लक्ष्मी व भगवान विष्णु को लाल गुलाल अर्पित करें। पूजा के समय कनकधरा स्तोत्र का पाठ करें। मान्यता है कि ऐसा करने से धन-संपदा में वृद्धि होती है। 2. रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण व राधा रानी की विधिवत पूजा करें। इसके बाद उन्हें गुलाल अर्पित करें। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याएं दूर होती हैं। प्रेम संबंध मजबूत होते हैं। दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए पति-पत्नी को एक साथ पूजा करनी चाहिए। 3. रंग पंचमी के दिन एक पीले कपड़े में एक सिक्का और हल्दी की पांच गांठें बांधकर पूजा स्थल पर रख दें। फिर माता लक्ष्मी का ध्यान करके एक घी का दीपक जलाएं। दीपक के शांत होने पर हल्दी और सिक्के की पोटली को तिजोरी में रखें। मान्यता है कि ऐसा करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है। 4. रंग पंचमी के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करना फलदायी माना गया है। पूजा के समय माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई जैसे बर्फी, बताशा, मिश्री या खीर का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि मां लक्ष्मी के प्रसन्न होने से परिवार में धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।

आज का पंचांग Aaj ka panchang

आज का वैदिक हिंदू पंचांग Aaj ka vaidik hindu panchang दिनांक – 17 मार्च 2025 दिन – सोमवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – तृतीया शाम 07:33 तक तत्पश्चात चतुर्थी नक्षत्र – चित्रा दोपहर 02:47 तक स्वाती योग – ध्रुव शाम 03:45 तक तत्पश्चात व्याघात राहुकाल – सुबह 08:16 से सुबह 09:46 तक सूर्योदय 06:46 सूर्यास्त – 06:47 दिशाशूल – पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण- संकष्ट चतुर्थी(चन्द्रोदय-रात्रि 09:16) विशेष- तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) मंगलवारी चतुर्थी 18 मार्च 2025 मंगलवार को सूर्योदय से रात्रि 10:09 तक मंगलवारी चतुर्थी है । मंत्र जप व शुभ संकल्प की सिद्धि के लिए विशेष योग मंगलवारी चतुर्थी को किये गए जप-संकल्प, मौन व यज्ञ का फल अक्षय होता है । मंगलवार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना … जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है… मंगलवारी चतुर्थी अंगार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना …जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है… बिना नमक का भोजन करें मंगल देव का मानसिक आह्वान करो चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें कितना भी कर्ज़दार हो ..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा | मंगलवार चतुर्थी भारतीय समय के अनुसार 18 मार्च 2025 को (सूर्योदय से रात्रि 10:09 तक) मंगलवारी चतुर्थी है, इस महा योग पर अगर मंगल ग्रह देव के 21 नामों से सुमिरन करें और धरती पर अर्घ्य देकर प्रार्थना करें,शुभ संकल्प करें तो आप सकल ऋण से मुक्त हो सकते हैं.. मंगल देव के 21 नाम इस प्रकार हैं :- 1) ॐ मंगलाय नमः 2) ॐ भूमि पुत्राय नमः 3 ) ॐ ऋण हर्त्रे नमः 4) ॐ धन प्रदाय नमः 5 ) ॐ स्थिर आसनाय नमः 6) ॐ महा कायाय नमः 7) ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः 8) ॐ लोहिताय नमः 9) ॐ लोहिताक्षाय नमः 10) ॐ साम गानाम कृपा करे नमः 11) ॐ धरात्मजाय नमः 12) ॐ भुजाय नमः 13) ॐ भौमाय नमः 14) ॐ भुमिजाय नमः 15) ॐ भूमि नन्दनाय नमः 16) ॐ अंगारकाय नमः 17) ॐ यमाय नमः 18) ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः 19) ॐ वृष्टि कर्ते नमः 20) ॐ वृष्टि हराते नमः 21) ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः ये 21 मन्त्र से भगवान मंगल देव को नमन करें ..फिर धरती पर अर्घ्य देना चाहिए..अर्घ्य देते समय ये मन्त्र बोले :- भूमि पुत्रो महा तेजा , कुमारो रक्त वस्त्रका , ग्रहणअर्घ्यं मया दत्तम, ऋणम शांतिम प्रयाक्ष्मे | हे भूमि पुत्र!..महा क्यातेजस्वी,रक्त वस्त्र धारण करने वाले देव मेरा अर्घ्य स्वीकार करो और मुझे ऋण से शांति प्राप्त कराओ..

आज का वैदिक पंचांग Aaj ka vaidik hindu panchang

वैदिक पंचांग Vaidik Hindu panchang दिनांक – 15 मार्च 2025 दिन – शनिवार विक्रम संवत – 2081 शक संवत -1946 अयन – उत्तरायण ऋतु – वसंत ॠतु मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र फाल्गुन) पक्ष – कृष्ण तिथि – प्रतिपदा दोपहर 02:33 तक तत्पश्चात द्वितीया नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी सुबह 08:54 तक हस्त योग – गण्ड दोपहर 02:00 तक तत्पश्चात वृद्धि राहुकाल – सुबह 09:47 से सुबह 11:18 तक सूर्योदय 06:48 सूर्यास्त – 06:46 दिशाशूल – पूर्व दिशा व्रत पर्व विवरण- विशेष- प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) चैत्र मास Chaitra Mahina होली के तुरंत बाद चैत्र मास का प्रारंभ हो जाता है। चैत्र हिन्दू धर्म का प्रथम महीना है। चित्रा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम चैत्र पड़ा (चित्रानक्षत्रयुक्ता पौर्णमासी यत्र सः)। इस वर्ष 15 मार्च 2025 (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) चैत्र का आरम्भ होगा और गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार 30 मार्च से चैत्र मास प्रारंभ होगा । चैत्र मास को मधु मास के नाम से जाना जाता है। इस मास में बसंत ऋतु का यौवन पृथ्वी पर देखने को मिलता है। चैत्र में रोहिणी और अश्विनी शून्य नक्षत्र हैं इनमें कार्य करने से धन का नाश होता है। महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “चैत्रं तु नियतो मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। सुवर्णमणिमुक्ताढ्ये कुले महति जायते।।” जो नियम पूर्वक रहकर चैत्रमास को एक समय भोजन करते बिताता है, वह सुवर्ण, मणि और मोतियों से सम्पन्न महान कुल में जन्म लेता है ।चैत्र में गुड़ खाना मना बताया गया है। चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है। शिवपुराण के अनुसार चैत्र में गौ का दान करने से कायिक, वाचिक तथा मानसिक पापों का निवारण होता है .देव प्रतिष्ठा के लिये चैत्र मास शुभ है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष का शुभारम्भ होता है। हिन्दू नववर्ष के चैत्र मास से ही शुरू होने के पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान ब्रह्मदेव ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। ताकि सृष्टि निरंतर प्रकाश की ओर बढ़े। चैत्रमासि जगद् ब्रह्मा स सर्वा प्रथमेऽवानि । शुक्ल पक्षे समग्रं तत – तदा सूर्योदय सति ।। (ब्रह्मपुराण) नारद पुराण में भी कहा गया है की चैत्रमास के शुक्लपक्ष में प्रथमदिं सूर्योदय काल में ब्रह्माजी ने सम्पूर्ण जगत की सृष्टि की थी। चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससज प्रथमेऽहनि ।। शुक्लपक्षे समग्रं वै तदा सूर्योदये सति ।। इसलिए खास है चैत्र ,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र में विष्कुम्भ योग में दिन के समय भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। “कृते च प्रभवे चैत्रे प्रतिपच्छुक्लपक्षगा । रेवत्यां योग-विष्कुम्भे दिवा द्वादश-नाड़िका: ।। मत्स्यरूपकुमार्यांच अवतीर्णो हरि: स्वयम् ।।”चैत्र शुक्ल तृतीया तथा चैत्र पूर्णिमा मन्वरादि तिथियाँ हैं। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। भविष्यपुराण में चैत्र शुक्ल से विशेष सरस्वती व्रत का विधान वर्णित है । चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्र मनाये जाते हैं जिसमें व्रत रखने के साथ माँ जगतजननी की पूजा का विशेष विधान है। चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। युगों में प्रथम सत्ययुग का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से माना जाता है। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को हुआ था। युगाब्द (युधिष्ठिर संवत) का आरम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को माना जाता है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् का प्रारम्भ भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को किया गया था। चैत्र मास में ऋतु परिवर्तन होता है और हमारे आयुर्वेदाचार्यों ने इस मास को स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना है। पारिभद्रस्य पत्राणि कोमलानि विशेषत:। सुपुष्पाणि समानीय चूर्णंकृत्वा विधानत: । मरीचिं लवणं हिंगु जीरणेण संयुतम्। अजमोदयुतं कुत्वा भक्षयेद्रोगशान्तये ।

आज का पंचांग Daily panchang

आज का हिन्दू पंचांग Aaj ka Hindu panchang दिनांक – 14 मार्च 2025 दिन- शुक्रवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – शुक्ल तिथि – पूर्णिमा दोपहर 12:23 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी पूर्ण रात्रि तक योग- शूल दोपहर 01:24 तक तत्पश्चात् गण्ड राहुकाल – सुबह 11:19 से दोपहर 12:49 सूर्योदय – 06:53 सूर्यास्त – 06:44 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:13 से प्रातः 06:01 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:25 से दोपहर 01:13 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:24 मार्च 15 से रात्रि 01:12 मार्च 15 तक व्रत पर्व विवरण – फाल्गुनी पूर्णिमा, होली, श्री चैतन्य महाप्रभु जयंती, लक्ष्मी जयंती, षडशीति संक्रांति (पुण्यकाल दोपहर 12:36 से सूर्यास्त तक) विशेष- प्रतिपदा को कुष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) रंगों में प्रयुक्त रसायनों का स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव रासायनिक रंग मुख्यतः इंजन आयल के साथ आक्सीडाइज्ड धातु या औद्योगिक वर्णकों (डाई) के साथ मिला कर तैयार किये जाते हैं ।जैसेः- काला रंग– लेड आक्साइड  —   गुर्दे की बीमारी हरा रंग – कॉपर सल्फेट – आँखों में जलन, सूजन,  अस्थायी अंधत्व सिल्वर रंग – एल्युमिनियम ब्रोमाइड – कैंसर. नीला रंग – प्रूशियन ब्लू – ‘कान्टेक्ट डर्मेटाइटिस’ नामक भयंकर त्वचारोग. लाल रंग – मरक्यूरी सल्फाइट – त्वचा का कैंसर. अतः होली खेलें परंतु रासायनिक रंगों से नहीं प्राकृतिक रंगों से, जिन्हें आप घर पर आसानी से बना सकते हैं । प्राकृतिक रंग बनाने की सरल विधियाँ केसरिया रंगः पलाश के फूलों से यह रंग सरलता से तैयार किया जा सकता है । पलाश के फूलों को रात को पानी में भिगो दें । सुबह इस केसरिया रंग को ऐसे ही प्रयोग में लायें या उबालकर होली का आनंद उठायें । यह रंग होली खेलने के लिए सबसे बढ़िया है । शास्त्रों में भी पलाश के फूलों से होली खेलने का वर्णन आता है । इसमें औषधिय गुण होते हैं । आयुर्वेद के अनुसार यह कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, मूत्रकृच्छ, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है । रक्तसंचार को नियमित व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ ही यह मानसिक शक्ति तथा इच्छाशक्ति में भी वृद्धि करता है । सूखा हरा रंगः मेंहदी या हिना का पाउडर तथा गेहूँ या अन्य अनाज के आटे को समान मात्रा में मिलाकर सूखा हरा रंग बनायें । आँवला चूर्ण व मेंहदी को मिलाने से भूरा रंग बनता है, जो त्वचा व बालों के लिए लाभदायी है । सूखा पीला रंगः हल्दी व बेसन मिला के अथवा अमलतास व गेंदे के फूलों को छाया में सुखाकर पीस के पीला रंग प्राप्त कर सकते हैं । गीला पीला रंगः एक चम्मच हल्दी दो लीटर पानी में उबालें या मिठाइयों में पड़ने वाले रंग जो खाने के काम आते हैं, उनका भी उपयोग कर सकते हैं । अमलतास या गेंदे के फूलों को रात को पानी भिगोकर रखें, सुबह उबालें । लाल रंगः लाल चंदन (रक्त चंदन) पाउडर को सूखे लाल रंग के रूप में प्रयोग कर सकते हैं । यह त्वचा के लिए लाभदायक व सौंदर्यवर्धक है। दो चम्मच लाल चंदन एक लीटर पानी में डालकर उबालने से लाल रंग प्राप्त होता है, जिसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलायें ।

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