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Author name: Divam Astro World

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आज का पंचांग Panchang

दिनांक :-27फरवरी-2025 वार:-गुरुवार तिथी :-14चतुर्दशी:-08:55/30अमावस्या:-30:14 पक्ष :-कृष्णपक्ष माह:-फाल्गुनमास नक्षत्र :-धनिष्ठा:-15:43 योग:-शिव:-23:40 करण:-शकु:-08:55 चन्द्रमा:-कुम्भ सुर्योदय:-06:55 सुर्यास्त:-18:21 दिशा शुल…..दक्षिण निवारण उपाय:-दही का सेवन ऋतु :- शिशिर बसंत ऋतु गुलीक काल:-09:46से11:13 राहू काल:-14:07से15:34 अभीजित….12:17से13:03 विक्रम सम्वंत ………2081 शक सम्वंत …………1946 युगाब्द ………………5126 सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त चोघङिया दिन शुभ:-06:51से08:19तक चंचल:-11:13से12:40तक लाभ:-12:40से14:07तक अमृत:-14:07से15:34तक शुभ:-17:01से18:28तक चोघङिया रात अमृत:-18:28से20:01तक चंचल:-20:01से21:34तक लाभ:-00:39से02:12तक शुभ:-03:45से05:18तक अमृत:-05:18से06:51तक आज के विशेष योग वर्ष का 326वा दिन, देव पितृ अमावस्या, द्बापर युगादि, पंचक, शनि अस्त, बुध मीन में, अन्वाधान, माघी मासम् (द.भा.), मुनि वासुदेव पुज्यनाथ जयंती (जैन), शिवखप्पर पूजा पितृ दोष से मुक्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, ब्राह्मणों को भोजन, दान-पुण्य, और गीता का पाठ करे।

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आज का राशिफल

26 फरवरी 2025 बुधवार : आज क्या कहते हैं आपके सितारे जाने अपना राशिफल मेष Aries रोजगार मिलेगा। अप्रत्याशित लाभ होगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। विवाद न करें। नौकरी करने वालों को ऐच्छिक स्थानांतरण एवं पदोन्नति मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें। वृषभ Tauras फालतू खर्च होगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। वाणी पर नियंत्रण रखें। चिंता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। नवीन मुलाकातों से लाभ होगा। आमदनी बढ़ेगी। रुका धन मिलने से निवेश में वृद्धि होने के योग हैं। उदर संबंधी विकार हो सकते हैं। मिथुन Gemini विवाद से क्लेश होगा। शारीरिक कष्ट संभव है। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा सफल रहेगी। आपसी मतभेद, मनमुटाव बढ़ेगा। किसी से मदद की उम्मीद नहीं रहेगी। आर्थिक समस्या बनी रहेगी। व्यसनाधीनता से बचें। व्यापार, रोजगार मध्यम रहेगा। कर्क Cancer घर-बाहर तनाव रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। जल्दबाजी न करें। नई योजना बनेगी। नए अनुबंध होंगे। किसी मामले में कटु अनुभव मिल सकते हैं। सरकारी, कानूनी विवाद सुलझेंगे। जोखिम, लोभ, लालच से बचें। नया काम, व्यवसाय आदि की बात बनेगी। सिंह Leo धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। यात्रा सफल रहेगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। कानूनी बाधा दूर होकर लाभ होगा। पूँजी निवेश बढ़ेगा। पहले किए गए कार्यों का लाभदायी फल आज मिल सकेगा। संतान के कामों से खुशी होगी। व्यापार-व्यवसाय में तरक्की होगी। कन्या Vergo चोट, चोरी व विवाद आदि से हानि संभव है। पुराना रोग उभर सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। परिवार की स्थिति अच्छी रहेगी। रचनात्मक काम करेंगे। कर्मचारियों पर निगाह रखें। परिवार की समस्या का उचित समाधान होगा। तुला Libra शारीरिक कष्‍ट से बाधा संभव है। भागदौड़ रहेगी। घर-परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। राजकीय सहयोग मिलेगा। कार्यकुशलता सहयोग से लाभान्वित होंगे। काम में मन लगेगा। स्वयं का सोच अनुकूल रहेगा। रिश्तेदारों से संबंधों की मर्यादा बनाए रखें। वृश्चिक Scorpio चोट व रोग से बाधा संभव है। बेचैनी रहेगी। भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होगी। रोजगार मिलेगा। संतान के स्वास्थ्य में सुधार होगा। सोचे कामों में मनचाही सफलता मिलेगी। व्यापारिक निर्णय समय पर लेना होंगे। पुरानी बीमारी उभर सकती है। धनु Sagitarious पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग को सफलता मिलेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें। नए कार्यों, योजनाओं की चर्चा होगी। लाभदायी समाचार आएँगे। समाज में आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। साहस, पराक्रम बढ़ेगा। विश्वासप्रद माहौल रहेगा। मकर Capricorn पुराना रोग उभर सकता है। भागदौड़ रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। धैर्य रखें। अस्वस्थता बनी रहेगी। खुद के प्रयत्नों से ही जनप्रियता एवं सम्मान मिलेगा। रोजगार के क्षेत्र में संभावनाएँ बढ़ेंगी। स्थायी संपत्ति संबंधी खटपट हो सकती है। कुंभ Aquarius प्रयास सफल रहेंगे। प्रशंसा प्राप्त होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। लाभ होगा। व्यवसाय अच्छा चलेगा। कार्य क्षेत्र में नई योजनाओं से लाभ होगा। लगन, मेहनत का उचित फल मिल सकेगा। क्रोध एवं उत्तेजना पर संयम रखें। विवाद सुलझेंगे। मीन Pisces पुराने संगी-साथियों से मुलाकात होगी। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ होगा। परिश्रम का पूरा परिणाम मिलेगा। अच्छी व सुखद स्थितियाँ निर्मित होंगी। विरोधी आपकी छवि खराब करने का प्रयास कर सकते हैं। व्यावसायिक सफलता से मनोबल बढ़ेगा।

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आज का पंचांग

दिनांक:-26फरवरी:-2025 वार:-बुधवार तिथी :-13त्रयोदशी:-11:08 पक्ष:-कृष्णपक्ष माह:-फाल्गुन नक्षत्र:-श्रवण:-17:23 योग:-परिध:-26:57 करण:-वणिज:-11:08 चन्द्रमा:-मकर 28:36/कुम्भ सुर्योदय:-06:56 सुर्यास्त:-18:20 दिशा शुल….. उत्तर निवारण उपाय:-तिल का सेवन ऋतु :-शिशिर बसंत ऋतु गुलीक काल:-11:13से 12:40 राहू काल:-12:40से14:07 अभीजित…. नहीं है विक्रम सम्वंत ………2081 शक सम्वंत …………1946 युगाब्द ………………5126 सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त चोघङिया दिन लाभ:-06:52से08:19तक अमृत:-08:19से09:46तक शुभ:-11:13से12:40तक चंचल:-15:34से 17:01तक लाभ:-17:01से 18:28तक चोघङिया रात शुभ:-20:01से21:34तक अमृत :-21:34से23:07तक चंचल :-23:07से00:39तक लाभ :-03:45से05:18तक महाशिवरात्रि के दिन रामायण का पाठ करें।

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आज का दैनिक पंचांग

दिनांक – 25 फरवरी 2025 दिन – मंगलवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – द्वादशी दोपहर 12:47 तक तत्पश्चात त्रयोदशी नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा शाम 06:31 तक तत्पश्चात श्रवण योग – व्यतीपात सुबह 08:15 तक, तत्पश्चात वरीयान प्रातः 05:51 फरवरी 26 तक तत्पश्चात परिघ राहु काल – दोपहर 03:47 से शाम 05:14 तक सूर्योदय – 07:08 सूर्यास्त – 06:37 दिशा शूल – उत्तर दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:25 से 06:15 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 26 से रात्रि 01:17 फरवरी 26 तक व्रत पर्व विवरण – प्रदोष व्रत, त्रिपुष्कर योग (प्रातः 07:05 से दोपहर 12:47 तक) विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोइ) व त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) वसंत ऋतु में क्या न करें ? 1] खट्टे, मधुर, खारे, स्निग्ध (घी – तेल से बने), देर से पचनेवाले व शीतल पदार्थो का सेवन हितकर नहीं है, अत: इनका सेवन अधिक न करें । (अष्टांगह्रदय, चरक संहिता ) 2] नया गेहूँ व चावल, खट्टे फल, आलू, उड़द की दाल, कमल – ककड़ी, अरवी, पनीर, पिस्ता, काजू, शरीफा, नारंगी, दही, गन्ना, नया गुड़, भैस का दूध, सिंघाड़े, कटहल आदि का सेवन अहितकर है । 3] दिन में सोना, ओस में सोना, रात्रि–जागरण, परिश्रम न करना हानिकारक है । अति परिश्रम या अति व्यायाम भी न करें । 4] आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स व फ्रिज के ठंडे पानी का सेवन न करें । 5] एक साथ लम्बे समय तक बैठे या सोयें नहीं तथा अधिक देर तक व ठंडे पानी से स्नान न करें । प्रदोष व्रत – 25 फरवरी 2025 सूतजी कहते हैं – त्रयोदशी तिथि में सायंकाल प्रदोष कहा गया है । प्रदोषके समय महादेवजी कैलासपर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं । अतः धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की इच्छा रखनेवाले पुरुषों को प्रदोष में नियम पूर्वक भगवान् शिव की पूजा, होम, कथा और गुणगान करने चाहिये । दरिद्रता के तिमिर से अन्धे और भवसागर में डूबे हुए संसार भय से भीरु मनुष्यों के लिये यह प्रदोषव्रत पार लगानेवाली नौका है । भगवान् शिव की पूजा करने से मनुष्य दरिद्रता, मुर्त्यु-दुःख और पर्वत के समान भारी ऋण-भार को शीघ्र ही दूर कर के सम्पत्तियों से पूजित होता है।

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व्रत, पूजाविधि और विशेषताएं Method Of Worship

एकादशी व्रत में क्या करे, क्या ना करे?

दिनांक – 24 फरवरी 2025 दिन – सोमवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – एकादशी दोपहर 01:44 तक तत्पश्चात द्वादशी नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा शाम 06:59 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा योग – सिद्धि सुबह 10:05 तक, तत्पश्चात व्यतीपात राहु काल – सुबह 08:32 से सुबह 09:59 तक सूर्योदय – 07:09 सूर्यास्त – 06:36 दिशा शूल – पूर्व दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:26 से 06:16 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 25 से रात्रि 01:17 फरवरी 25 तक व्रत पर्व विवरण – विजया एकादशी, व्यतीपात योग (प्रातः 10:06 से प्रातः 8:15 फरवरी 25 तक) विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) व द्वादशी को पूतिका (पोइ) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) विजया एकादशी – 24 फरवरी 25 एकादशी में क्या करें, क्या न करें ? 1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें । 2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें । हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।**राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।**सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।**एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l 3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए । 4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें । 5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है । 6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें । 7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए । 8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए । 9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए । 10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है । 11. इस दिन बाल नहीं कटायें । 12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें । 13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) । 14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।

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रविवार विशेष पंचांग

दिनांक – 23 फरवरी 2025 दिन – रविवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – दशमी दोपहर 01:55 तक तत्पश्चात एकादशी नक्षत्र – मूल शाम 06:43 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा योग – वज्र सुबह 11:19 तक, तत्पश्चात सिद्धि राहु काल – शाम 05:13 से शाम 06:40 तक सूर्योदय – 07:09 सूर्यास्त – 06:36 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:27 से 06:16 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 24 से रात्रि 01:18 फरवरी 24 तक व्रत पर्व विवरण – महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 07:06 से शाम 6:43 तक) विशेष – दशमी कलंबी शाक त्याज्य है व एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) स्नान कैसे करना चाहिये ?? जहाँ से प्रवाह आता हो वहाँ पहले सिर की डुबकी मारें । घर में भी स्नान करे तो पहले जल सिर पर डालें…. पैरों पर पहले नहीं डालना चाहिए । शीतल जल सिर को लगने से सिर की गर्मी पैरों के तरफ जाती है । और जहाँ जलाशय है, स्थिर जल है वहाँ सूर्य पूर्वमुखी होकर स्नान करें । घर में स्नान करें तो उस बाल्टी के पानी में जौ और तिल अथवा थोड़ा गोमूत्र अथवा तीर्थोद्क पहले (गंगाजल आदि) डाल कर फिर बाल्टी भरें तो घर में भी तीर्थ स्नान माना जायेगा । रविवार विशेष रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90) रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75) रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है । रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए । स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं । रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है । रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।

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ब्लॉग Blogs

मंगलदोष (Mars)

जन्म कुंडली में मंगल दोष और इसके परिहार Bhavanaji Blog – भावनाजीका ब्लॉग ज्योतिष शास्त्र अनुसार जन्म कुंडली के पहले, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल की स्थिति होने पर जातक या जातिका को मांगलिक कहा जाता है। यह मंगल दोष लग्न कुंडली के इलावा चंद्र और शुक्र कुंडली से भी देखा जाता है। और फिर उस हिसाब से मंगल दोष परिहार यानी विवाह हेतु उस तरह की कुंडली देखी जाती है जिसके माध्यम से मंगल दोष परिहार हो जाए। जैसे कि मांगलिक लड़के , लड़की का विवाह मांगलिक लड़के , लड़की से ही किया जाता है। इसी तरह ऐसा भी विचार है दोनों में से किसी एक की कुंडली में जिस भाव में मंगल हो उस भाव में दूसरे की कुंडली में अशुभ ग्रह आने से भी मंगल दोष का परिहार हो जाता है। जन्म कुंडली में शुभ और बलवान चंद्रमा या शुक्र केंद्र में होने से मंगल दोष परिहार होता है। जन्म कुंडली में मंगल अस्त हो तो भी मंगल दोष का परिहार होता है। जन्म कुंडली में मंगल अपनी या उच्च राशि में हो तो भी मंगल दोष का परिहार होता है। जन्म कुंडली में मंगल पर गुरु की दृष्टि होने से या फिर मंगल राहु युति होने पर भी मंगल दोष का परिहार होता है। जन्म कुंडली में पहले, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या बाहरवें भाव में शनि होने से भी मंगल दोष का परिहार होता है।अगर आप मंगल दोष से निजात पाना चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन लाल रंग की चीजें जैसे मसूर दाल, लाल मिर्च, लाल रंग की मिठाई, लाल रंग का वस्त्र आदि दान करें। हर मंगलवार के दिन स्नान-ध्यान के बाद हनुमान जी की पूजा करें। इस समय हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके बाद हनुमान जी के चरणों में सिंदूर अर्पित करें। मांगलिक जातक मंगलवार के दिन बाग या गार्डन में अशोक के पेड़ लगाएं। इस उपाय को करने से भी मंगल दोष दूर होता है। मंगल दोष कि शांति के लिए तंदूर में बनी मीठी रोटी मंगलवार के दिन किसी पक्षी या जानवर को खाने को दें।

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आज का पंचांग

दिनांक – 22 फरवरी 2025 दिन – शनिवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – नवमी दोपहर 01:19 तक तत्पश्चात दशमी नक्षत्र – ज्येष्ठा शाम 05:40 तक तत्पश्चात मूल योग – हर्षण दोपहर 11:56 तक, तत्पश्चात वज्र राहु काल – सुबह 10:00 से सुबह 11:27 तक सूर्योदय – 07:10 सूर्यास्त – 06:35 दिशा शूल – पूर्व दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:27 से 06:17 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 23 से रात्रि 01:18 फरवरी 23 तक व्रत पर्व विवरण – समर्थ रामदासजी नवमी विशेष – नवमी को लौकी खाना गौमाँस के समान त्याज्य है व दशमी कलंबी शाक त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण) 🔹शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🔹 🔸शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण) 🔸हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण) 🔸आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔸 एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।   

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आज का पंचांग

दिनांक – 21 फरवरी 2025 दिन – शुक्रवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – अष्टमी दोपहर 11:57 तक तत्पश्चात नवमी नक्षत्र – अनुराधा दोपहर 03:54 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा योग – व्याघात दोपहर 11:59 तक, तत्पश्चात हर्षण राहु काल – सुबह 11:27 से दोपहर 12:53 तक सूर्योदय – 07:11 सूर्यास्त – 06:35 दिशा शूल – पश्चिम दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:28 से 06:18 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 22 से रात्रि 01:18 फरवरी 22 तक व्रत पर्व विवरण – जानकी जयंती, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 07:08 से दोपहर 03:54 तक) विशेष – नवमी को लौकी खाना गौमाँस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 🔹अंतःकरण के दोष व उनकी निवृत्ति🔹 🔸(१) चंचलता : सत्य अथवा स्थिर तत्त्व से योग न होने के कारण मन में चंचलतारूपी दोष है, इसीसे अंदर दुर्बलता रहा करती है । 🔸जगत के देहादिक असत् पदार्थों एवं विषय-सुखों से वैराग्य दृढ होने पर जब अभ्यास के द्वारा एक सत्य आधार में मन स्थिर होता है, तभी इस दोष की निवृत्ति होती है । 🔸(२) मलिनता : चित्त में असत् संबंध के कारण असत् चिंतन होते रहने से मलिनतारूपी दोष है, इसीसे खिन्नता रहा करती है । 🔸मन के स्थिर होने पर एक ‘सत् पदार्थ के चिंतन में जब चित्त तल्लीन होता है तभी यह दोष दूर होता है । 🔸(३) अज्ञान : बुद्धि में आत्मज्ञानी संतपुरुष का संग (सत्संग) न मिलने के कारण अज्ञानरूपी दोष है, इसीसे मनुष्य में मूढता रहा करती है । 🔸मन तथा चित्त के स्थिर और शुद्ध होने पर ही मानव-बुद्धि स्वस्थ एवं शांत होकर संत, सद्गुरुदेव से, सुसंग से सद्ज्ञान-प्रकाशपूर्ण होती है । इसीसे अज्ञानरूपी दोष का नाश होता है । 🔸(४) ममता : अहं में देहादिक पदार्थों के प्रति ममतारूपी दोष है । इसीके कारण आसक्ति एवं जड़ता रहा करती है । 🔸सद्ज्ञान-प्रकाश में ही अहं का मिथ्या पदार्थों के प्रति अहमन्यता (अहंता-इदंता) रूपी दोष सत्स्वरूपाभिमान में परिणत हो जाता है, इसीसे जड़तारूपी दोष की निवृत्ति होती है ।

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गुरुवार विशेष पंचांग

दिनांक – 20 फरवरी 2025 दिन – गुरुवार विक्रम संवत् – 2081 अयन – उत्तरायण ऋतु – बसन्त मास – फाल्गुन पक्ष – कृष्ण तिथि – सप्तमी प्रातः 09:58 तक तत्पश्चात अष्टमी नक्षत्र – विशाखा दोपहर 01:30 तक तत्पश्चात अनुराधा योग – ध्रुव प्रातः 11:34 तक, तत्पश्चात व्याघात राहु काल – दोपहर 02:20 से दोपहर 03:46 तक सूर्योदय – 07:12 सूर्यास्त – 06:34 दिशा शूल – दक्षिण दिशा में ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:28 से 06:18 तक अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:30 से दोपहर 01:16 तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:28 फरवरी 21 से रात्रि 01:18 फरवरी 21 तक व्रत पर्व विवरण – शबरी जयंती, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, सर्वार्थसिद्धि योग (दोपहर 01:30 से प्रातः 07:08 फरवरी 21 तक) विशेष – अष्टमी को नारियल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 🔹गुरुवार विशेष 🔹 🔸हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के मन में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है । 🔸गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें 🔸एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।*   *ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः । फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें । 🔸गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है । 🔸गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।अपनी जन्म कुंडली के भाग्य स्थान को करें जागृत!

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