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Author name: Divam Astro World

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आज का दैनिक पंचांग Panchang

दिनांक:- 8 सितंबर 2025, सोमवार, Monday — 🌄 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय 🌄 — सूर्योदय – 06:03 चन्द्रोदय – 18:58 सूर्यास्त – 18:34 चन्द्रास्त – 06:24 — पञ्चाङ्ग — तिथि – प्रतिपदा – 21:11 तक योग – धृति – 06:30 तक वार – सोमवार पक्ष – कृष्ण पक्ष नक्षत्र – पूर्व भाद्रपद – 20:02 तक करण – बालव – 10:27 तक — 🌙 चन्द्र मास एवं सम्वत 🌙 — शक सम्वत – 1947 विश्वावसु विक्रम सम्वत – 2082 कालयुक्त गुजराती सम्वत – 2081 नल चन्द्रमास – आश्विन – पूर्णिमान्त — राशि तथा नक्षत्र — चन्द्र राशि – कुम्भ – 14:29 तक सूर्य राशि – सिंह सूर्य नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी सूर्य नक्षत्र पद – पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पद – पूर्व भाद्रपद – 08:54 तक — ऋतु और अयन — द्रिक ऋतु – शरद वैदिक ऋतु – वर्षा द्रिक अयन – दक्षिणायण वैदिक अयन – दक्षिणायण दिनमान – 12 घण्टे 31 मिनट्स 51 सेकण्ड्स रात्रिमान – 11 घण्टे 28 मिनट्स 37 सेकण्ड्स मध्याह्न – 12:18 — अन्य कैलेंडर — कलियुग – 5126 वर्ष कलि अहर्गण – 1872461 दिन जूलियन दिनाङ्क – अगस्त 26, 2025 सीई राष्ट्रीय नागरिक दिनाङ्क – भाद्रपद 17, 1947 शक राष्ट्रीय निरयण दिनाङ्क – भाद्रपद 24, 1947 शक लाहिरी अयनांश – 24.222634 राटा डाई – 739502 जूलियन दिन – अगस्त 26, 2025 सीई संशोधित जूलियन दिन – 60926 दिन — शुभ समय — ब्रह्म मुहूर्त – 04:31 से 05:17प्रातः सन्ध्या – 04:54 से 06:03 अभिजित मुहूर्त – 11:53 से 12:44 विजय मुहूर्त – 14:24 से 15:14 गोधूलि मुहूर्त – 18:34 से 18:57 सायाह्न सन्ध्या – 18:34 से 19:43 अमृत काल – 12:35 से 14:04 निशिता मुहूर्त – 23:56 से 00:42, सितम्बर 09 — अशुभ समय — राहुकाल – 07:37 से 09:11 यमगण्ड – 10:45 से 12:18 आडल योग – 06:03 से 20:02 विडाल योग – 20:02 से 06:03, सितम्बर 09 गुलिक काल – 13:52 से 15:26 दुर्मुहूर्त – 12:44 से 13:34 वर्ज्य – 04:52, सितम्बर 09 से 06:20, सितम्बर 09 बाण – रज – 20:35 से पूर्ण रात्रि तक पञ्चक – पूरे दिन — पंचक रहित — शुभ मुहूर्त – 06:03 से 06:45 रज पञ्चक – 06:45 से 09:01 शुभ मुहूर्त – 09:01 से 11:20 चोर पञ्चक – 11:20 से 13:39 शुभ मुहूर्त – 13:39 से 15:43 रोग पञ्चक – 15:43 से 17:25 शुभ मुहूर्त – 17:25 से 18:53 मृत्यु पञ्चक – 18:53 से 20:02 अग्नि पञ्चक – 20:02 से 20:18 शुभ मुहूर्त – 20:18 से 21:11 मृत्यु पञ्चक – 21:11 से 21:53 अग्नि पञ्चक – 21:53 से 23:48 शुभ मुहूर्त – 23:48 से 02:03, सितम्बर 09 रज पञ्चक – 02:03, सितम्बर 09 से 04:23, सितम्बर 09 शुभ मुहूर्त – 04:23, सितम्बर 09 से 06:03, सितम्बर 09 — उदय लग्न — सिंह – 04:27 से 06:45 कन्या – 06:45 से 09:01 तुला – 09:01 से 11:20 वृश्चिक – 11:20 से 13:39 धनु – 13:39 से 15:43 मकर – 15:43 से 17:25 कुम्भ – 17:25 से 18:53 मीन – 18:53 से 20:18 मेष – 20:18 से 21:53 वृषभ – 21:53 से 23:48 मिथुन – 23:48 से 02:03, सितम्बर 09 कर्क – 02:03, सितम्बर 09 से 04:23, सितम्बर 09

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चन्द्र ग्रहण विशेष (2)

चन्द्र ग्रहण का प्रभाव 07 सितम्बर 2025 के चन्द्र ग्रहण का बारह राशियों पर प्रभाव मेष चन्द्रग्रहण के प्रभाव से विवादों से छुटकारा मिल सकता है। आपकी राशि से एकादश भाव में पड़ने वाला यह ग्रहण आपकी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ रखेगा। व्यापार में उन्नति होगी। दोस्तों से कुछ नाराजगी हो सकती है। उच्चाधिकारियों के सामने आपकी छवि सुधरेगी। किसी बीमार परिजन की सेहत में सुधार होगा। समाधान: महामृत्युञ्जय मन्त्र का जप आपको परेशानियों से मुक्त रखेगा। वृषभ कार्यक्षेत्र में आपके विरुद्ध लोग सक्रिय हो सकते हैं। बड़े कार्य आपके हाथ से निकल सकते हैं। उच्च अधिकारी आपके ऊपर हावी होने का प्रयास करेंगे। पिता की सेहत का ध्यान रखना होगा। राजनीति से जुड़े लोगों को अच्छी सफलता मिल सकती है। समाधान: ग्रहण काल के दौन अपने गुरु मन्त्र का जप करें। मिथुन आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी होगी। धैर्यवान होकर कार्य करें। सरकारी कार्यों में अवरोध उत्पन्न होने की आशंका रहेगी। तकनीक शिक्षा में सफलता मिलने के योग प्रबल हैं। स्थायी सम्पत्ति सम्बन्धित मामले सुलझ सकते हैं। धर्म-कर्म में विशेष रुचि लेंगे। समाधान: “ॐ सों सोमाय नमः।” का जप करें। कर्क आपकी राशि से अष्टम भाव में चन्द्रग्रहण प्रभाव डालेंगे। स्वास्थ्य सम्बन्धी कष्ट बढ़ सकते हैं। कोई शोक समाचार मिल सकता है। शोध कार्यों से जुड़े लोगों को नयी उपलब्धि मिल सकती है। लम्बी दूरी की यात्राओं से बचना चाहिये। मन तनाव और आशंकाओं से घिरा हो सकता है। समाधान: ग्रहण के अगले दिन सुबह उड़द की दाल और चावल का दान करें। सिंह चन्द्रग्रहण का प्रभाव सामान्य रहेगा। प्रतियोगी परीक्षा में उत्तम परिणाम मिल सकते हैं। व्यापार में कुछ नये बदलाव कर सकते हैं। किन्तु मिथ्या अहंकार से बचने का प्रयास करें। जीवनसाथी को सेहत सम्बन्धी परेशानी हो सकती है। विवादों का निपटारा करने में सफलता मिलेगी। समाधान: ग्रहण से 9 घण्टे पूर्व भोजन और जल में तुलसीदल डाल दें। कन्या चन्द्रग्रहण का प्रभाव आपकी राशि से षष्ठम् भाव पर पड़ने वाला है। यह ग्रहण आपको करियर में शानदार मौके उपलब्ध करायेगा। कानूनी मामलों में विजय मिलने के योग बन रहे हैं। आप अपने शत्रुओं पर भारी पड़ेंगे। भविष्य को लेकर महत्त्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। समाधान: भगवान विष्णु के मन्त्रों का जप करें। तुला शेयर बाजार और वित्तीय मामलों में व्यापक उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में चाकू, सुई और धारदार वस्तुओं से दूरी बनाकर रखनी चाहिये। पाचन विकार बढ़ सकते हैं। प्रेम सम्बन्धों में संवादहीनता उत्पन्न होने की आशंका है। पुराने मामले दोबारा उलझ सकते हैं। सन्तान को लेकर चिन्ता हो सकती है। समाधान: ग्रहण के दिन कौओं को मीठे चावल खिलायें। वृश्चिक नयी सम्पत्ति और वाहन में निवेश कर सकते हैं। हृदय रोगियों को अगले तीन-महीने विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिये। उच्च पद की इच्छा और आकांक्षा रहेगी। माता का स्वास्थ्य परेशानी का कारण बन सकता है। अनावश्यक बातों को तूल न दें। सोचे हुए कार्य तय समय पर पूरे नहीं होंगे। समाधान: प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने से कुछ राहत मिलेगी। धनु नये व्यापारिक समझौते हो सकते हैं। रुके हुये कार्य इस ग्रहण के प्रभाव में दोबारा शुरू हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति मिल सकती है। मेहनत का सकारात्मक परिणाम प्राप्त होगा। महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बना सकते हैं। अगले तीन महीने का समय नये अवसरों को पहचानने का है। समाधान: चींटियों को आटे और शक्कर खिलायें। मकर व्यर्थ के खर्चों से आपकी आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। दाँतों और आँखों में कुछ समस्या आ सकती है। परिजनों के व्यवहार से असन्तुष्ट होंगे। गलत माध्यमों से धन कमाने की प्रवृत्ति नुकसानदेह होगी। धन के उधार लेन-देन से बचना चाहिये। किसी परिजन को स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। जोखिम भरे निवेश लाभकारी सिद्ध होंगे। समाधान: ग्रहण के बाद किसी ब्राह्मण को धन और अन्न का दान करें। कुम्भ चन्द्रग्रहण आपकी ही राशि में घट रहा है। इसके कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है। तन्त्र और अध्यात्म में रुचि ले सकते हैं। भावनात्मक फैसले लेने से बचें। करियर को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। अनुसन्धानात्मक कार्यों के प्रति झुकाव बढ़ेगा। अपने से बड़ों की बातों का निरादर न करें। आत्मविश्वास में कमी हो सकती है। समाधान: ग्रहण के बाद श्वेत वस्त्र और चावल का दान करें। मीन दिखावटी जीवनशैली से बचें। एकाग्रचित्त होने में सफलता मिलेगी। दाम्पत्य जीवन में सम्बन्ध प्रगाढ़ होंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारियाँ बढ़ने वाली हैं। किसी को धन उधार न दें। रात्रि में बुरे स्वप्न आ सकते हैं। मन में बहुत सारे विचारों का प्रवाह रहेगा। किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेने का संकल्प मन में उदित होगा। सन्तान की सेहत का ध्यान रखें। समाधान: “नमः शिवाय।” मन्त्र का ग्रहण काल के दौरान जप करें।

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चंद्र ग्रहण विशेष (1)

वैदिक ज्योतिष शोध संस्थान ७–८ सितम्बर २०२५ का पूर्ण चन्द्र ग्रहण: वैज्ञानिक तथ्य, आचार–विचार, मंत्र–दान और बारह राशियों पर विस्तृत प्रभावतिथि, प्रकार, दृश्यता और समय (IST)यह पूर्ण चन्द्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse / Blood Moon) आज रविवार, 7 सितम्बर 2025 की रात भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत में स्थानीय समयानुसार प्रमुख पड़ाव: पेनुमbral प्रारम्भ: 8:58 PM, 7 सितम्बरपूर्णता (Totality): 11:00 PM – 12:22 AM (8 सितम्बर)अधिकतम (मैक्सिमम): लगभग 11:41 PMपेनुमbral समाप्ति: 2:25 AM, 8 सितम्बर। Time and Dateयह ग्रहण एशिया, अफ्रीका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया से व्यापक रूप से दृश्य है; वैश्विक विवरण के अनुसार यह हाल के वर्षों में सबसे व्यापक रूप से दिखने वाले चन्द्र ग्रहणों में है। Time and DateNASA/Science पृष्ठ भी 7 सितम्बर 2025 को होने वाले इस टोटल लूनर एक्लिप्स की पुष्टि करता है। NASA Scienceनोट (परम्परा): भारत में अनेक लोग चन्द्र ग्रहण से लगभग ९ घंटे पूर्व सूतक मानते हैं (परम्परागत धार्मिक मान्यता)। समय–तिथियाँ स्थानानुसार/पंचांगानुसार भिन्न बताई जा सकती हैं; सूतक की यह परम्परा आज भी कई प्रकाशनों में उल्लिखित है। Indiatimesवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य (संक्षेप)जब पृथ्वी सूर्य और चन्द्रमा के बीच आकर चन्द्रमा पर अपनी उम्ब्रा छाया डालती है, तब पूर्ण चन्द्र ग्रहण होता है। पृथ्वी का वायुमण्डल नीली तरंगदैर्घ्य अधिक बिखेर देता है और लाल प्रकाश चन्द्रमा तक पहुँचता है—इसी से Blood Moon का लालिमा–वर्ण दिखता है। (अवलोकन हेतु सुरक्षित; सौर ग्रहण की तरह किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं।) Time and Dateग्रहण–काल में अनुशंसित आचरण (धार्मिक दृष्टि)यथाशक्ति मंत्र–जप, ध्यान, स्तोत्र–पाठ करें; ग्रहण–काल का जप अनेक परम्पराओं में अत्यंत फलदायी माना गया है। गर्भवती महिलाओं, वृद्धों व रोगियों के लिए अनावश्यक परिश्रम/तनाव से बचने की सलाह दी जाती है (यह सांस्कृतिक–धार्मिक अनुशंसा है, चिकित्सकीय सलाह नहीं)।सूतक/ग्रहण–काल में नव–भोजन, मांगलिक कर्म, अग्नि–आहुति आदि से परहेज़ की परम्परा भी प्रचलित है। Indiatimesग्रहण–काल में प्रचलित मंत्र (सर्व–राशि हेतु)महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यंबकं यजामहे… (आरोग्य–शांति के लिए)ॐ नमः शिवाय (मन–शुद्धि व चित्त–स्थिरता)चन्द्र गायत्री: ॐ क्षीरोदन्वत् समभूताय नमः / ॐ चन्द्राय विद्महे सोमराजाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्ग्रहणोत्तर शुद्धि एवं दानग्रहण के बाद स्नान/आचमन, घर–आसन की शुद्धि (गंगाजल/स्वच्छ जल) और दीप–धूप।दान: अन्न, तिल, वस्त्र, फल, गौ–सेवा/अन्न–सेवा, रोगियों/ज़रूरतमंदों की सहायता—परम्परानुसार ग्रहणोत्तर दान को अत्यन्त पुण्यकारी माना गया है। Indiatimesराशिवार विस्तृत प्रभाव, उपाय–मंत्र और दानज्योतिषीय विचार में इस ग्रहण का मुख्य प्रभाव कुम्भ राशि–क्षेत्र पर पड़ता है; नीचे दिए संकेत चन्द्र ग्रहण के सामूहिक/सामान्य फल हैं। व्यक्तिगत जन्म–कुण्डली, गोचर–दशा और देश–काल–पत्नीकरक आदि के अनुसार फल परिवर्तित हो सकते हैं। 1) मेष प्रभाव (लाभ भाव): नये सम्पर्क–अवसर, परन्तु पुराने मित्र/नेटवर्क में मतभेद सम्भव; मानसिक चंचलता। उपाय–मंत्र: ॐ चन्द्राय नमः, ॐ नमः शिवाय। दान: लाल वस्त्र, गुड़, मसूर, ताँबे का दान। 2) वृष प्रभाव (दशम भाव): कार्यस्थल पर उतार–चढ़ाव, वरिष्ठों से संवाद–सामंजस्य की परीक्षा; निर्णय धैर्य से लें। उपाय–मंत्र: ॐ नमः शिवाय, ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। दान: चावल, दही, सफेद तिल/वस्त्र। 3) मिथुन प्रभाव (भाग्य भाव): यात्राएँ/धार्मिक योजनाएँ स्थगित; गुरु–पितृ विषय में सावधानी; भाग्य–फल मिश्रित। उपाय–मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। दान: हल्दी, पीली दाल, पीला वस्त्र व गुड़। 4) कर्क प्रभाव (अष्टम भाव): आकस्मिक व्यय/उतार–चढ़ाव; स्वास्थ्य–सावधानी; वाहन/उपकरण में सतर्कता। उपाय–मंत्र: महामृत्युंजय जप, ॐ रुद्राय नमः। दान: काले तिल, तेल, अन्न। 5) सिंह प्रभाव (सप्तम भाव): दाम्पत्य/साझेदारी में संवेदनशीलता; संवाद–मर्यादा रखें, समझौतावादी रवैया हितकर। उपाय–मंत्र: ॐ नमः शिवाय, ॐ सूर्याय नमः। दान: गेहूँ, गुड़, लाल वस्त्र। 6) कन्या प्रभाव (षष्ठ भाव): ऋण–शत्रु–रोग विषय में सजग रहें; रूटीन/डायट सुधारें, विवाद टालें। उपाय–मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। दान: मूँग, हरी सब्ज़ियाँ, दही। 7) तुला प्रभाव (पंचम भाव): शिक्षा/एकाग्रता में विघ्न; प्रेम–सम्बन्ध/संतान विषय में धैर्य; सृजनात्मकता को संरचना दें। उपाय–मंत्र: ॐ क्लीं कृष्णाय नमः या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। दान: दूध, मिश्री, श्वेत पुष्प, चावल। 8) वृश्चिक प्रभाव (चतुर्थ भाव): गृह–शांति/माता–स्वास्थ्य पर ध्यान; जायदाद/वाहन–निर्णयों में विलम्ब हितकर। उपाय–मंत्र: ॐ चन्द्राय नमः, ॐ नमः शिवाय। दान: श्वेत तिल, चावल, दूध/रजत–दान (सामर्थ्यानुसार)। 9) धनु प्रभाव (तृतीय भाव): यात्राओं/कम्यूनीकेशन–कार्य में व्यवधान; सहोदर/टीम–मेलजोल में संयम। उपाय–मंत्र: ॐ बृहस्पतये नमः, ॐ नमः शिवाय। दान: पीला वस्त्र, हल्दी, पीली दाल। 10) मकर प्रभाव (द्वितीय भाव): वाणी–संयम आवश्यक; अनियोजित व्यय/निवेश से बचें; परिवार–संवाद को प्राथमिकता दें। उपाय–मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः, ॐ शनैश्चराय नमः। दान: काला तिल, तिल–तेल, अन्न/अन्नक्षेत्र–सेवा। 11) कुम्भ प्रभाव (लग्न भाव): स्वास्थ्य–ऊर्जा/निर्णय–क्षमता पर सीधा प्रभाव; अति–प्रतिक्रिया से बचें, दिनचर्या साधें। उपाय–मंत्र: महामृत्युंजय जप, ॐ चन्द्राय नमः। दान: श्वेत वस्त्र, चावल, दही, श्वेत पुष्प। 12) मीन प्रभाव (व्यय/द्वादश भाव): अनावश्यक खर्च/अनिद्रा; विदेश–संबंधी कार्यों में विलम्ब; ध्यान/जप से मन–स्थिरता। उपाय–मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। दान: काला वस्त्र/तिल, अन्न; रोगी–सेवा/निराश्रित सहायता शुभ। संक्षिप्त अनुशंसाएँ (सभी के लिए)आज 11:00 PM–12:22 AM (पूर्णता–वेला) में जप/ध्यान का विशेष संकल्प लें; अधिकतम के आसपास (लगभग 11:41 PM) मन को एकाग्र करें। Time and Dateग्रहणोत्तर स्नान–शुद्धि, दीप–धूप, इष्ट–स्मरण तथा अन्न–वस्त्र–तिल–फल का दान करें। (परम्परागत मान्यता)

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आज का दैनिक राशिफल Rashifal

आज का दैनिक राशिफल Aaj ka dainik rashifal (06-09-2025) Daily Rashifal,Daily Horoscope,Astrology मेष06-09-2025 ♈ मेष :आज मेहनत और आत्मविश्वास से काम पूरे होंगे। करियर में नई जिम्मेदारी मिल सकती है, जिसे आप सफलतापूर्वक निभाएँगे। व्यवसायियों को प्रतियोगिता से गुजरना पड़ेगा लेकिन आप जीत हासिल करेंगे। परिवार में सामंजस्य बना रहेगा। प्रेम संबंधों में विश्वास गहरा होगा। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। सेहत को नजरअंदाज न करें, समय पर आराम करें। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 5 भाग्यशाली रंग: लाल वृष 06-09-2025 ♉ वृषभ :आज आपको धैर्य और विवेक से निर्णय लेने की आवश्यकता है। नौकरी में सहकर्मी आपका सहयोग करेंगे। व्यापार में धन लाभ संभव है, लेकिन सोच-समझकर निवेश करें। पारिवारिक जीवन सामान्य रहेगा। दांपत्य जीवन में सामंजस्य बनाए रखें। आर्थिक मामलों में संतुलन जरूरी है। सेहत अच्छी रहेगी लेकिन खानपान पर ध्यान दें। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 8 भाग्यशाली रंग: सफेद मिथुन 06-09-2025 ♊ मिथुन :आज का दिन अवसरों से भरा रहेगा। नौकरी में नए प्रस्ताव मिल सकते हैं। व्यापार में नए संपर्क बनेंगे और लाभ होगा। परिवार में सुख और शांति बनी रहेगी। विद्यार्थियों को शिक्षा में सफलता मिलेगी। प्रेम संबंध मजबूत होंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण भाग्यशाली संख्या: 3 भाग्यशाली रंग: हरा कर्क 06-09-2025 ♋ कर्क :आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। सेहत में सुधार होगा। मानसिक शांति बनी रहेगी। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 6 भाग्यशाली रंग: नीला सिंह 06-09-2025 ♌ सिंह :आज आपका साहस और आत्मबल बढ़ेगा। नौकरी में उन्नति के अवसर मिलेंगे। व्यापार में अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। प्रेम संबंधों में नजदीकियाँ बढ़ेंगी। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 9 भाग्यशाली रंग: सुनहरा कन्या06-09-2025 ♍ कन्या :आज का दिन मेहनत और समर्पण से सफलता दिलाएगा। नौकरी में प्रमोशन या मान-सम्मान मिलने के योग हैं। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में आपसी प्रेम बढ़ेगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। धन लाभ के योग हैं। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 7 भाग्यशाली रंग: हरा तुला 06-09-2025 ♎ तुला :आज आपके आत्मविश्वास और धैर्य की परीक्षा होगी। नौकरी में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में प्रगति होगी। परिवार में प्रेम और आपसी तालमेल बढ़ेगा। दांपत्य जीवन मधुर रहेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 2 भाग्यशाली रंग: गुलाबी वृश्चिक 06-09-2025 ♏ वृश्चिक :आज काम में नए अवसर मिलेंगे। व्यापार में साझेदारी से लाभ होगा। परिवार में रिश्तों में नजदीकियां बढ़ेंगी। प्रेम संबंधों में सकारात्मकता रहेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, लापरवाही न करें। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 4 भाग्यशाली रंग: बैंगनी धनु 06-09-2025 ♐ धनु :आज का दिन योजनाओं को सफल बनाने वाला होगा। नौकरी में पदोन्नति के योग हैं। व्यापार में बड़ा लाभ होगा। परिवार में आनंद का माहौल रहेगा। प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 1 भाग्यशाली रंग: पीला मकर 06-09-2025 ♑ मकर :आज का दिन आपके लिए शुभ है। नौकरी में मेहनत का फल मिलेगा। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। दांपत्य जीवन में सहयोग बढ़ेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 5 भाग्यशाली रंग: काला कुंभ 06-09-2025 ♒ कुंभ :आज आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। नौकरी में तरक्की के अवसर मिलेंगे। व्यापार में नई योजनाएं सफल होंगी। परिवार में सौहार्द बना रहेगा। प्रेम संबंधों में निकटता बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण भाग्यशाली संख्या: 3 भाग्यशाली रंग: नीला मीन 06-09-2025 ♓ मीन :आज नए अवसर और सफलता आपके साथ होंगे। नौकरी में आपकी मेहनत रंग लाएगी। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में खुशियां बनी रहेंगी। दांपत्य जीवन मधुर रहेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 6 भाग्यशाली रंग: सफेद

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आज का दैनिक पंचांग Panchang

दिनांक:-6 सितंबर 2025, शनिवार, Saturday — 🌄 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय 🌄 — सूर्योदय – 06:02 चन्द्रोदय – 17:52 सूर्यास्त – 18:37 चन्द्रास्त – 05:19, सितम्बर 07 — पञ्चाङ्ग — तिथि – चतुर्दशी – 01:41, सितम्बर 07 तक योग – अतिगण्ड – 11:52 तक वार – शनिवार पक्ष – शुक्ल पक्ष नक्षत्र – धनिष्ठा – 22:55 तक करण – गर – 14:31 तक — 🌙 चन्द्र मास एवं सम्वत 🌙 — शक सम्वत – 1947 विश्वावसु विक्रम सम्वत – 2082 कालयुक्त गुजराती सम्वत – 2081 नल चन्द्रमास – भाद्रपद – पूर्णिमान्त — राशि तथा नक्षत्र — चन्द्र राशि – मकर – 11:21 तक सूर्य राशि – सिंह सूर्य नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी सूर्य नक्षत्र पद – पूर्वाफाल्गुनी – 19:06 तक नक्षत्र पद – धनिष्ठा – 11:21 तक — ऋतु और अयन — द्रिक ऋतु – शरद वैदिक ऋतु – वर्षा द्रिक अयन – दक्षिणायण वैदिक अयन – दक्षिणायण दिनमान – 12 घण्टे 35 मिनट्स 11 सेकण्ड्स रात्रिमान – 11 घण्टे 25 मिनट्स 17 सेकण्ड्स मध्याह्न – 12:19 — अन्य कैलेंडर — कलियुग – 5126 वर्ष कलि अहर्गण – 1872459 दिन जूलियन दिनाङ्क – अगस्त 24, 2025 सीई राष्ट्रीय नागरिक दिनाङ्क – भाद्रपद 15, 1947 शक राष्ट्रीय निरयण दिनाङ्क – भाद्रपद 22, 1947 शक लाहिरी अयनांश – 24.222558 राटा डाई – 739500 जूलियन दिन – अगस्त 24, 2025 सीई संशोधित जूलियन दिन – 60924 दिन — शुभ समय — ब्रह्म मुहूर्त – 04:30 से 05:16प्रातः सन्ध्या – 04:53 से 06:02 अभिजित मुहूर्त – 11:54 से 12:44 विजय मुहूर्त – 14:25 से 15:15 गोधूलि मुहूर्त – 18:37 से 19:00 सायाह्न सन्ध्या – 18:37 से 19:45 अमृत काल – 12:50 से 14:23 निशिता मुहूर्त – 23:57 से 00:42, सितम्बर 07 रवि योग – 06:02 से 22:55 — अशुभ समय — राहुकाल – 09:10 से 10:45 यमगण्ड – 13:54 से 15:28 आडल योग – 06:02 से 22:55 दुर्मुहूर्त – 06:02 से 06:52 गुलिक काल – 06:02 से 07:36 वर्ज्य – 05:45, सितम्बर 07 से 07:16, सितम्बर 07 भद्रा – 01:41, सितम्बर 07 से 06:02, सितम्बर 07 बाण – मृत्यु – 19:06 तक पञ्चक – 11:21 से 06:02, सितम्बर 07 — पंचक रहित — रज पञ्चक – 06:02 से 06:52 शुभ मुहूर्त – 06:52 से 09:09 चोर पञ्चक – 09:09 से 11:28 शुभ मुहूर्त – 11:28 से 13:47 रोग पञ्चक – 13:47 से 15:51 शुभ मुहूर्त – 15:51 से 17:33 मृत्यु पञ्चक – 17:33 से 19:00 अग्नि पञ्चक – 19:00 से 20:25 शुभ मुहूर्त – 20:25 से 22:01 मृत्यु पञ्चक – 22:01 से 22:55 अग्नि पञ्चक – 22:55 से 23:56 शुभ मुहूर्त – 23:56 से 01:41, सितम्बर 07 रज पञ्चक – 01:41, सितम्बर 07 से 02:11, सितम्बर 07 शुभ मुहूर्त – 02:11, सितम्बर 07 से 04:31, सितम्बर 07 चोर पञ्चक – 04:31, सितम्बर 07 से 06:02, सितम्बर 07 — उदय लग्न — सिंह – 04:35 से 06:52 कन्या – 06:52 से 09:09 तुला – 09:09 से 11:28 वृश्चिक – 11:28 से 13:47 धनु – 13:47 से 15:51 मकर – 15:51 से 17:33 कुम्भ – 17:33 से 19:00 मीन – 19:00 से 20:25 मेष – 20:25 से 22:01 वृषभ – 22:01 से 23:56 मिथुन – 23:56 से 02:11, सितम्बर 07 कर्क – 02:11, सितम्बर 07 से 04:31, सितम्बर 07

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व्रत, पूजाविधि और विशेषताएं Method Of Worship

अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा एवं पूजा-विधि,अनन्त चतुर्दशी माहात्म्य एवं रहस्य, अनन्त नारायण स्तोत्रम् (हिंदी अर्थ सहित)

01. अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा एवं पूजा-विधि 02. अनन्त चतुर्दशी माहात्म्य एवं रहस्य 03.अनन्त नारायण स्तोत्रम् (हिंदी अर्थ सहित) अनन्त चतुर्दशी व्रत भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी 06 सितंबर शनिवार 2025 १.ॐ श्रीं अनंताय नमः २ॐ ह्रीं नमो नारायणाय अनन्ताय श्रीं ॐ ३.ॐ अनन्तदेवाय च विदमहे विश्वरूपाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात् ४..अनन्तं ध्यायामहे विश्वरूपं प्रपद्यामहे।अनादिनित्यं विष्णुं तन्नो मोक्षाय प्रचोदयात् ॥ ५..ॐ नमो भगवते अनन्ताय विश्वरूपाय सर्वेश्वरायप्रलयकालानलसंहारकाय महापुरुषाय परब्रह्मणे नमः । ॐ अनन्तोऽसि अनन्तबाहो अनन्तशक्ते अनन्तगतेमाम् अमृतत्वाय पावय पावय नमः ॥ अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा एवं पूजा-विधि अनन्त चतुर्दशी का महत्वअनन्त चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के “अनन्त” स्वरूप की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है।शास्त्रों में कहा गया है – इस दिन भगवान नारायण ने विराट विश्वरूप धारण कर समस्त ब्रह्माण्ड को अपने सूक्ष्म शरीर में धारण किया। अनंत चतुर्दशी व्रत रखने से या इस दिन भगवान अनंत के मंत्रों के जाप से बर्ष भर अनजाने में किए भक्ष्य अभक्ष्य के दोष से मुक्ति मिलती है। अनंत चतुर्दशी के व्रत से मनोकामना पूरी होने का योग बनता है। अनन्त चतुर्दशी पर व्रत रखने से धन, सुख, संतान, दीर्घायु तथा जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। इस दिन गणेश प्रतिमा विसर्जन भी होता है, अतः यह पर्व दोहरी महिमा से युक्त है।–2025 का शुभ समयभाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी 06 सितंबर शनिवार 2025तिथि आरंभ: 6 सितम्बर, प्रातः 03:12 बजेतिथि समाप्ति: 7 सितम्बर, प्रातः 01:41 बजेपूजा का श्रेष्ठ समय: 6 सितम्बर प्रातः 05:21 बजे से लेकर रात्रि 01:41 बजे तक व्रत पूर्व तैयारी 1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। 2. घर के पवित्र स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। 3. लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। 4. एक कलश स्थापित करें – उसमें पवित्र जल, आम की पत्तियाँ रखें और ऊपर नारियल रखें। 5. अनन्त सूत्र तैयार करें – यह पीले या लाल धागे का होता है जिसमें 14 गांठें होती हैं। अनन्त चतुर्दशी व्रत-विधि 1. दीपक व धूप जलाकर भगवान की स्तुति करें। 2. भगवान गणेश का पूजन करें और फिर विष्णुजी का ध्यान करें –“शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥” 3. चौकी पर 14 तिलक करें और हर तिलक पर 1 पूड़ी और 1 पुआ (या मिठाई) अर्पित करें। यह 14 लोकों का प्रतीक है। 4. पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गुड़) से भगवान का अभिषेक करें और पूजा में प्रयोग करें। भगवान विष्णु कीकिसी भी पूजा में तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं और उनके प्रसाद में तुलसी दल अवश्य मिलाकर अर्पित करें। 5. अनन्त सूत्र को पंचामृत में डुबोकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। 6. पूजा के बाद सूत्र को पुरुष दाहिनी बांह में और स्त्रियाँ बायीं बांह में बाँधती हैं।इस समय मंत्र जपें –“ॐ अनन्ताय नमः” 7. फल, पुष्प, तुलसीदल, नारियल और नैवेद्य अर्पित करें। 8. इसके बाद अनन्त चतुर्दशी की व्रत-कथा सुनें। और आरती करें।(श्रद्धालु चाहे तो इस दिन विष्णु सहस्रनाम एवं पुरुष सूक्त कापाठ भी कर सकते हैं।)इस प्रकार श्रद्धापूर्वक अनन्त चतुर्दशी व्रत-पूजन करने से भगवान विष्णु अपने भक्तों को अनन्त आशीर्वाद प्रदान करते हैं। व्रत का नियम इस दिन उपवास रखें और केवल फलाहार करें।पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें।अनन्त सूत्र 14 दिन तक धारण करना चाहिए।व्रत का संकल्प 14 वर्षों तक करने की परंपरा है। चौदह बर्ष करने के बाद उद्यापन कर व्रत छोड़ सकते हैं | व्रत का फलपाप नाश होता है।रोग, शोक और क्लेश दूर होते हैं।धन-धान्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।संतान-सुख और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है।अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। अनंत चतुर्दशी व्रत कथा एक बार महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया। उस समय यज्ञ मंडप का निर्माण सुंदर तो था ही, अद्भुत भी था वह यज्ञ मंडप इतना मनोरम था कि जल व थल की भिन्नता प्रतीत ही नहीं होती थी। जल में स्थल तथा स्थल में जल की भांति प्रतीत होती थी। बहुत सावधानी करने पर भी बहुत से व्यक्ति उस अद्भुत मंडप में धोखा खा चुके थे।एक बार कहीं से टहलते-टहलते दुर्योधन भी उस यज्ञ-मंडप में आ गया और एक तालाब को स्थल समझ उसमें गिर गया। द्रौपदी ने यह देखकर ‘अंधों की संतान अंधी’ कह कर उनका उपहास किया। इससे दुर्योधन चिढ़ गया। यह बात उसके हृदय में बाण समान लगी। उसके मन में द्वेष उत्पन्न हो गया और उसने पांडवों से बदला लेने की ठान ली। उसके मस्तिष्क में उस अपमान का बदला लेने के लिए विचार उपजने लगे। उसने बदला लेने के लिए पांडवों को द्यूत-क्रीड़ा में हरा कर उस अपमान का बदला लेने की सोची। उसने पांडवों को जुए में पराजित कर दिया। पराजित होने पर प्रतिज्ञानुसार पांडवों को बारह वर्ष के लिए वनवास भोगना पड़ा। वन में रहते हुए पांडव अनेक कष्ट सहते रहे। एक दिन भगवान कृष्ण जब मिलने आए, तब युधिष्ठिर ने उनसे अपना दुख कहा और दुख दूर करने का उपाय पूछा। तब श्रीकृष्ण ने कहा- ‘हे युधिष्ठिर! तुम विधिपूर्वक अनंत भगवान का व्रत करो, इससे तुम्हारा सारा संकट दूर हो जाएगा और तुम्हारा खोया राज्य पुन: प्राप्त हो जाएगा।’ इस संदर्भ में श्रीकृष्ण ने उन्हें एक कथा सुनाई – प्राचीन काल में सुमंत नाम का एक नेक तपस्वी ब्राह्मण था। उसकी पत्नी का नाम दीक्षा था। उसकी एक परम सुंदरी धर्मपरायण तथा ज्योतिर्मयी कन्या थी। जिसका नाम सुशीला था। सुशीला जब बड़ी हुई तो उसकी माता दीक्षा की मृत्यु हो गई। पत्नी के मरने के बाद सुमंत ने कर्कशा नामक स्त्री से दूसरा विवाह कर लिया। सुशीला का विवाह ब्राह्मण सुमंत ने कौंडिन्य ऋषि के साथ कर दिया। विदाई में कुछ देने की बात पर कर्कशा ने दामाद को कुछ ईंटें और पत्थरों के टुकड़े बांध कर दे दिए। कौंडिन्य ऋषि दुखी हो अपनी पत्नी को लेकर अपने आश्रम की ओर चल दिए। परंतु रास्ते में ही रात हो गई। वे नदी तट पर संध्या करने लगे।सुशीला ने देखा- वहां पर बहुत-सी स्त्रियां सुंदर वस्त्र धारण कर किसी देवता की पूजा पर रही थीं। सुशीला के पूछने पर उन्होंने विधिपूर्वक अनंत व्रत की महत्ता बताई। सुशीला ने वहीं उस व्रत का अनुष्ठान किया और चौदह गांठों वाला डोरा हाथ में

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पितृदोष Pitrudosh

श्राद्ध से बढ़कर महान् यज्ञ तीनों लोकों में दूसरा कोई नहीं है।पितृ पक्ष की होने वाली है शुरुआत, इन मंत्रों के जप से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद !

श्राद्धसे बढ़कर महान् यज्ञ तीनों लोकोंमें दूसरा कोई नहीं है। इसमें जो कुछ दान दिया जाता है, वह सब अक्षय होता है। दूसरोंको जो दान दिया जाता है; उसका फल दस हजारगुना होता है। अपनी जातिवालोंको देनेसे लाख-गुना फल होता है क्योंकि मनुष्य का कर्तव्य अपने समुदाय या अपनी जाति का संरक्षण और देखभाल करना मुख्य है। पर पिण्डदान व श्राद्ध आदि में लगाया हुआ धन करोड़गुना होकर पुनः आपको ही प्राप्त हो जाता है क्योंकि जिन पूर्वजों तथा जिन जिन पितरों की कृपा से आपका जन्म हो सका उनके लिए कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ही आश्विन मास का श्राद्ध काल निर्धारित किया गया है वेसे हर अमावस्या तथा अष्टकाओं में भी श्राद्ध कर्म अनिवार्य होता है।जो गृहस्थ हर अमावस्या को भी मासिक श्राद्ध करता है अथवा पितरों के निमित्त तिल मिश्रित जल से तीर्थ स्थल पर जाकर तर्पण वह गृहस्थ अति शीघ्र ही अद्वितीय धनधान्य और संतति से भरा हुआ होकर देवताओं और नवग्रहों की कृपा भी प्राप्त कर धन्य हो जाता है। देवी स्वधा के पति जो पितर नाम से संबोधित किये गए हैं वे सभी देवताओं द्वारा भी पूजनीय हैं और वे आधुनिक मन्वंतर के देवताओं के भी पूर्वज हैं। अतः श्राद्ध कर्म से देवता भी प्रसन्न होते हैं। आप लोग वर्ष के 11 माह देवी देवताओं के लिए व्रत उपवास हवन आदि करते हो यह उत्तम कार्य है पर आश्विन मास का श्राद्ध काल उन सभी प्रकार के कर्मकांडो या सब कर्मो या हवन विधि विधान आदि को महाफल देने वाला ही समझा जाए। पिण्डदान और श्राद्ध कर्म के दौरान उस बुलाये गए जितेन्द्रिय ब्राह्मण को दान देने पर वह अनन्त गुना फल देनेवाला बताया गया है। पितरों के निमित्त तीर्थ में अन्नदान-जो गंगाजीके जलमें और गया, प्रयाग, पुष्कर, काशी, सिद्धकुण्ड तथा गंगा-सागर-संगम तीर्थमें पितरोंके लिये अन्नदान करता है, उसकी मुक्ति निश्चित है तथा उसके पितर अक्षय स्वर्ग प्राप्त करते हैं। उनका जन्म सफल हो जाता है। जो विशेषतः गंगाजीमें तिलमिश्रित जलके द्वारा तर्पण करता है, उसे भी मोक्षका मार्ग मिल जाता है। फिर जो पिण्डदान करता है, उसके लिये तो कहना ही क्या है। अमावास्या और युगादि तिथियोंको ( इनका वर्णन हमने कालखण्ड पुस्तक में किया है ) तथा चन्द्रमा और सूर्य ग्रहणके दिन जो पार्वण श्राद्ध करता है, वह अक्षय लोकका भागी होता है। उसके पितर उसे प्रिय आशीर्वाद और अनन्त भोग प्रदान करके दस हजार वर्षांतक तृप्त रहते हैं। ऐसा पद्मपुराण के सृष्टिखण्ड अध्याय ४७ का कथन है। इसलिये प्रत्येक पर्वपर पुत्रोंको प्रसन्नतापूर्वक पार्वण श्राद्ध करना चाहिये। माता-पिताके इस श्राद्ध-यज्ञका अनुष्ठान करके मनुष्य सब प्रकारके बन्धनोंसे मुक्त हो जाता है।जो श्राद्ध प्रतिदिन किया जाता है, उसे नित्य श्राद्ध माना गया है। जो पुरुष श्रद्धापूर्वक नित्य श्राद्ध करता है, वह अक्षय लोकका उपभोग करता है। इसी प्रकार कृष्णपक्षमें विधिपूर्वक काम्य श्राद्धका अनुष्ठान करके मनुष्य मनोवांछित फल प्राप्त करता है। महालय या पितृपक्ष में पितरोंका श्राद्ध सभी को करना चाहिये। उस समय सूर्य कन्याराशिपर गये हैं या नहीं-इसका विचार नहीं करना चाहिये। जब सूर्य कन्याराशिपर स्थित होते हैं, उस समयसे लेकर सोलह दिन उत्तम दक्षिणाओं से सम्पन्न यज्ञों के समान महत्त्व रखते हैं। उन दिनोंमें इस परम पवित्र काम्य श्राद्धका अनुष्ठान करना उचित है। इससे श्राद्धकर्ताका मंगल होता है। यदि उस समय श्राद्ध न हो सके तो जब सूर्य तुला राशि पर स्थित हों, उसी समय कृष्णपक्ष आदिमें उक्त श्राद्ध करना उचित है। चंद्र ग्रहण के समय – चन्द्रग्रहण ( आने ही वाला है चंद्र ग्रहण ..) के समय सभी दान भूमिदानके समान होते हैं, सभी संध्यापूत ब्राह्मण व्यासके समान माने जाते हैं , सभी जितेन्द्रिय संत सनत्कुमार के समान पावन माने गए हैं ।और समस्त जल गंगाजलके तुल्य हो जाता है। चन्द्रग्रहणमें दिया हुआ दान और समयकी अपेक्षा लाखगुना तथा सूर्यग्रहणका दस लाखगुना अधिक फल देनेवाला बताया गया है। और संयोग से चंद्र ग्रहण के समय आपको यदि गंगाजीका जल प्राप्त हो जाय, तब तो चन्द्रग्रहणका दान करोड़गुना और सूर्यग्रहणमें दिया हुआ दान दस करोड़गुना अधिक फल देनेवाला होता है। विधिपूर्वक एक लाख ( 1,00000) गोदान करनेसे जो फल प्राप्त होता है, वह चन्द्रग्रहणके समय गंगाजीमें स्नान करनेसे मिल जाता है। जो चन्द्रमा और सूर्यके ग्रहणमें गंगाजीके जलमें डुबकी लगाता है, उसे सम्पूर्ण तीर्थोंमें स्नान करनेका फल प्राप्त होता है। यदि रविवारको सूर्यग्रहण और सोमवारको चन्द्रग्रहण हो तो वह चूड़ामणि नामक योग कहलाता है; उसमें स्नान और दानका अनन्त फल माना गया है। उस समय पुण्य तीर्थमें पहले उपवास करके जो पुरुष पिण्डदान, तर्पण तथा धन-दान करता है, वह सत्यलोकमें प्रतिष्ठित होता है। अथवा कोई मनुष्य किसी घोर मजबूरी के कारण चंद्र ग्रहण के समय अथवा सूर्य ग्रहण के पावन समय यदि तीर्थ स्थल पर न जा पाए तो वह पवित्र स्थल पर बैठकर कुशा या स्वर्ण अथवा चांदी धारण करके देवी स्वधा के स्तोत्र का पाठ करे या श्राद्ध के दिन संध्यापूत ब्राह्मण से करवाये तो भी उस पर पितरों की कृपा निश्चित ही होती है पितृ पक्ष की होने वाली है शुरुआत, इन मंत्रों के जप से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद ● पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से होगी और समापन आश्विन मास की अमावस्या को होगा, सोलह दिनों तक चलने वाले इस कालखंड में श्रद्धालु अपने पितरों को जल अर्पित करते हैं और उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध व तर्पण की विशेष परंपरा निभाते हैं, पंचांग के अनुसार, 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से प्रारंभ होकर 21 सितंबर को महालया अमावस्या के दिन संपन्न होगा। ● पितृ पक्ष के दौरान उपाय – पितृ पक्ष के दौरान पितृ दोष को दूर करने के भी कई उपाय किए जाते हैं, पितृ दोष ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक प्रमुख दोष माना जाता है, यह दोष उस कर्म ऋण का प्रतीक है, जो हमारे पूर्वजों के अधूरे या नकारात्मक कर्मों के कारण बनता है, यदि इसका निवारण न किया जाए तो व्यक्ति और उसका परिवार पितरों की नाराजगी के साथ-साथ जीवन में अनेक बाधाओं और अनहोनी घटनाओं का सामना कर सकता है, हालांकि शास्त्रों और रावण संहिता में इसके समाधान और विशेष मंत्र बताए गए हैं। ● पितृ दोष निवारण मंत्र – ऊँ श्री पितराय नमः तथा ऊँ श्री पितृदेवाय नमः – इन मंत्रों का 21 बार जाप करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। ● ऊँ श्री पितृभ्यः नमः – 51

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आज का दैनिक राशिफल Rashifal

आज का दैनिक राशिफल Aaj ka dainik rashifal (05-09-2025) Daily Rashifal,Daily Horoscope,Astrology मेष (Aries)05-09-2025 ♈ मेष :आज आपका जोश कायम रहेगा और नए अवसर सामने आएँगे। कार्यस्थल पर आपकी पहल को सराहा जाएगा — छोटी-छोटी जीत बड़े फायदे दिला सकती हैं। व्यापारियों के लिए नए ग्राहक मिलने के संकेत हैं। परिवार में किसी सदस्य से खुशखबरी मिल सकती है। साथी के साथ समय बिताने से मन हर्षित होगा। धनप्रवाह अच्छा रहेगा, पर बजट बनाएँ रखें। ऊर्जा अच्छी है, हल्का व्यायाम करें। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 6 भाग्यशाली रंग: गुलाबी वृष (Tauras)05-09-2025 ♉ वृषभ :आज निर्णय सोच-समझकर लें—छोटे-मोटे विरोध आ सकते हैं पर धैर्य से काम बन जाएगा। कार्यालय में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में भुगतान सम्बन्धी समस्या सुलझ सकती है। परिवार में किसी बुजुर्ग का आशीर्वाद मिलेगा। स्वास्थ्य में छोटी परेशानी हो तो तुरंत ध्यान दें। वित्तीय योजनाओं पर पुनर्विचार लाभदायक रहेगा। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 4 भाग्यशाली रंग: क्रीम मिथुन (Gemini)05-09-2025 ♊ मिथुन :संचार और संपर्क आपके लिए महत्वपूर्ण होंगे—किसी मीटिंग/कॉल से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। छात्रों के लिए पढ़ाई में ध्यान बना रहेगा। व्यापार में नया कॉन्ट्रैक्ट मिलने के संकेत हैं। घरेलू माहौल मधुर रहेगा; छोटे-छोटे उपहार दिल को खुश करेंगे। पैसों के मामले में संभलकर निर्णय लें। आँखों का ध्यान रखें। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 7 भाग्यशाली रंग: हरा कर्क (Cancer)05-09-2025 ♋ कर्क :आज भावनात्मक समझदारी से लाभ होगा—परिवार के साथ तालमेल बनेगा। ऑफिस में कोई चुनौती आए तो संयम से उसका हल मिलेगा। संपत्ति या घर से जुड़ा कोई निर्णय सोच-समझकर लें। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी, साथ समय बिताएँ। आर्थिक दृष्टि से दिन सामान्य रहेगा। स्वास्थ्य के लिए आराम जरूरी है—ओवरटायर न हों। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 2 भाग्यशाली रंग: नीला सिंह (Leo)05-09-2025 ♌ सिंह :आपकी नेतृत्व क्षमता आज स्पष्ट दिखेगी — जिम्मेदारी संभालने से सम्मान मिलेगा। करियर में ठोस प्रगति की सम्भावना है। व्यापारियों को नए अवसर मिलेंगे पर शर्तों को अच्छे से पढ़ें। परिवार में किसी छोटी यात्रा की योजना बन सकती है। रोमांस में छोटे-छोटे सरप्राइज़ रिश्तों को तरोताज़ा करेंगे। ऊर्जा बनी रहे—पर आराम भी ज़रूरी है। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 1 भाग्यशाली रंग: ऑरेंज कन्या (Vergo)05-09-2025 ♍ कन्या :आज व्यवस्थित रहना फायदेमंद रहेगा—डिटेल पर आपकी नजर काम आएगी। ऑफिस में लम्बे समय से अटके कार्य निपटेंगे और मन हल्का होगा। साझेदारी में पारदर्शिता रखें; पुराने मतभेद सुलझने के संकेत हैं। घरेलू साज-सज्जा या आयोजन से परिवार में खुशियाँ आएंगी। स्वास्थ्य ठीक रहेगा पर पानी पर्याप्त पीजिए। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 3 भाग्यशाली रंग: हरा तुला (Libra)05-09-2025 ♎ तुला :संतुलन बनाकर चलें—काम और घर दोनों में आपका प्रभाव दिखेगा। कलात्मक और क्रिएटिव कार्यों में सफलता मिलेगी। ऑफिस में टीमवर्क से लक्ष्य पूरे होंगे। रोमांटिक जीवन में रोमांचक पलों की सम्भावना है। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी; निवेश पर भावनात्मक निर्णय टालें। मानसिक शांति के लिए ध्यान लाभकारी रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण भाग्यशाली संख्या: 8 भाग्यशाली रंग: गुलाबी वृश्चिक (Scorpio)05-09-2025 ♏ वृश्चिक :फोकस और सथिरता से काम लें—जटिल कार्य भी आसानी से निपटेंगे। बिजनेस पार्टनर से सहयोग मिलेगा; लिखित में सब कुछ सुनिश्चित कर लें। परिवार में एकता बनी रहेगी और किसी समारोह की तैयारी चल सकती है। आर्थिक लाभ के छोटे-छोटे स्रोत बनेंगे। स्वास्थ्य पर ध्यान दें—विशेषकर तनाव घटाएँ। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 5 भाग्यशाली रंग:गहरा लाल धनु (Sagitarious)05-09-2025 ♐ धनु :यात्रा और शिक्षा संबंधी कार्य आज फलदायी रहेंगे। प्रोफेशनल लाइफ में विस्तार के संकेत स्पष्ट हैं—नई परियोजनाएँ मिल सकती हैं। उद्यमियों के लिए विस्तार योजनाओं पर सोच-समझ कर कदम उठाएँ। पारिवारिक जीवन में सुख और मदुरता बनी रहेगी। आर्थिक दृष्टि से दिन सही रहेगा। आउटडोर एक्टिविटी से ऊर्जा बढ़ेगी। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 9 भाग्यशाली रंग: पीला मकर (Capricorn)05-09-2025 ♑ मकर :अनुशासन और समय प्रबंधन आज आपकी सफलता की कुंजी हैं। वरिष्ठों से समर्थन मिलने के संकेत हैं—यह आपकी प्रोफ़ाइल को मजबूत करेगा। संपत्ति या करियर से जुड़ी योजनाओं में गति आएगी। घर में छोटे-छोटे दोष सुधारने से सकारात्मक ऊर्जा रहेगी। स्वास्थ्य के लिए स्ट्रेचिंग/हल्की एक्सरसाइज़ लाभदायक। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 2 भाग्यशाली रंग: काला कुंभ (Aquarius)05-09-2025 ♒ कुंभ :नवाचारी सोच आपके हित में काम करेगी—नई तकनीक अपनाने से काम आसान होगा। प्रेजेंटेशन/इंटरव्यू में आप प्रभाव डाल पाएँगे। बिज़नेस में डिजिटल/सोशल स्ट्रेटजी से फायदा होगा। पारिवारिक रिश्तों में समझ बढ़ेगी। आर्थिक रूप से योजनाबद्ध निवेश लाभ दे सकता है। नींद व आराम का ध्यान रखें। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 7 भाग्यशाली रंग: नीला मीन (Pisces)05-09-2025 ♓ मीन :सपने और व्यावहारिकता का मेल आज सफल रहेगा—रचनात्मक परियोजनाएँ आगे बढ़ेंगी। कार्यस्थल पर आपकी संवेदनशीलता टीम में तालमेल बनाए रखेगी। व्यापार में पेमेंट रीकवरी के योग हैं। परिवार में धार्मिक/सांस्कृतिक गतिविधि से मन प्रसन्न रहेगा। आर्थिक फैसले सोचकर लें—जोखिम कम रखें। पानी अधिक पिएँ और हल्का व्यायाम करें। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 3 भाग्यशाली रंग: क्रीम

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आज का दैनिक पंचांग Panchang

दिनांक:-5 सितंबर 2025,शुक्रवार,Friday — 🌄 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय 🌄 — सूर्योदय – 06:01 चन्द्रोदय – 17:16 सूर्यास्त – 18:38 चन्द्रास्त – 04:15, सितम्बर 06 — पञ्चाङ्ग — तिथि – त्रयोदशी – 03:12, सितम्बर 06 तक योग – शोभन – 13:53 तक वार – शुक्रवार पक्ष – शुक्ल पक्ष नक्षत्र – श्रवण – 23:38 तक करण – कौलव – 15:45 तक — 🌙 चन्द्र मास एवं सम्वत 🌙 — शक सम्वत – 1947 विश्वावसु विक्रम सम्वत – 2082 कालयुक्त गुजराती सम्वत – 2081 नल चन्द्रमास – भाद्रपद – पूर्णिमान्त — राशि तथा नक्षत्र — चन्द्र राशि – मकर सूर्य राशि – सिंह सूर्य नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी सूर्य नक्षत्र पद – पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पद – श्रवण – 11:46 तक — ऋतु और अयन — द्रिक ऋतु – शरद वैदिक ऋतु – वर्षा द्रिक अयन – दक्षिणायण वैदिक अयन – दक्षिणायण दिनमान – 12 घण्टे 36 मिनट्स 50 सेकण्ड्स रात्रिमान – 11 घण्टे 23 मिनट्स 38 सेकण्ड्स मध्याह्न – 12:20 — अन्य कैलेंडर — कलियुग – 5126 वर्ष कलि अहर्गण – 1872458 दिन जूलियन दिनाङ्क – अगस्त 23, 2025 सीई राष्ट्रीय नागरिक दिनाङ्क – भाद्रपद 14, 1947 शक राष्ट्रीय निरयण दिनाङ्क – भाद्रपद 21, 1947 शक लाहिरी अयनांश – 24.222520 राटा डाई – 739499 जूलियन दिन – अगस्त 23, 2025 सीई संशोधित जूलियन दिन – 60923 दिन — शुभ समय — ब्रह्म मुहूर्त – 04:30 से 05:16प्रातः सन्ध्या – 04:53 से 06:01 अभिजित मुहूर्त – 11:54 से 12:45 विजय मुहूर्त – 14:26 से 15:16 गोधूलि मुहूर्त – 18:38 से 19:01 सायाह्न सन्ध्या – 18:38 से 19:46 अमृत काल – 13:16 से 14:52 निशिता मुहूर्त – 23:57 से 00:43, सितम्बर 06 सर्वार्थ सिद्धि योग – 06:01 से 23:38 रवि योग – 23:38 से 06:02, सितम्बर 06 — अशुभ समय — राहुकाल – 10:45 से 12:20 यमगण्ड – 15:29 से 17:03 आडल योग – 23:38 से 06:02, सितम्बर 06 विडाल योग – 06:01 से 23:38 गुलिक काल – 07:36 से 09:10 दुर्मुहूर्त – 08:32 से 09:23 वर्ज्य – 03:31, सितम्बर 06 से 05:04, सितम्बर 06 बाण – मृत्यु – 18:21 से पूर्ण रात्रि तक — पंचक रहित — मृत्यु पञ्चक – 06:01 से 06:56 अग्नि पञ्चक – 06:56 से 09:13 शुभ मुहूर्त – 09:13 से 11:32 रज पञ्चक – 11:32 से 13:51 शुभ मुहूर्त – 13:51 से 15:55 चोर पञ्चक – 15:55 से 17:37 शुभ मुहूर्त – 17:37 से 19:04 रोग पञ्चक – 19:04 से 20:29 चोर पञ्चक – 20:29 से 22:05 शुभ मुहूर्त – 22:05 से 23:38 रोग पञ्चक – 23:38 से 00:00, सितम्बर 06 शुभ मुहूर्त – 00:00, सितम्बर 06 से 02:15, सितम्बर 06 मृत्यु पञ्चक – 02:15, सितम्बर 06 से 03:12, सितम्बर 06 अग्नि पञ्चक – 03:12, सितम्बर 06 से 04:35, सितम्बर 06 शुभ मुहूर्त – 04:35, सितम्बर 06 से 06:02, सितम्बर 06 — उदय लग्न — सिंह – 04:39 से 06:56 कन्या – 06:56 से 09:13 तुला – 09:13 से 11:32 वृश्चिक – 11:32 से 13:51 धनु – 13:51 से 15:55 मकर – 15:55 से 17:37 कुम्भ – 17:37 से 19:04 मीन – 19:04 से 20:29 मेष – 20:29 से 22:05 वृषभ – 22:05 से 00:00, सितम्बर 06 मिथुन – 00:00, सितम्बर 06 से 02:15, सितम्बर 06 कर्क – 02:15, सितम्बर 06 से 04:35, सितम्बर 06

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स्तोत्र Stotra

उपासक जो भी मनोकामना अपने मन में चिंतन करता है उसे यह दिव्य स्तोत्र के नित्य पाठ से निश्चित रूप से प्राप्त करता है |

पञ्चदेवैःकृत: श्री महागणपति स्तुति 1. इस स्तोत्र के पाठ से ही पंचदेव यानी कि ब्रह्मा विष्णु महेश्वर भगवान सूर्य और भगवान गणेश साधक पर प्रसन्न हो जाते हैं। साधक को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। 2. यह दिव्य स्तोत्र अपनी उर्जा से व्यक्ति की मन, विवेक, आत्मा, तथा अंतरात्मा का परमआह्लाद वर्धन करने वाला है। 3. यह दिव्य स्तोत्र श्री भगवान गणेश को ध्यान करते हुए या स्मरण करते हुए पाठ किया जाए तो भगवान गणेश अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं । यह महान दिव्य स्तोत्र “सर्वद” है मतलब सब कुछ देने वाला है । 4.जो मन में भक्ति भाव रखते हुए इस महान दिव्य स्तोत्र का पाठ करता है। उसको सरलता से ही धर्म अर्थ काम मोक्ष की प्राप्त हो जाती है। धर्म यानी आध्यात्मिक उन्नति तथा सभी प्रकार के पापों का नाश, अर्थ का मतलब धन संपदा ऐश्वर्या, रिद्धि सिद्धि तथा सौभाग्य प्राप्ति, काम का मतलब व्यक्ति अपने जीवन में जो भी कामना करता है वह पूर्ण हो जाती है, और उत्तम प्राण संगिनी की प्राप्ति होती हैऔर पति पत्नी में अतुलनीय प्रेम की वृद्धि होती है। और अंत में मोक्ष यानी साधक परमेश्वर में विलीन हो जाता है। 5. इस महान स्तोत्र के नित्य पाठ से कुल वृद्धि होती है।साधक के पुत्र पौत्रादि में वर्धन होता है। और लक्ष्मी उसे कभी छोड़कर नहीं जाती है.संसार में ” श्रीमान ” होकर जीवन यापन करता है। व्यक्ति का हर दिन आनंदमय होता है। 6. यदि कोई उपासक स्तोत्र का नित्य 7बार पाठ 21 दिन तक करें तो वह यदि उसका कोई संबन्धी कारागार में यानी कि जेल में पड़ा है तो मुक्त हो जाता है। और यदि किसी भी प्रकार का बंधन में पडा हो जैसे कि ग्रह बंधन, व्यवसाय बंधन, भाग्य बंधन यानी दुर्भाग्य, इसी तरह जितना भी बंधन है हो सभी बंधन अपने आप नष्ट हो जाते हैं । याद रहे प्रतिदिन 7 बार 21 दिन तक। चमत्कार आपके सामने होगा। 7. हमारे एक दिवस में तीन काल होते है। सुबह का समय को प्रातः काल कहते हैं मध्यान्न का समय को मध्यान्न काल कहते हैं और संध्या का समय को संध्याकाल कहते हैं। यह तीन काल को त्रिकाल कहते हैं।यदि कोई उपासक इस महान दिव्य स्तोत्र का एक काल द्विकाल या त्रिकाल में पाठ करता है वह स्वयं देवताओं का वंदनीय हो जाता है। 8. यदि किसी के ऊपर मारण उच्चाटन विद्वेषण या कोई बड़े तांत्रिक प्रयोग किया गया है तो इस स्तोत्र का नित्य 21 दिन तक प्रतिदिन 21 बार पाठ करना चाहिए। यह दिव्य स्तोत्र सभी प्रकार के मारण विद्वेषण उच्चाटन तथा तांत्रिक क्रिया का सर्वनाश कर देगा यानी कि सभी को नष्ट कर देगा। इस स्तोत्र का पाठ करने वाले साधक को किसी प्रकार का कोई भी भय नहीं लगता है.वह निर्भय हो जाता है सुरक्षित हो जाता है। 9. धनधान्य समृद्धि, संपत्ति मैं वृद्धि, आरोग्यता यानी कि सभी प्रकार के रोगों से आरोग्य, यान वाहन में वृद्धि, तथा सभी प्रकार की संपन्नता प्राप्ति होती है..। “यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्” यानी कि उपासक जो भी मनोकामना अपने मन में चिंतन करता है उसे यह दिव्य स्तोत्र के नित्य पाठ से निश्चित रूप से मिल जाता है। विधान-: पंचदेव सहित भगवान गणेश का पूजन करते हुए प्रतिदिन स्तोत्र का 21 बार पाठ करें । 21 दिन तक करने के पश्चात 5 बालकों को भोजन करायें। पञ्चदेवैःकृत: श्री महागणपति स्तुति श्रीगणेशाय नमः। ॐ नमो भगवते श्रीवल्लभ महागणपतए। ॐ नमो भगवते वासुदेव गणपतए। ॐ नमो भगवते संकर्षण गणपतए। ॐ नमो प्रद्युम्न गणपतए। ॐ नमो भगवते अनिरुद्ध गणपतए। || पञ्चदेवा ऊचुः॥ नमस्ते विघ्नराजाय भक्तानां विघ्नहारिणे । विघ्नकर्त्रे ह्यभक्तानां गणेशाय नमो नमः ॥१॥ हेरंबाय नमस्तुभ्यं ढुण्ढिराजाय ते नमः । विनायकाय देवाय ब्रह्मणां नायकाय च ॥२॥ लम्बोदराय सिद्धेश गजाननधराय च । शूर्पकर्णाय गूढाय चतुर्हस्त नमोऽस्तुते॥ ३॥ लम्बोष्ठायैकदन्ताय सर्वेशाय गणाधिप । अनन्तमहिमाधार धरणीधर ते नमः॥४॥ नमो मायामयायैव मायाहीनाय ते नमः । मोहदाय नमस्तुभ्यं मोहहन्त्रे नमो नमः ॥ ५॥ पञ्चभूतमयायैव पञ्चभूतधराय च । इन्द्रियाणां चाधिपायेन्द्रियज्ञानप्रकारिणे ॥६॥ अध्यात्मनेऽधिभूतायाधिदैवाय च ते नमः। अन्नायान्नपते तुभ्यमन्नान्नाय नमो नमः ॥ ७॥ प्राणाय प्राणनाथाय प्राणानां प्राणरूपिणे । चित्ताय चित्तहीनाय चित्तेभ्यश्चित्तदायिने ॥८॥ विज्ञानाय च विज्ञानपतये द्वन्द्वधारिणे । विज्ञानेभ्यः स्वविज्ञानदायिने ते नमो नमः ॥९॥ आनन्दाय नमस्तुभ्यमानन्दपतये नमः । आनन्दानन्ददात्रे च कारणाय नमो नमः ॥१०॥ चैतन्याय च यत्नाय चेतनाधारिणे नमः । चैतन्येभ्यः स्वचैतन्यदायिने नादरूपिणे ॥११॥ बिन्दुमात्राय बिन्दूनां पतये प्राकृताय च। भेदाभेदमयायैव ज्योतीरूपाय ते नमः ॥ १२॥ सोऽहंमात्राय शून्याय शुन्याधाराय देहिने। शून्यानां शून्यरूपाय पुरुषाय नमो नमः ॥१३॥ ज्ञानाय बोधनाथाय बोधानां बोधकारिणे। मनोवाणीविहीनाय सर्वात्मक नमो नमः ॥१४॥ विदेहाय नमस्तुभ्यं विदेहाधारकाय च । विदेहानां विदेहाय साङ्ख्यरूपाय ते नमः ॥१५॥ नानाभेदधरायैव चैकानेकादिमूर्तये । असत्स्वानन्दरूपाय शक्तिरूपाय ते नमः ॥१६॥ अमृताय सदाखण्डभेदाभेदविवर्जित । सदात्मरूपिणे सूर्यरूपाधाराय ते नमः ॥ १७॥ सत्यासत्यविहीनाय समस्वानन्दमूर्तये । आनन्दानन्दकन्दाय विष्णवे ते नमो नमः ॥१८॥ अव्यक्ताय परेशाय नेतिनेतिमयाय च । शिवाय शाश्वतायैव मोहहीनाय ते नमः ॥१९॥ संयोगेन च सर्वत्र समाधौ रूपधारिणे । स्वानन्दाय नमस्तुभ्यं मौनभावप्रदायिने ॥२०॥ अयोगाय नमस्तुभ्यं निरालम्ब स्वरूपिणे। मायाहीनाय देवाय नमस्ते ह्यसमाधये॥ २१॥ शान्तिदाय नमस्तुभ्यं पूर्णशान्तिप्रदाय ते। योगानां पतये चैव योगरूपाय ते नमः॥ २२॥ गणेशाय परेशाय ह्यपारगुणकीर्तये । योगशान्तिप्रदात्रे च महायोगाय ते नमः ॥२३॥ गुणान्तं न ययुर्यस्य वेदाद्या वेदकारकाः। स कस्य स्तवनीयः स्याद्यथामति तथा स्तुतः ॥२४॥ तेन वै भगवान् साक्षाच्चिन्तामणि गजाननः। प्रसन्नो भवतु त्राताऽस्माकं त्वं परमा गतिः॥२५॥ इत्येवमुक्त्वा देवेशास्तूष्णीं भूतास्तथा शिवे । गणेशोऽपि प्रसन्नात्मा हृष्टः सन् प्रत्युवाच तान्॥२६॥ !!फलश्रुति!! श्रीगणेश उवाच। पञ्चदेवा महाभागाः प्रसन्नो भवतां स्तवैः । तपसा च तथा भक्त्या वाञ्छितं ब्रूत वै वरम् ॥२७॥ भवत्कृतमिदं स्तोत्रं परमाह्लादवर्धनम् । मम प्रीतिकरं भक्त्या सर्वदं प्रभविष्यति ॥२८॥ यः पठेद्भावपूर्वं स धर्म कामार्थ मोक्ष भाक्। पुत्रपौत्रयुतः श्रीमानन्ते स्वानन्दमाप्नुयात् ॥२९॥ सप्तवारं पठेन्नित्यमेकविंशतिवासरम् । कारागृहगतो वाऽपि मुच्यते बन्धनात् स्वयम् ॥३०॥ एककालं द्विकालं वा त्रिकालमपि यः पठेत् । स वै देवादिकैर्वन्द्यो भविष्यति न संशयः ॥३१॥ मारणोच्चाटनादिभ्य एकविंशतिवारतः । तावद्दिनानि पाठेन तस्य नैव भयं भवेत् ॥३२॥ धनधान्यादिकं सर्वमारोग्यं पशुवर्धनम् । यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्॥३३॥ इति पञ्चदेवैः कृता गणेशस्तुतिः ।। हिन्दी अर्थ सहित हे विघ्नों के राजा, आप अपने भक्तों के सभी विघ्नों को दूर करते हैं, आपको नमस्कार है। हे गणेश जी, जो अभक्तों के लिए विघ्न उत्पन्न करते हैं, आपको नमस्कार है।||१|| हे हेरम्ब, आप ढुंढि के राजा हैं, मैं आपको सादर नमस्कार करता हूँ। हे विनायक, देवताओं के स्वामी और ब्राह्मणों के नेता।||२|| हे सिद्धियों के स्वामी, आपका उदर लम्बा है और आप हाथी को धारण

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