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Author name: Divam Astro World

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आज का दैनिक पंचांग Panchang

दिनांक:-4 सितंबर 2025,गुरुवार,Thursday — 🌄 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय 🌄 — सूर्योदय – 06:01 चन्द्रोदय – 16:36 सूर्यास्त – 18:39 चन्द्रास्त – 03:10, सितम्बर 05 — पञ्चाङ्ग — तिथि – द्वादशी – 04:08, सितम्बर 05 तक योग – सौभाग्य – 15:22 तक वार – गुरुवार पक्ष – शुक्ल पक्ष नक्षत्र – उत्तराषाढा – 23:44 तक करण – बव – 16:20 तक — 🌙 चन्द्र मास एवं सम्वत 🌙 — शक सम्वत – 1947 विश्वावसु विक्रम सम्वत – 2082 कालयुक्त गुजराती सम्वत – 2081 नल चन्द्रमास – भाद्रपद – पूर्णिमान्त — राशि तथा नक्षत्र — चन्द्र राशि – मकर सूर्य राशि – सिंह सूर्य नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी सूर्य नक्षत्र पद – पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पद – उत्तराषाढा – 11:31 तक — ऋतु और अयन — द्रिक ऋतु – शरद वैदिक ऋतु – वर्षा द्रिक अयन – दक्षिणायण वैदिक अयन – दक्षिणायण दिनमान – 12 घण्टे 38 मिनट्स 30 सेकण्ड्स रात्रिमान – 11 घण्टे 21 मिनट्स 59 सेकण्ड्स मध्याह्न – 12:20 — अन्य कैलेंडर — कलियुग – 5126 वर्ष कलि अहर्गण – 1872457 दिन जूलियन दिनाङ्क – अगस्त 22, 2025 सीई राष्ट्रीय नागरिक दिनाङ्क – भाद्रपद 13, 1947 शक राष्ट्रीय निरयण दिनाङ्क – भाद्रपद 20, 1947 शक लाहिरी अयनांश – 24.222481 राटा डाई – 739498 जूलियन दिन – अगस्त 22, 2025 सीई संशोधित जूलियन दिन – 60922 दिन — शुभ समय — ब्रह्म मुहूर्त – 04:30 से 05:15प्रातः सन्ध्या – 04:53 से 06:01 अभिजित मुहूर्त – 11:55 से 12:45 विजय मुहूर्त – 14:26 से 15:17 गोधूलि मुहूर्त – 18:39 से 19:02 सायाह्न सन्ध्या – 18:39 से 19:47 अमृत काल – 17:10 से 18:49 निशिता मुहूर्त – 23:57 से 00:43, सितम्बर 05 — अशुभ समय — राहुकाल – 13:55 से 15:29 यमगण्ड – 06:01 से 07:35 गुलिक काल – 09:10 से 10:45 विडाल योग – 01:20, सितम्बर 05 से 06:01, सितम्बर 05 वर्ज्य – 07:20 से 08:58 दुर्मुहूर्त – 10:13 से 11:04 बाण – रोग – 17:35 तक — पंचक रहित — शुभ मुहूर्त – 06:01 से 07:00 रोग पञ्चक – 07:00 से 09:17 शुभ मुहूर्त – 09:17 से 11:36 मृत्यु पञ्चक – 11:36 से 13:55 अग्नि पञ्चक – 13:55 से 15:59 शुभ मुहूर्त – 15:59 से 17:41 रज पञ्चक – 17:41 से 19:08 शुभ मुहूर्त – 19:08 से 20:33 शुभ मुहूर्त – 20:33 से 22:09 रज पञ्चक – 22:09 से 23:44 शुभ मुहूर्त – 23:44 से 00:04, सितम्बर 05 चोर पञ्चक – 00:04, सितम्बर 05 से 02:19, सितम्बर 05 शुभ मुहूर्त – 02:19, सितम्बर 05 से 04:08, सितम्बर 05 रोग पञ्चक – 04:08, सितम्बर 05 से 04:39, सितम्बर 05 शुभ मुहूर्त – 04:39, सितम्बर 05 से 06:01, सितम्बर 05 — उदय लग्न — सिंह – 04:43 से 07:00 कन्या – 07:00 से 09:17 तुला – 09:17 से 11:36 वृश्चिक – 11:36 से 13:55 धनु – 13:55 से 15:59 मकर – 15:59 से 17:41 कुम्भ – 17:41 से 19:08 मीन – 19:08 से 20:33 मेष – 20:33 से 22:09 वृषभ – 22:09 से 00:04, सितम्बर 05 मिथुन – 00:04, सितम्बर 05 से 02:19, सितम्बर 05 कर्क – 02:19, सितम्बर 05 से 04:39, सितम्बर 05

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आज का दैनिक राशिफल Rashifal

आज का दैनिक राशिफल Aaj ka dainik rashifal (03-09-2025) Daily Horoscope,Daily Rashifal मेष (Aries)03-09-2025 ♈ मेष :आज का दिन उत्साह और उपलब्धियों से भरा रहेगा। नौकरी में पदोन्नति या सराहना मिलने की संभावना है। व्यापार में नया निवेश लाभदायक रहेगा। परिवार में सुकून और खुशियां रहेंगी। दांपत्य जीवन में तालमेल मजबूत होगा। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी और रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 5 भाग्यशाली रंग: हल्का हरा वृष (Tauras)03-09-2025 ♉ वृषभ :आज का दिन सोच-समझकर निर्णय लेने का है। कार्यक्षेत्र में कुछ चुनौतियां आएंगी, लेकिन आप अपनी बुद्धिमानी से उन्हें संभाल लेंगे। व्यापार में साझेदारी से लाभ होगा। परिवार में किसी बड़े का मार्गदर्शन मिलेगा। दांपत्य जीवन में गलतफहमी से बचें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 2 भाग्यशाली रंग: सुनहरा पीला मिथुन (Gemini)03-09-2025 ♊ मिथुन :आज आपको कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं। किसी मित्र या रिश्तेदार का सहयोग लाभदायक रहेगा। व्यापार में नए संपर्क बनेंगे। पारिवारिक जीवन में खुशियां आएंगी और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। विद्यार्थियों को शिक्षा में सफलता मिलेगी। आर्थिक दृष्टि से दिन लाभकारी है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण भाग्यशाली संख्या: 7 भाग्यशाली रंग: आसमानी नीला कर्क (Cancer)03-09-2025 ♋ कर्क :आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। नौकरी में नए काम की शुरुआत होगी। व्यापार में लाभ के अवसर मिलेंगे। परिवार में किसी शुभ कार्य की योजना बन सकती है। दांपत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बढ़ेगा। धन संबंधी लाभ होगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 1 भाग्यशाली रंग: पीला सिंह (Leo)03-09-2025 ♌ सिंह :आज का दिन साहस और निर्णय क्षमता को बढ़ाएगा। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों से सम्मान मिलेगा। व्यापार में अप्रत्याशित लाभ की संभावना है। परिवार में शांति और सुख बना रहेगा। प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। आर्थिक स्थिति में स्थिरता रहेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 8 भाग्यशाली रंग: नीला कन्या (Vergo)03-09-2025 ♍ कन्या :आज कार्यक्षेत्र में मेहनत का पूरा फल मिलेगा। व्यापार में साझेदारी से लाभ होगा। परिवार में सौहार्द और सामंजस्य रहेगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी। दांपत्य जीवन मधुर रहेगा। धन लाभ की संभावना है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 4 भाग्यशाली रंग: हरा तुला (Libra)03-09-2025 ♎ तुला :आज आपके आत्मविश्वास और धैर्य की परीक्षा होगी। नौकरी में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में लाभ के अवसर बढ़ेंगे। परिवार में आपसी प्रेम और सहयोग बढ़ेगा। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 6 भाग्यशाली रंग: पीला वृश्चिक (Scorpio)03-09-2025 ♏ वृश्चिक :आज आपको काम में नए अवसर मिलेंगे। व्यापार में साझेदारी से लाभ होगा। परिवार में रिश्तों में नजदीकियां बढ़ेंगी। प्रेम जीवन में खुशियां आएंगी। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 9 भाग्यशाली रंग: बैंगनी धनु (Sagitarious)03-09-2025 ♐ धनु :आज का दिन आपकी योजनाओं को सफल बनाएगा। नौकरी में तरक्की के अवसर मिलेंगे। व्यापार में बड़ा लाभ संभव है। परिवार में आनंद का माहौल रहेगा। प्रेम संबंधों में निकटता बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 3 भाग्यशाली रंग: पीला मकर (Capricorn)03-09-2025 ♑ मकर :आज का दिन नए अवसर लेकर आएगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का फल मिलेगा। व्यापार में सफलता के योग हैं। परिवार में सुख और शांति बनी रहेगी। दांपत्य जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा। आर्थिक लाभ होगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 5 भाग्यशाली रंग: काला कुंभ (Aquarius)03-09-2025 ♒ कुंभ :आज का दिन आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा। नौकरी में पदोन्नति के योग हैं। व्यापार में नई योजनाएं लाभकारी होंगी। परिवार में सौहार्द रहेगा। प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण भाग्यशाली संख्या: 7 भाग्यशाली रंग: नीला मीन (Pisces)03-09-2025 ♓ मीन :आज का दिन नए अवसर और सफलता लेकर आएगा। नौकरी में आपकी मेहनत रंग लाएगी। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में खुशियां रहेंगी। दांपत्य जीवन मधुर रहेगा। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 2 भाग्यशाली रंग: सफेद

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आज का दैनिक पंचांग Daily Panchang

दिनांक:-3 सितंबर 2025,बुधवार,Wednesday — 🌄 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय 🌄 — सूर्योदय – 06:00 चन्द्रोदय – 15:51 सूर्यास्त – 18:40 चन्द्रास्त – 02:07, सितम्बर 04 — पञ्चाङ्ग — तिथि – एकादशी – 04:21, सितम्बर 04 तक योग – आयुष्मान् – 16:17 तक वार – बुधवार पक्ष – शुक्ल पक्ष नक्षत्र – पूर्वाषाढा – 23:08 तक करण – वणिज – 16:12 तक — 🌙 चन्द्र मास एवं सम्वत 🌙 — शक सम्वत – 1947 विश्वावसु विक्रम सम्वत – 2082 कालयुक्त गुजराती सम्वत – 2081 नल चन्द्रमास – भाद्रपद – पूर्णिमान्त — राशि तथा नक्षत्र — चन्द्र राशि – धनु – 05:21, सितम्बर 04 तक सूर्य राशि – सिंह सूर्य नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी सूर्य नक्षत्र पद – पूर्वाफाल्गुनी – 08:33 तक नक्षत्र पद – पूर्वाषाढा – 10:35 तक — ऋतु और अयन — द्रिक ऋतु – शरद वैदिक ऋतु – वर्षा द्रिक अयन – दक्षिणायण वैदिक अयन – दक्षिणायण दिनमान – 12 घण्टे 40 मिनट्स 09 सेकण्ड्स रात्रिमान – 11 घण्टे 20 मिनट्स 20 सेकण्ड्स मध्याह्न – 12:20 — अन्य कैलेंडर — कलियुग – 5126 वर्ष कलि अहर्गण – 1872456 दिन जूलियन दिनाङ्क – अगस्त 21, 2025 सीई राष्ट्रीय नागरिक दिनाङ्क – भाद्रपद 12, 1947 शक राष्ट्रीय निरयण दिनाङ्क – भाद्रपद 19, 1947 शक लाहिरी अयनांश – 24.222443 राटा डाई – 739497 जूलियन दिन – अगस्त 21, 2025 सीई संशोधित जूलियन दिन – 60921 दिन — शुभ समय — ब्रह्म मुहूर्त – 04:30 से 05:15प्रातः सन्ध्या – 04:52 से 06:00 अभिजित मुहूर्त – कोई नहीं विजय मुहूर्त – 14:27 से 15:18 गोधूलि मुहूर्त – 18:40 से 19:03 सायाह्न सन्ध्या – 18:40 से 19:48 अमृत काल – 18:05 से 19:46 निशिता मुहूर्त – 23:58 से 00:43, सितम्बर 04 रवि योग – 06:00 से 23:08 — अशुभ समय — राहुकाल – 12:20 से 13:55 यमगण्ड – 07:35 से 09:10 गुलिक काल – 10:45 से 12:20 विडाल योग – 06:00 से 23:08 वर्ज्य – 07:58 से 09:39 दुर्मुहूर्त – 11:55 से 12:46 बाण – रोग – 16:48 से पूर्ण रात्रि तक भद्रा – 16:12 से 04:21, सितम्बर 04 — पंचक रहित — रज पञ्चक – 06:00 से 07:04 शुभ मुहूर्त – 07:04 से 09:21 चोर पञ्चक – 09:21 से 11:40 शुभ मुहूर्त – 11:40 से 13:59 रोग पञ्चक – 13:59 से 16:03 शुभ मुहूर्त – 16:03 से 17:45 मृत्यु पञ्चक – 17:45 से 19:12 अग्नि पञ्चक – 19:12 से 20:37 शुभ मुहूर्त – 20:37 से 22:12 मृत्यु पञ्चक – 22:12 से 23:08 अग्नि पञ्चक – 23:08 से 00:08, सितम्बर 04 शुभ मुहूर्त – 00:08, सितम्बर 04 से 02:23, सितम्बर 04 रज पञ्चक – 02:23, सितम्बर 04 से 04:21, सितम्बर 04 शुभ मुहूर्त – 04:21, सितम्बर 04 से 04:43, सितम्बर 04 चोर पञ्चक – 04:43, सितम्बर 04 से 06:01, सितम्बर 04 — उदय लग्न — सिंह – 04:47 से 07:04 कन्या – 07:04 से 09:21 तुला – 09:21 से 11:40 वृश्चिक – 11:40 से 13:59 धनु – 13:59 से 16:03 मकर – 16:03 से 17:45 कुम्भ – 17:45 से 19:12 मीन – 19:12 से 20:37 मेष – 20:37 से 22:12 वृषभ – 22:12 से 00:08, सितम्बर 04 मिथुन – 00:08, सितम्बर 04 से 02:23, सितम्बर 04 कर्क – 02:23, सितम्बर 04 से 04:43, सितम्बर 04

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व्रत, पूजाविधि और विशेषताएं Method Of Worship

परिवर्तिनी एकादशी

श्री पद्मा एकादशी महत्व विधि एवं कथा परिवर्तिनी (पद्मा) एकादशी का व्रत कल 03 सितंबर को रखा जाएगा। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन व्रत करने से आपके सभी कष्‍ट दूर होते हैं। परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कहा जाता है। परिवर्तिनी एकादशी का व्रत कल 03 सितंबर बुधवार को रखा जाएगा। मान्‍यता है कि इस दिन भगवान विष्‍णु की विधि विधान से पूजा करने और व्रत करने से आपको सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। परिवर्तिनी एकादशी का महत्‍व इसलिए भी खास माना जाता है, क्‍योंकि मान्‍यता के अनुसार इस तिथि पर भगवान विष्‍णु पाताललोक में चातुर्मास की योग निद्रा के दौरान करवट बदलते हैं। इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी एकादशी और पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं परिवर्तिनी एकादशी की तिथि कब से कब तक हैं और किस दिन व्रत रखना शास्‍त्र सम्‍मत होगा। परिवर्तिनी एकादशी की तिथि कब से कब तक परिवर्तिनी एकादशी तिथि का आरंभ 03 सितंबर बुधवार को देर रात 03 बजकर 53 मिनट से होगा और और यह 04 सितंबर गुरुवार को प्रातः 04 बजकर 21 मिनट पर समाप्‍त होगी। इसलिए उदया तिथि की मान्‍यता के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 03 सितंबर को रखा जाएगा। पारण 04 सितंबर को सुर्योदय के उपरांत किया जाएगा। पद्मा एकादशी का महत्व पुराणों में मनीषी पुरुषों ने जल को ‘नारा’ कहा है। वह नारा ही भगवान का अयन-निवास स्थल है इसलिए वे नारायण कहलाते हैं। नारायण स्वरूप भगवान विष्णु सर्वत्र व्यापक रूप में विराजमान हैं। वे ही मेघ स्वरूप होकर वर्षा करते हैं। वर्षा से अन्न पैदा होता है और अन्न से प्रजा जीवन धारण करती है। श्रीविष्णु देवशयनी एकादशी से योग निद्रा में चले जाते हैं और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन वे अपनी करवट बदलते हैं। इस एकादशी को पद्मा, परिवर्तिनी, वामन एकादशी या डोल ग्यारस के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलने के समय प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं, इस अवधि में भक्तिभाव और विनयपूर्वक उनसे जो कुछ भी मांगा जाता है वे अवश्य प्रदान करते हैं। यह भी माना जाता है कि इस दिन माता यशोदा ने जलाशय पर जाकर श्रीकृष्ण के वस्त्र धोए थे,इसी कारण इसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। मंदिरों में इस दिन भगवान श्रीविष्णु की प्रतिमा या शालिग्राम को पालकी में बिठाकर पूजा-अर्चना के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ शोभा यात्रा निकाली जाती है। एकादशी पूजा विधि शास्त्रों के अनुसार पद्मा एकादशी के दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु के वामन अवतार को ध्यान करते हुए उन्हें पचांमृत से स्नान करवाएं। इसके पश्चात गंगाजल से स्नान करवाकर कुमकुम-अक्षत, पीले पुष्प, चन्दन, तुलसी पत्र आदि से श्री हरि की पूजा करें। वामन भगवान की कथा का श्रवण या वाचन करने के बाद दीपक से आरती उतारें एवं प्रसाद सभी में वितरित करें। पुण्य फलों की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु के मंत्र ‘‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’’का यथा संभव तुलसी की माला से जाप करें। शाम के समय भगवान विष्णु के मंदिर अथवा उनकी मूर्ति के समक्ष भजन-कीर्तन करना शुभ माना गया है। पद्मा एकादशी का महत्व इस एकादशी पर भगवान विष्णु सहित देवी लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में धन और सुख-समृद्धि की प्राप्ति तो होती ही है। परलोक में भी इस एकादशी के पुण्य से उत्तम स्थान मिलता है। पद्मा एकादशी के विषय में शास्त्र कहता है कि इस दिन छाता,जूते, चावल, दही,जल से भरा कलश एवं चांदी का दान करना उत्तम फलदायी होता है। जो लोग किसी कारणवश पद्मा एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं उन्हें पद्मा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की कथा का पाठ करना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम एवं रामायण का पाठ करना भी इस दिन उत्तम फलदायी माना गया है। ये मिलता है फल धर्मग्रंथों के अनुसार, पद्मा एकादशी का व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। जो मनुष्य इस एकादशी को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है उसके समस्त पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस व्रत को करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। व्रत कथा.. पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार युधिष्ठिर ने भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी की का नाम, देवता और पूजाविधि के बारे में पूछा। तब कृष्ण जी ने युधिष्ठिर को एक कथा सुनाई, जिसे ब्रह्माजी ने महात्मा नारद को कहा था। नारद ने ब्रह्माजी से पूछा – विष्णुजी की आराधना के लिए मैं आपसे जानना चाहता हूं कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी कौन-सी होती है? ब्रह्माजी ने कहा- आपने मुझे उत्तम प्रश्न किया है। भादो माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा के नाम से जाना जाता है। उस दिन भगवान ह्रषीकेश की पूजा की जाती है। सूर्यवंश में मान्धाता नामक एक चक्रवर्ती, सत्यप्रतिज्ञ और प्रतापी राजर्षि (जो राजा और ऋषि दोनों हों) हो गए हैं। उनके राज्य में अकाल नहीं पड़ता था। प्रजा को मानसिक चिंताएं नहीं सताती थीं और व्याधियों का प्रकोप भी नहीं होता था। उनकी प्रजा निर्भय और आर्थिक रूप से धन-समृद्ध थी। महाराज के कोष में केवल ईमानदारी से अर्जित धन का ही संग्रह था। उनके राज्य में समस्त वर्णों और आश्रमों के लोग अपने-अपने धर्म में लगे रहते थे। मान्धाता के राज्य की भूमि कामधेनु के समान फल देने वाली थी। उनके राज्यकाल में प्रजा का जीवन काफी सुखमय था।एक बार किसी कर्म के फलभोग के कारण राजा के राज्य में तीन वर्षों तक बारिश नहीं हुई। जिससे भूख से पीड़ित प्रजा नष्ट होने लगी। प्रजा महाराज के पास आकर कहने लगी कि आपको प्रजा की बात सुननी चाहिए। जल भगवान का निवास स्थान है। इसलिए वे नारायण कहलाते हैं। नारायणस्वरूप भगलावन विष्णु सर्वव्यापी है। वे ही मेघस्वरूप होकर वर्षा करते हैं और वर्षा से अन्न पैदा होता है और अन्न से प्रजा जीवित रहती है। महाराज, इस समय

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स्तोत्र Stotra

।। उत्पातनाशन श्रीगणेश स्तोत्र ।।

।। उत्पातनाशन श्रीगणेश स्तोत्र ।। (हिन्दी अर्थ सहित) भगवान् गणेश समस्त विघ्नों का नाश करने वाले हैं तथा शुभ फल को साधकों को प्रदान करने वाले हैं। इनकी महिमा का वर्णन हमें अनेकों ग्रन्थों और पुराणों में प्राप्त होता है, उन्हीं में से एक समस्त उत्पातों के नाश के लिए श्रीगणेशपुराण में वर्णित उत्पातनाशनगणेशस्तोत्र है। इस स्तोत्र पाठ से समस्त उत्पातों का विनाश होता है। इस स्तोत्र के पाठ से उपासक को त्रिविध तापों से राहत प्राप्त होती है तथा भगवान् गणेश स्वयं इस स्तोत्र का पाठ करने वाले साधक की रक्षा करते हैं। नाथस्त्वमसि देवानां मनुष्योरगरक्षसाम्।।१।। यक्षगन्धर्वविप्राणां गजाश्वरथपक्षिणाम्। भूतभव्यभविष्यस्य बुद्धीन्द्रियगणस्यच।।२।। हर्षस्य शोकदुःखस्य सुखस्य ज्ञानमोहयोः। अर्थस्य कार्यजातस्य लाभहान्योस्तथैव च।।३।। स्वर्गपाताललोकानां पृथिव्या जलधेरपि। नक्षत्राणां ग्रहाणां च पिशाचानां च वीरुधाम्।।४।। वृक्षाणां सरितां पुंसां स्त्रीणां बालजनस्य च। उत्पत्तिस्थितिसंहारकारिणे ते नमो नमः।।५।। हे प्रभो ! आप देवता, मनुष्य, नाग, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व, विप्र, गज, अश्व, रथ, पक्षी, भूत, वर्तमान, भविष्य, बुद्धि, इन्द्रियसमूह, हर्ष, शोक, दुःख, सुख, ज्ञान, मोह, अर्थ, समस्त कार्य, लाभ, हानि, स्वर्ग तथा पाताल आदि लोक, पृथ्वी, समुद्र, नक्षत्र, ग्रह, पिशाच, वनस्पति, वृक्ष, नदी, पुरुष, स्त्री एवं बालक-इन सभी के स्वामी हैं। सृष्टि, पालन तथा संहार करने वाले प्रभु आप [गणेश] को मेरा बारम्बार नमस्कार है। पशूनां पतये तुभ्यं तत्त्वज्ञानप्रदायिने। नमो विष्णुस्वरूपाय नमस्ते रुद्ररूपिणे।।६।। जीवरूपी पशुओं के पति तथा तत्त्वज्ञान प्रदान करनेवाले आपको नमस्कार है। विष्णुस्वरूप तथा रुद्रस्वरूप प्रभु आपको मेरा नमस्कार है। नमस्ते ब्रह्मरूपाय नमोऽनन्तस्वरूपिणे। मोक्षहेतो नमस्तुभ्यं नमो विघ्नहराय ते।।७।। ब्रह्मस्वरूप आपको नमस्कार है। अनन्तस्वरूप आपको नमस्कार है। हे मोक्षहेतो ! (मोक्ष को प्रदान करने वाले) आपको नमस्कार है। विघ्नों का नाश करने वाले आपको नमस्कार है। नमोऽभक्तविनाशाय नमो भक्तप्रियाय च। अधिदैवाधिभूतात्मंस्तापत्रयहराय ते।।८।। अभक्तों का नाश करने वाले आपको नमस्कार है तथा भक्तों के लिये प्रिय आपको नमस्कार है। सर्वोत्पातविघाताय नमो लीलास्वरूपिणे। सर्वान्तर्यामिणे तुभ्यं सर्वाध्यक्षाय ते नमः।।९।। हे प्रभु ! आप‌ आधिदैविक, आधिभौतिक तथा आध्यात्मिक- इन तीनों प्रकार के तापों का हरण करने वाले आपको नमस्कार है। समस्त उपद्रवों का नाश करने वाले तथा लीलास्वरूप आपको नमस्कार है। आप सर्वान्तर्यामी को नमस्कार है। आप सर्वाध्यक्ष को नमस्कार है। अदित्या जठरोत्पन्न विनायक नमोऽस्तु ते। परब्रह्मस्वरूपाय नमः कश्यपसूनवे।।१०।। देवी अदिति के गर्भ से उत्पन्न हे विनायक ! आपको नमस्कार है। आप परब्रह्मस्वरूप कश्यपपुत्र को नमस्कार है। अमेयमायान्वितविक्रमाय मायाविने मायिकमोहनाय। अमेयमायाहरणाय माया- महाश्रयायास्तु नमो नमस्ते।।११।। अपरिमित माया से सम्पन्न पराक्रम वाले, मायास्वरूप, मायावियों को भी मोहित कर देने वाले, अपरिमेय माया का हरण कर लेने वाले तथा महामाया के आश्रयस्वरूप आपको बार-बार नमस्कार है। य इदं पठते स्तोत्रं त्रिसंध्योत्पातनाशनम्। न भवन्ति महोत्पाता विघ्ना भूतभयानि च।।१२।। जो मनुष्य तीनों सन्ध्याकालों में उपद्रवों का नाश करने वाले इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे महान् उत्पात, विघ्न तथा भूत-प्रेत जनित भय नहीं होता। त्रिसंध्यं यः पठेत् स्तोत्रं सर्वान् कामानवाप्नुयात्। विनायकः सदा तस्य रक्षणं कुरुतेऽनघ।।१३।। जो तीनों सन्ध्याओं में इस स्तोत्र को पढ़ता है, वह समस्त वांछित फल प्राप्त करता है और हे अनघ ! विनायक गणेश सदा उसकी रक्षा करते हैं। ।। इति श्रीगणेशपुराणे उत्पातनाशनगणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।

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आज का दैनिक राशिफल Rashifal 30/8/2025

आज का दैनिक राशिफल Aaj ka dainik rashifal (30-08-2025) Daily Rashifal,Daily Horoscope मेष30-08-2025 ♈ मेष :आज का दिन आपके आत्मविश्वास को और ऊँचाई देगा। कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलेंगे और आपके प्रयास रंग लाएँगे। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। दोस्तों के साथ समय अच्छा बीतेगा। आर्थिक दृष्टि से लाभ के योग हैं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, यात्रा लाभकारी साबित हो सकती है। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 9 भाग्यशाली रंग: लाल वृष 30-08-2025 ♉ वृषभ :आज का दिन स्थिरता और संतुलन लाएगा। नौकरी में सहयोगियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में नई योजनाएँ बनेंगी। परिवार के साथ समय बितेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी लेकिन खर्च नियंत्रित रखें। विद्यार्थियों के लिए शुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण भाग्यशाली संख्या: 2 भाग्यशाली रंग: सफेद मिथुन 30-08-2025 ♊ मिथुन :आज आपके विचारों की प्रशंसा होगी। कार्यक्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में सामंजस्य बना रहेगा। खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है लेकिन आय भी अच्छी रहेगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य में सुधार होगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 5 भाग्यशाली रंग: हरा कर्क 30-08-2025 ♋ कर्क :आज आपके पराक्रम और मेहनत का फल मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन बेहतर होगा। परिवार के सदस्यों से स्नेह मिलेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। निवेश से लाभ होगा। विद्यार्थी अपनी मेहनत से अच्छे परिणाम पाएंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 3 भाग्यशाली रंग: हल्का नीला सिंह 30-08-2025 ♌ सिंह :आज आपका आत्मबल ऊँचा रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए प्रोजेक्ट शुरू हो सकते हैं। आर्थिक मामलों में लाभ होगा। परिवार में खुशहाली बनी रहेगी। प्रेम संबंध मधुर रहेंगे। विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, योग और ध्यान करें। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 1 भाग्यशाली रंग: पीला कन्या30-08-2025 ♍ कन्या :आज आपके प्रयास सफल होंगे। नौकरी में तरक्की संभव है। व्यापार में लाभ होगा। परिवार का माहौल खुशनुमा रहेगा। आर्थिक दृष्टि से दिन लाभकारी है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में अच्छे परिणाम मिलेंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा लेकिन व्यस्तता अधिक हो सकती है। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 6 भाग्यशाली रंग: हरा तुला 30-08-2025 ♎ तुला :आज का दिन उत्साह से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में सौहार्द बना रहेगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। संतान की ओर से शुभ समाचार मिलेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। यात्रा लाभकारी होगी। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 8 भाग्यशाली रंग: गुलाबी वृश्चिक 30-08-2025 ♏ वृश्चिक :आज आत्मविश्वास बढ़ेगा और मेहनत रंग लाएगी। नौकरी में सफलता मिलेगी। व्यापार में नए अवसर मिलेंगे। परिवार में सुख और शांति बनी रहेगी। दांपत्य जीवन अच्छा रहेगा। विद्यार्थियों को मेहनत का फल मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 4 भाग्यशाली रंग: लाल धनु 30-08-2025 ♐ धनु :आज भाग्य आपका साथ देगा। कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान मिलेगा। व्यापार में निवेश लाभकारी होगा। परिवार के साथ अच्छा समय बितेगा। धार्मिक कार्यों में रुचि रहेगी। विद्यार्थियों को सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 7 भाग्यशाली रंग: केसरिया मकर 30-08-2025 ♑ मकर :आज मेहनत रंग लाएगी। नौकरी में पदोन्नति संभव है। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। बच्चों से सुख मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 5 भाग्यशाली रंग: ग्रे कुंभ 30-08-2025 ♒ कुंभ :आज आपकी योजनाएँ सफल होंगी। नौकरी में सफलता और सम्मान मिलेगा। व्यापार में मुनाफा होगा। परिवार का सहयोग मिलेगा। संतान की ओर से सुख मिलेगा। दांपत्य जीवन अच्छा रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण भाग्यशाली संख्या: 2 भाग्यशाली रंग: नीला मीन 30-08-2025 ♓ मीन :आज का दिन लाभकारी रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। व्यापार में उन्नति होगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय व्यतीत होगा। विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छे परिणाम पाएंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 6 भाग्यशाली रंग: बैंगनी

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आज का दैनिक पंचांग Panchang

दिनांक:-30 अगस्त 2025 शनिवार (Saturday) — 🌄 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय 🌄 — सूर्योदय – 05:58 चन्द्रोदय – 12:14 सूर्यास्त – 18:45 चन्द्रास्त – 22:38 — पञ्चाङ्ग — तिथि – सप्तमी – 22:46 तक योग – इन्द्र – 15:10 तक वार – शनिवार पक्ष – शुक्ल पक्ष नक्षत्र – विशाखा – 14:37 तक करण – गर – 09:34 तक — 🌙 चन्द्र मास एवं सम्वत 🌙 — शक सम्वत – 1947 विश्वावसु विक्रम सम्वत – 2082 कालयुक्त गुजराती सम्वत – 2081 नल चन्द्रमास – भाद्रपद – पूर्णिमान्त — राशि तथा नक्षत्र — चन्द्र राशि – तुला – 07:53 तक सूर्य राशि – सिंह सूर्य नक्षत्र – मघा – 21:52 तक सूर्य नक्षत्र पद – मघा – 21:52 तक नक्षत्र पद – विशाखा – 07:53 तक — ऋतु और अयन — द्रिक ऋतु – शरद वैदिक ऋतु – वर्षा द्रिक अयन – दक्षिणायण वैदिक अयन – दक्षिणायण दिनमान – 12 घण्टे 46 मिनट्स 41 सेकण्ड्स रात्रिमान – 11 घण्टे 13 मिनट्स 48 सेकण्ड्स मध्याह्न – 12:21 — अन्य कैलेंडर — कलियुग – 5126 वर्ष कलि अहर्गण – 1872452 दिन जूलियन दिनाङ्क – अगस्त 17, 2025 सीई राष्ट्रीय नागरिक दिनाङ्क – भाद्रपद 08, 1947 शक राष्ट्रीय निरयण दिनाङ्क – भाद्रपद 15, 1947 शक लाहिरी अयनांश – 24.222290 राटा डाई – 739493 जूलियन दिन – अगस्त 17, 2025 सीई संशोधित जूलियन दिन – 60917 दिन — शुभ समय — ब्रह्म मुहूर्त – 04:28 से 05:13प्रातः सन्ध्या – 04:51 से 05:58 अभिजित मुहूर्त – 11:56 से 12:47 विजय मुहूर्त – 14:29 से 15:20 गोधूलि मुहूर्त – 18:45 से 19:07 सायाह्न सन्ध्या – 18:45 से 19:52 अमृत काल – 05:49, अगस्त 31 से 07:37, अगस्त 31 निशिता मुहूर्त – 23:59 से 00:44, अगस्त 31 त्रिपुष्कर योग – 05:58 से 14:37 — अशुभ समय — राहुकाल – 09:10 से 10:46 यमगण्ड – 13:57 से 15:33 आडल योग – 05:58 से 14:37 दुर्मुहूर्त – 05:58 से 06:49 गुलिक काल – 05:58 से 07:34 भद्रा – 22:46 से 05:59, अगस्त 31 वर्ज्य – 19:05 से 20:53 विंछुड़ो – 07:53 से 05:59, अगस्त 31 बाण – रज – 13:35 से पूर्ण रात्रि तक — पंचक रहित — रोग पञ्चक – 05:58 से 07:20 शुभ मुहूर्त – 07:20 से 09:36 मृत्यु पञ्चक – 09:36 से 11:56 अग्नि पञ्चक – 11:56 से 14:14 शुभ मुहूर्त – 14:14 से 14:37 रज पञ्चक – 14:37 से 16:18 शुभ मुहूर्त – 16:18 से 18:01 चोर पञ्चक – 18:01 से 19:28 शुभ मुहूर्त – 19:28 से 20:53 शुभ मुहूर्त – 20:53 से 22:28 चोर पञ्चक – 22:28 से 22:46 शुभ मुहूर्त – 22:46 से 00:24, अगस्त 31 रोग पञ्चक – 00:24, अगस्त 31 से 02:38, अगस्त 31 शुभ मुहूर्त – 02:38, अगस्त 31 से 04:59, अगस्त 31 मृत्यु पञ्चक – 04:59, अगस्त 31 से 05:59, अगस्त 31 — उदय लग्न — सिंह – 05:03 से 07:20 कन्या – 07:20 से 09:36 तुला – 09:36 से 11:56 वृश्चिक – 11:56 से 14:14 धनु – 14:14 से 16:18 मकर – 16:18 से 18:01 कुम्भ – 18:01 से 19:28 मीन – 19:28 से 20:53 मेष – 20:53 से 22:28 वृषभ – 22:28 से 00:24, अगस्त 31 मिथुन – 00:24, अगस्त 31 से 02:38, अगस्त 31 कर्क – 02:38, अगस्त 31 से 04:59, अगस्त 31

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आज का दैनिक राशिफल Rashifal 29/8/2025 शुक्रवार

आज का दैनिक राशिफल Aaj ka dainik rashifal (29-08-2025) Daily Horoscope,Daily Rashifal मेष ( Aries)29-08-2025 ♈ मेष :आज आपका आत्मविश्वास और मेहनत आपको कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ाएगी। लंबे समय से रुके कार्यों में गति आएगी। परिवार में सुखद माहौल रहेगा और रिश्तों में सामंजस्य बढ़ेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, यात्रा संभव है। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 3 भाग्यशाली रंग: लाल वृष (Tauras)29-08-2025 ♉ वृषभ :आज धैर्य और संयम आपके लिए लाभकारी रहेगा। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में लाभ की संभावना है। परिवार में शांति बनी रहेगी। आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी लेकिन जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। विद्यार्थियों को अध्ययन में सफलता मिलेगी। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण भाग्यशाली संख्या: 7 भाग्यशाली रंग: हल्का हरा मिथुन (Gemini)29-08-2025 ♊ मिथुन :आज आपकी वाणी और बुद्धिमत्ता से लोग प्रभावित होंगे। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं। व्यवसाय में लाभ होगा। परिवार के साथ समय बितेगा। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए ध्यान रखें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा लेकिन नींद पूरी लें। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 4 भाग्यशाली रंग: नीला कर्क (Cancer)29-08-2025 ♋ कर्क :आज का दिन पारिवारिक सौहार्द का रहेगा। घर में खुशियों का माहौल रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और आपको प्रशंसा मिलेगी। आर्थिक मामलों में स्थिरता बनी रहेगी। नए निवेश से पहले सोच-समझकर निर्णय लें। सेहत अच्छी रहेगी। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 1 भाग्यशाली रंग: सफेद सिंह (Leo)29-08-2025 ♌ सिंह :आज आपका आत्मबल और नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे। प्रेम जीवन में मधुरता रहेगी। आर्थिक मामलों में लाभ होगा लेकिन अनावश्यक खर्च न करें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें और तनाव से दूर रहें। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 6 भाग्यशाली रंग: सुनहरा कन्या (Vergo)29-08-2025 ♍ कन्या :आज आपकी योजनाएं सफल होंगी। नौकरी में अच्छे परिणाम मिलेंगे। परिवार का सहयोग मिलेगा। आर्थिक मामलों में फायदा होगा। विद्यार्थियों के लिए शुभ समय है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा लेकिन अधिक थकान से बचें। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 5 भाग्यशाली रंग: हरा तुला (Libra)29-08-2025 ♎ तुला :आज का दिन सकारात्मक परिणाम देगा। कामकाज में सफलता मिलेगी और नए अवसर प्राप्त होंगे। घर में शांति और सौहार्द बना रहेगा। जीवनसाथी के साथ संबंध और मजबूत होंगे। संतान की पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन रहेगा। आर्थिक स्थिति संतोषजनक रहेगी। यात्रा संभव है। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पूर्व भाग्यशाली संख्या: 8 भाग्यशाली रंग: गुलाबी वृश्चिक (Scorpio)29-08-2025 ♏ वृश्चिक :आज आत्मविश्वास और मेहनत से सफलता मिलेगी। आर्थिक लाभ के योग हैं। नौकरीपेशा लोगों को नए अवसर प्राप्त होंगे। व्यापारियों के लिए समय शुभ रहेगा। परिवार में स्नेह और सहयोग मिलेगा। दांपत्य जीवन में मिठास रहेगी। सेहत सामान्य रहेगी, व्यायाम करें। भाग्यशाली दिशा: दक्षिण-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 2 भाग्यशाली रंग: लाल धनु (Sagitarious)29-08-2025 ♐ धनु :आज भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। कार्यक्षेत्र में सम्मान और मान्यता प्राप्त होगी। व्यापार में निवेश लाभकारी रहेगा। परिवार के साथ समय बिताएँगे। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा। भाग्यशाली दिशा: पूर्व भाग्यशाली संख्या: 9 भाग्यशाली रंग: केसरिया मकर (Capricorn)29-08-2025 ♑ मकर :आज मेहनत का फल मिलेगा। कार्यक्षेत्र में सहयोगियों से सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। जीवनसाथी का समर्थन मिलेगा। बच्चों की उपलब्धि से मन खुश होगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर-पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 7 भाग्यशाली रंग: ग्रे कुंभ (Aquarius)29-08-2025 ♒ कुंभ :आज आपकी योजनाएँ सफल होंगी। नौकरी में पदोन्नति या सम्मान मिलने की संभावना है। व्यापार में लाभ होगा। परिवार का माहौल आनंददायक रहेगा। रिश्तेदारों से मुलाकात सुखद रहेगी। संतान से सुख मिलेगा। दांपत्य जीवन अच्छा रहेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। भाग्यशाली दिशा: पश्चिम भाग्यशाली संख्या: 4 भाग्यशाली रंग: नीला मीन (Pisces)29-08-2025 ♓ मीन :आज का दिन लाभकारी रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। व्यापार में उन्नति होगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएँगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विद्यार्थी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। सेहत अच्छी रहेगी और मन प्रसन्न रहेगा। भाग्यशाली दिशा: उत्तर भाग्यशाली संख्या: 6 भाग्यशाली रंग: समुद्री हरा

आज का दैनिक राशिफल Rashifal 29/8/2025 शुक्रवार Read Post »

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आज का दैनिक पंचांग Aaj ka dainik panchang

दिनांक:-29 अगस्त 2025 शुक्रवार — 🌄 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय 🌄 — सूर्योदय – 05:58 चन्द्रोदय – 11:18 सूर्यास्त – 18:46 चन्द्रास्त – 22:00 — पञ्चाङ्ग –तिथि – षष्ठी – 20:21 तक योग – ब्रह्म – 14:13 तक वार – शुक्रवार पक्ष – शुक्ल पक्ष नक्षत्र – स्वाती – 11:38 तक करण – कौलव – 07:08 तक — 🌙 चन्द्र मास एवं सम्वत 🌙 — शक सम्वत – 1947 विश्वावसु विक्रम सम्वत – 2082 कालयुक्त गुजराती सम्वत – 2081 नल चन्द्रमास – भाद्रपद – पूर्णिमान्त — राशि तथा नक्षत्र — चन्द्र राशि – तुला सूर्य राशि – सिंह सूर्य नक्षत्र – मघा सूर्य नक्षत्र पद – मघा नक्षत्र पद – स्वाती – 11:38 तक — ऋतु और अयन — द्रिक ऋतु – शरद वैदिक ऋतु – वर्षाद्रिक अयन – दक्षिणायण वैदिक अयन – दक्षिणायण दिनमान – 12 घण्टे 48 मिनट्स 18 सेकण्ड्स रात्रिमान – 11 घण्टे 12 मिनट्स 11 सेकण्ड्स मध्याह्न – 12:22 — अन्य कैलेंडर — कलियुग – 5126 वर्ष कलि अहर्गण – 1872451 दिन जूलियन दिनाङ्क – अगस्त 16, 2025 सीई राष्ट्रीय नागरिक दिनाङ्क – भाद्रपद 07, 1947 शक राष्ट्रीय निरयण दिनाङ्क – भाद्रपद 14, 1947 शक लाहिरी अयनांश – 24.222252 राटा डाई – 739492 जूलियन दिन – अगस्त 16, 2025 सीई संशोधित जूलियन दिन – 60916 दिन — शुभ समय — ब्रह्म मुहूर्त – 04:28 से 05:13प्रातः सन्ध्या – 04:51 से 05:58 अभिजित मुहूर्त – 11:56 से 12:47 विजय मुहूर्त – 14:30 से 15:21 गोधूलि मुहूर्त – 18:46 से 19:08 सायाह्न सन्ध्या – 18:46 से 19:53 अमृत काल – 04:44, अगस्त 30 से 06:31, अगस्त 30 निशिता मुहूर्त – 24:00 से 00:44, अगस्त 30 रवि योग – 05:58 से 11:38 — अशुभ समय — राहुकाल – 10:46 से 12:22 यमगण्ड – 15:34 से 17:10 आडल योग – 11:38 से 05:58, अगस्त 30 विडाल योग – 05:58 से 11:38 गुलिक काल – 07:34 से 09:10 दुर्मुहूर्त – 08:31 से 09:22 वर्ज्य – 17:56 से 19:44 बाण – अग्नि – 12:46 तक — पंचक रहित — शुभ मुहूर्त – 05:58 से 07:24 चोर पञ्चक – 07:24 से 09:40 शुभ मुहूर्त – 09:40 से 11:38 रोग पञ्चक – 11:38 से 12:00 शुभ मुहूर्त – 12:00 से 14:18 मृत्यु पञ्चक – 14:18 से 16:22 अग्नि पञ्चक – 16:22 से 18:04 शुभ मुहूर्त – 18:04 से 19:32 रज पञ्चक – 19:32 से 20:21 शुभ मुहूर्त – 20:21 से 20:57 शुभ मुहूर्त – 20:57 से 22:32 रज पञ्चक – 22:32 से 00:28, अगस्त 30 शुभ मुहूर्त – 00:28, अगस्त 30 से 02:42, अगस्त 30 चोर पञ्चक – 02:42, अगस्त 30 से 05:03, अगस्त 30 शुभ मुहूर्त – 05:03, अगस्त 30 से 05:58, अगस्त 30 — उदय लग्न — सिंह – 05:07 से 07:24 कन्या – 07:24 से 09:40 तुला – 09:40 से 12:00 वृश्चिक – 12:00 से 14:18 धनु – 14:18 से 16:22 मकर – 16:22 से 18:04 कुम्भ – 18:04 से 19:32 मीन – 19:32 से 20:57 मेष – 20:57 से 22:32 वृषभ – 22:32 से 00:28, अगस्त 30 मिथुन – 00:28, अगस्त 30 से 02:42, अगस्त 30 कर्क – 02:42, अगस्त 30 से 05:03, अगस्त 30

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स्तोत्र Stotra

श्री गणेशमहिम्न: स्तोत्र (श्रीपुष्पदन्तविरचितं)

भगवान श्री गणेश का अद्भुत स्तोत्र जिसके पठन के प्रभाव से होती है आपकी यात्रा सफल और होता है यात्रा का उद्देश्य सफल ! श्री गणेशमहिम्न: स्तोत्र (श्रीपुष्पदन्तविरचितं) भगवान् शिव एवं गणपति के अनन्य भक्त श्रीपुष्पदन्तजी द्वारा विरचित इस स्तोत्र में भगवान् गणेश की महिमा का विस्तृत वर्णन इकत्तीस (31) श्लोकों में किया गया है । स्तोत्र पाठ के लाभ :आत्मानन्द की प्राप्ति । यात्रा की निर्विघ्न पूर्ति तथा उद्देश्य की प्राप्ति । मोक्ष प्राप्ति । विद्या-ऐश्वर्य तथा धन की प्राप्ति । सुलक्षणा पत्नी एवं सुपुत्र की प्राप्ति । श्रीगणेशमहिम्न: स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित।। अनिर्वाच्यं रूपं स्तवननिकरो यत्र गणित स्तथा वक्ष्ये स्तोत्रं प्रथमपुरुषस्यात्र महतः। यतो जातं विश्वं स्थितमपि सदा यत्र विलयः स कीदृग्गीर्वाणः सुनिगमनुतः श्रीगणपतिः ॥१॥ श्रीगणेशजी का रूप अनिर्वचनीय है और जिनकी अनेक स्तुतियाँ की गयी हैं तथापि उन महत्तम परम पुरुष का स्तवन् करने को मैं उद्यत हूँ। जिनसे संसार की उत्पत्ति, स्थिति तथा संहारादि कार्य सदा होते रहते हैं, उन वेदवन्दित भगवान् श्रीगणपति की स्तुति वाणी से कैसे सम्भव है ? गणेशं गाणेशाः शिवमिति च शैवाश्च विबुधा, रविं सौरा विष्णुं प्रथमपुरुषं विष्णुभजकाः। वदन्त्येके शाक्ता जगदुदयमूलां परशिवां, न जाने किं तस्मै नम इति परं ब्रह्म सकलम् ॥२॥ जिन्हें भगवान् गणेश के भक्त गणेश कहते हैं, शिव के विद्वान् भक्त शिव कहते हैं, सूर्य के भक्त सूर्य कहते हैं, विष्णु के भक्त प्रथम पुरुष विष्णु कहते हैं, शक्ति की उपासना करने वाले जगत् की उत्पत्ति का मूल पराशक्ति शिवा कहते हैं, मुझे ज्ञात नहीं वे वस्तुतः क्या हैं ? उन सम्पूर्ण कलायुक्त परब्रह्म को मेरा नमस्कार है । तथेशं योगज्ञा गणपतिमिमं कर्म निखिलं, समीमांसा वेदान्तिन इति परं ब्रह्म सकलम् । अजां साङ्ख्यो ब्रूते सकलगुणरूपां च सततं प्रकर्तारं न्यायस्त्वथ जगति बौद्धा धियमिति ॥३॥ इन श्री गणपति को ही योग के तत्त्व को जानने वाले ईश्वर कहते हैं, पूर्वमीमांसक सम्पूर्ण कर्म कहते हैं, (उत्तर मीमांसक) वेदान्ती लोग पूर्ण परब्रह्म कहते हैं, सांख्यवादी सर्वगुणमयी अनादि प्रकृति कहते हैं, नैयायिक लोग संसार का कर्ता मानते हैं और बौद्ध लोग बुद्धि कहते हैं । कथं ज्ञेयो बुद्धेः परतर इयं बाह्यसरणिर्यथा धीर्यस्य स्यात्स च तदनुरूपो गणपतिः । महत्कृत्यं तस्य स्वयमपि महान् सूक्ष्ममणुवद् धृतिर्ज्योतिर्बिन्दुर्गगनसदृशः किञ्च सदसत् ॥४॥ उस परतर परमात्मा के वास्तविक रूप का ज्ञान बुद्धिगम्य नहीं है, क्योंकि यह बुद्धि के बाहर की बात है। जिसकी जैसी धारणा होती है, उसे गणपति उसी रूप में प्राप्त होते हैं। उनके कृत्य महान् हैं, वे स्वयं भी महत्तम तथा अणु से भी सूक्ष्मतम हैं। धृति, ज्योति, बिन्दु, आकाश आदि सब उन्हीं के रूप हैं। वे ही सत् तथा असत् रूप से सर्वत्र विद्यमान हैं । अनेकास्योऽपाराक्षिकरचरणोऽनन्तहृदय-स्तथा नानारूपो विविधवदनः श्रीगणपतिः । अनन्ताह्व: शक्त्या विविधगुणकर्मैकसमये त्वसङ्ख्यातानन्ताभिमतफलदोऽनेकविषये ॥५॥ श्री गणपति अनेक मुखों से युक्त हैं, अपार नेत्र, हाथ तथा चरणों वाले हैं, वे अनन्त हृदय वाले हैं, विविध रूपों वाले हैं, विविध प्रकार के मुखों वाले हैं, उनके न नामों का अन्त है और न शक्ति का अन्त है, क्योंकि नाना प्रकार के गुण एवं कर्मों का सम्पादन वे एक काल में करते हैं । अपने भक्तों को अनेक प्रकार के असंख्य, अनन्त मनोवांछित फल वे एक साथ प्रदान करते रहते हैं । न यस्यान्तो मध्यो न च भवति चादिः सुमहता- मलिप्तः कृत्वेत्थं सकलमपि खंवत् स च पृथक् । स्मृतः संस्मतॄणां सकलहृदयस्थः प्रियकरो नमस्तस्मै देवाय सकलसुरवन्द्याय महते ॥६॥ परमात्मास्वरूप श्रीगणेशजी का न आदि है, न अन्त है और न मध्य है। वे सब कुछ करते हुए भी आकाश की तरह अलिप्त रहते हैं । वे स्मरण करने वाले भक्तों द्वारा सदा वन्दित होकर उनके हृदयों में अन्तर्यामी रूप से विराजमान रहते हैं तथा उनका कल्याण करते रहते हैं। सभी देवताओं के वन्दनीय उन महान् देव को मेरा नमस्कार है । गणेशाद्यं बीजं दहनवनितापल्लवयुतं मनुश्चैकार्णोऽयं प्रणवसहितोऽभीष्टफलदः । सबिन्दुश्चाङ्गाद्यां गणकऋषिछन्दोऽस्य च निचृत्, स देवः प्राग्बीजं विपदपि च शक्तिर्जपकृताम् ॥७॥ हे गणेश ! आपका मूल बीजमन्त्र (गं) एकाक्षर है, जो बिन्दु, अंगादि और प्रणव के सहित अभीष्ट फल को प्रदान करता है। इस मन्त्र के ऋषि गणक, छन्द निचृत् एवं देवता गणपति हैं। विपत्तिकाल में बीजाक्षर सहित इस मन्त्र (ॐ गं गणपतये नमः) का जप करने से भक्तों को शक्ति प्राप्त होती है । गकारो हेरम्बः सगुण इति पुन्निर्गुणमयो, द्विधाऽप्येको जातः प्रकृतिपुरुषो ब्रह्म हि गणः । स चेशश्चोत्पत्तिस्थितिलयकरोऽयं प्रथमको, यतो भूतं भव्यं भवति पतिरीशो गणपतिः ॥८॥ गकार हेरम्ब (माता अम्बा के पुत्र) सगुण प्रकृति तत्त्व हैं और निर्गुण पुरुषतत्त्व भी हैं। एक होते हुए भी प्रकृति और पुरुष रूप में दो प्रकार से विभक्त हुआ वह ब्रह्म ही गण है। वे ही परमात्मा उत्पत्ति, स्थिति तथा प्रलय करने वाले हैं, वे गणपति ही आदिदेव हैं, जिनसे भूत, भविष्य तथा वर्तमान होते हैं, ये गणपति सबके पति तथा ईश हैं । गकारः कण्ठोर्ध्वं गजमुखसमो मर्त्यसदृशो णकारः कण्ठाधो जठरसदृशाकार इति च । अधोभागः कट्यां चरण इति हीशोऽस्य च तनु- र्विभातीत्थं नाम त्रिभुवनसमं भूर्भुवः सुवः ॥९॥ गजमुखाकार ‘ग’ कण्ठ के ऊर्ध्वभाग में स्थित मृत्युलोक सदृश है, ‘णकार’ जठराकार होकर कण्ठ के अधोभाग में स्थित है और शकार कटि के अधोभाग में चरण बनकर स्थित है। इस प्रकार श्रीगणपति का गणेश नाम भूर्भुवः तथा सुवरूप त्रिभुवन के समान सुशोभित हो रहा है । गणेशेति त्र्यर्णात्मकमपि वरं नाम सुखदं, सकृत्प्रोच्चैरुच्चारितमिति नृभिः पावनकरम् । गणेशस्यैकस्य प्रतिजपकरस्यास्य सुकृतं, न विज्ञातो नाम्नः सकलमहिमा कीदृशविधः ॥१०॥ तीन वर्णों का जो यह ‘गणेश’ ऐसा सुखद एवं सुन्दर नाम है, वह मनुष्यों के द्वारा एक बार भी उच्च स्वर से उच्चारण किये जाने पर उन्हें पवित्र कर देता है। एक बार भी ‘गणेश’ नाम का जप करने वाले का पुण्य फल नहीं जाना जा सकता है, तो उनके नाम की सम्पूर्ण महिमा कितनी है, इसे कौन जान सकता है । गणेशेत्याह्वां यः प्रवदति मुहुस्तस्य पुरतः, प्रपश्यंस्तद्वक्त्रं स्वयमपि गणस्तिष्ठति तदा । स्वरूपस्य ज्ञानं त्वमुक इति नाम्नास्य भवति, प्रबोधः सुप्तस्य त्वखिलमिह सामर्थ्यममुना ॥११॥ जिस भक्त की जिह्वा में ‘गणेश’ ऐसा नाम उच्चरित होता है, सम्पूर्ण गणरूपा सृष्टि उसके सामने उसके मुख की ओर बार-बार निहारती रहती है। इस नाम जप में स्वरूप ज्ञान कराने का ऐसा सामर्थ्य है – जैसे किसी सोये हुए व्यक्ति को उसका नाम लेकर पुकारने पर हो जाता है । गणेशो विश्वेऽस्मिन्स्थित इह च विश्वं गणपतौ गणेशो यत्रास्ते धृतिमतिरमैश्वर्यमखिलम् । समुक्तं नामैकं गणपतिपदं मङ्गलमयं तदेकास्यं दृष्टेः सकलविबुधास्येक्षणसमम् ॥१२॥ ब्रह्मरूप श्रीगणपति सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त हैं एवं सम्पूर्ण विश्व उन गणपति में व्याप्त है। जहाँ मूर्तिमान् श्रीगणेशजी अधिष्ठित होते हैं, वहाँ नैसर्गिक

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