Enable Notifications OK No thanks

जन्म कुंडली में स्थित किस दोष के कारण होते हैं पिता और पुत्र में मतभेद

पिता पुत्र में टकराव के ज्योतिष कारण और उपाय

पिता-पुत्र के संबंधों में टकराव का कारण केवल मानसिकता या परिस्थितियाँ ही नहीं, बल्कि जन्म कुंडली में छिपी ग्रहों की द्वंद्वात्मक स्थिति और पूर्व जन्म के कर्मफल भी होते हैं।

भृगु नाड़ी ज्योतिष में विश्लेषण ग्रहों के संबंध और वेद से होता है,

विशेषकर:सूर्य = पिता, चंद्र = माता, मंगल = संतान/पुत्र, शनि = पीढ़ी टकराव

सूर्य के बाद मंगल या शनि हों, तो पिता और पुत्र के बीच अहम टकराव, अलग दृष्टिकोण और संघर्ष

मंगल, सूर्य को वेध दे तो पुत्र का व्यवहार आक्रामक या असहमति पूर्ण हो सकता है

शनि सूर्य को वेध दे = पीढ़ी संघर्ष, नई और पुरानी पीढ़ी दरमियान सोच की टकराहट

इस स्थिति में पिता को लगता है पुत्र सम्मान नहीं देता, और पुत्र को लगता है पिता दबाव डालते हैं

जैमिनी पद्धति से – पिता-पुत्र संबंध

पिता का कारक = सूर्य पुत्र का कारक = मंगल पुत्र के लिए जातक का पंचम भाव, और पिता के लिए नवम भाव सूर्य पर राहु या शनि की दृष्टि हो → पिता से दूरी या अहंकार टकराव ( आत्मकारक ) और पंचमेश / मंगल में संबंध न हो → पुत्र की बात को आत्मा स्वीकार नहीं करती, नवम पर पाप दृष्टि हो या निर्बल हो → पिता का अपमान या अशांत संबंध

पिता-पुत्र टकराव के मुख्य ज्योतिषीय संकेत

सूर्य – शनि युति या दृष्टि | सम्मान बनाम अहंकार की लड़ाई

मंगल – सूर्य द्वंद्व , क्रोध, गुस्सा, टकराव पंचम भाव पीड़ित |

संतान के साथ मतभेद आत्म कारक और पितृ कारक में द्वेष |

आत्मिक दूरी, पूर्व जन्म कर्म फल ( अरुढ नवम ) पर पाप दृष्टि |

परिवार और संबंध में अशांति

ज्योतिषीय उपाय – पिता-पुत्र संबंध सुधार के लिए सूर्य शांति उपाय (पिता के लिए):– प्रतिदिन सूर्योदय में जल चढ़ाएं– ॐ घृणि सूर्याय नमः का 108 बार जप– रविवार को गेहूं, लाल वस्त्र, गुड़ का दान |

मंगल शांति उपाय (पुत्र के लिए):– मंगलवार को हनुमान जी का दर्शन और ॐ अंगारकाय नमः का जप– रक्तदान करें (यदि स्वास्थ्य अनुकूल हो)– भाई, पिता या पुरुषों के साथ विनम्रता रखें |

शनि का सामंजस्य हेतु उपाय (यदि टकराव लम्बा चल रहा है):– ॐ शं शनैश्चराय नमः – शनिवार को– पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाना– पुराने वस्त्र या जूते दान करें |

मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास:शिव-पार्वती का पारिवारिक पूजन पारिवारिक एकता में अत्यंत सहायक है

आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ दोनों में सूर्य तत्व को सुदृढ़ करता है |

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
Scroll to Top